MCQ
संधि-विच्छेद MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए संधि-विच्छेद के 28 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1कथन 1: 'सु + आगत' से 'स्वागत' बनता है। कथन 2: 'उ' के बाद भिन्न स्वर आने पर 'व' का प्रयोग होता है। उपर्युक्त कथनों के आधार पर सही विकल्प चुनिए।
यण-संधि में 'इ' के स्थान पर 'य', 'उ' के स्थान पर 'व' और 'ऋ' के स्थान पर 'र' आता है, जब इनके बाद भिन्न स्वर हो। 'सु + आगत' में 'सु' के अंत का 'उ' और 'आगत' का आरंभिक 'आ' मिलते हैं। इसलिए 'उ' के स्थान पर 'व' आकर 'स्वागत' रूप बनता है। कथन 1 उदाहरण है और कथन 2 उसी नियम को स्पष्ट करता है। अतः दोनों कथन सही हैं और दूसरा पहले की सही व्याख्या करता है।
प्र.2नीचे दिए गए अभिकथन और कारण को पढ़िए। अभिकथन: ‘देव + आलय’ का संधि-रूप ‘देवालय’ है। कारण: ‘अ + आ’ के मेल से ‘ए’ बनता है। सही विकल्प चुनिए।
‘देव’ के अंत में ‘अ’ ध्वनि है और ‘आलय’ की शुरुआत ‘आ’ से होती है। दीर्घ स्वर संधि में ‘अ + आ’ से ‘आ’ बनता है, इसलिए ‘देव + आलय’ का रूप ‘देवालय’ सही है। अभिकथन ठीक है। लेकिन कारण में कहा गया है कि ‘अ + आ’ से ‘ए’ बनता है, जो गुण संधि जैसा भ्रम है। यहाँ ‘ए’ नहीं, ‘आ’ बनता है। इसलिए अभिकथन सही और कारण गलत है।
प्र.3निम्नलिखित में से किस विकल्प में सही संधि-विच्छेद दिया गया है?
परोपकार में पर + उपकार का संयोग है। यहाँ अ + उ मिलकर ओ बनता है, इसलिए पर + उपकार से परोपकार रूप बनता है। यह गुण संधि का उदाहरण है। विकल्पों में वही विच्छेद सही है जिसमें दोनों मूल पद और उनके मिलने से बना स्वर-परिवर्तन ठीक बैठता हो। नर + ईश से नरेश बनता है, और नर + आश वाला विच्छेद अशुद्ध है। इसलिए सही उत्तर परोपकार = पर + उपकार है।
प्र.4सूची 1 और सूची 2 का सही मिलान कीजिए। सूची 1: 1. यथा + उचित 2. सु + आगत 3. प्रति + एक 4. प्रति + उपकार सूची 2: क. यथोचित ख. स्वागत ग. प्रत्येक घ. प्रत्युपकार
'यथा + उचित' में 'आ + उ' से 'ओ' बनकर 'यथोचित' होता है। 'सु + आगत' में 'उ' के बाद स्वर आने पर 'व्' का आगम होकर 'स्वागत' बनता है। 'प्रति + एक' में 'इ' के स्थान पर 'य्' आकर 'प्रत्येक' बनता है, और 'प्रति + उपकार' में भी यण संधि से 'प्रत्युपकार' बनता है। इसलिए सही क्रम 'यथोचित, स्वागत, प्रत्येक, प्रत्युपकार' है।
प्र.5सूची 1 के शब्दों का सूची 2 के संधि-भेदों से सही मिलान कीजिए। सूची 1: 1. गिरीश 2. महर्षि 3. सदैव 4. अत्यंत सूची 2: क. गुण संधि ख. वृद्धि संधि ग. यण संधि घ. दीर्घ संधि
'गिरीश' में 'गिरि + ईश' से 'इ + ई = ई' होता है, इसलिए यह दीर्घ संधि है। 'महर्षि' में 'महा + ऋषि' से 'आ + ऋ = अर्' बनता है, इसलिए यह गुण संधि है। 'सदैव' में 'सदा + एव' से 'आ + ए = ऐ' बनता है, इसलिए यह वृद्धि संधि है। 'अत्यंत' में 'अति + अंत' से 'इ' के स्थान पर 'य्' आता है, इसलिए यह यण संधि है। इस प्रकार सही मिलान '1-घ, 2-क, 3-ख, 4-ग' है।
आपने 28 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं
संधि-विच्छेद पर अनलिमिटेड अभ्यास RAS टेस्ट सीरीज़ + प्रैक्टिस पैक या गेट पास में मिलता है।
और प्रश्न
6निम्नलिखित में से किस शब्द में सवर्ण दीर्घ संधि है?
7निम्नलिखित में से 'निः + चय' का सही संधि-रूप कौन-सा है?
8अभिकथन और कारण को पढ़कर सही उत्तर चुनिए। अभिकथन: ‘निः + स्वार्थ’ का संधि-रूप ‘निस्स्वार्थ’ होता है। कारण: विसर्ग के बाद क या प आने पर विसर्ग ओ में बदल जाता है।
9अभिकथन और कारण पर विचार कीजिए। अभिकथन (अ): 'हरीश' का सही संधि-विच्छेद 'हरि + ईश' है। कारण (र): 'इ' और 'ई' के मेल से दीर्घ 'ई' बनता है।
10‘अति + उत्तम’ से बनने वाला शुद्ध संधि-रूप कौन-सा है?
11निम्नलिखित में से कौन-सा संधि-विच्छेद अशुद्ध है?
12निम्नलिखित में से किस शब्द में गुण संधि का उदाहरण है?
13निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ’ या ‘ई’ आए तो सामान्यतः ‘ए’ बनता है। कथन 2: ‘सुर + इंद्र’ का संधि-रूप ‘सुरेंद्र’ होता है। सही विकल्प चुनिए।
14निम्नलिखित में से किस शब्द में 'अ + इ = ए' की गुण संधि हुई है?
15नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: अ या आ के बाद ए या ऐ आए तो ऐ बनता है। कथन 2: एक + एक से एकैक रूप बनता है। कथन 3: देव + इंद्र से देवेंद्र रूप बनता है। कौन-से कथन सही हैं?
