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MCQ

समास-विग्रह MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए समास-विग्रह के 3 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए-

A चक्षुश्रवा - वह जो चक्षुओं से देखता है।
B षाण्मातुर - छह माताओं वाला।
C निर्जन - जो स्थान जन से रहित है।
D मंदोदरी - वह जिसका उदर मंद है।
व्याख्या

चक्षुश्रवा का विग्रह वह जो चक्षुओं से देखता है असंगत है। चक्षुश्रवा में श्रवा धातु-संबंध सुनने से जुड़ा है; पर दिए गए विग्रह में देखना लिख दिया गया है, इसलिए समास-विग्रह मेल नहीं खाता। षाण्मातुर का अर्थ छह माताओं वाला माना जाता है, इसलिए यह संगत है। निर्जन का विग्रह जन से रहित स्थान के रूप में सही बैठता है। मंदोदरी में उदर से जुड़ा वर्णन दिया गया है, इसलिए उसे असंगत नहीं माना गया। उत्तर-कुंजी के अनुसार त्रुटि चक्षुश्रवा वाले विग्रह में है।

प्र.2समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए।

A देशाटन - देश में अटन
B जीवनभर - पूरे जीवन
C लाजवाब - जवाब के साथ
D भोजनार्थ - भोजन के लिए
व्याख्या

लाजवाब का सही विग्रह जवाब के बिना या जिसका जवाब न हो के अर्थ में लिया जाता है; जवाब के साथ कहना अर्थ और समास-विग्रह दोनों दृष्टि से गलत है। देशाटन में देश में अटन, यानी देश में घूमना, अर्थ के अनुरूप है। जीवनभर का भाव पूरे जीवन तक चलता है, इसलिए उसका विग्रह सही है। भोजनार्थ में अर्थ प्रत्यय के रूप में भोजन के लिए का भाव साफ आता है। इसलिए असंगत समास-विग्रह लाजवाब वाला है।

प्र.3‘आनंदमग्न’ का समास-विग्रह होगा:

A आनंदित होना
B आनंद आना
C आनंद में डूबा हुआ
D आनंद ही आनंद
व्याख्या

‘आनंदमग्न’ में ‘मग्न’ का अर्थ किसी भाव या अवस्था में डूबा हुआ होता है। इसलिए इसका सही समास-विग्रह ‘आनंद में डूबा हुआ’ है। ‘आनंदित होना’ केवल प्रसन्न होने की क्रिया बताता है, समास-विग्रह नहीं। ‘आनंद आना’ बोलचाल की स्थिति है, इसमें ‘मग्न’ का भाव नहीं आता। ‘आनंद ही आनंद’ पुनरुक्ति जैसा भाव देता है, पर ‘आनंदमग्न’ के अर्थ को नहीं खोलता।

आपने 3 में से 3 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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