MCQ
हिन्दी वर्णमाला, उच्चारण एवं ध्वनि व्यवस्था MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए हिन्दी वर्णमाला, उच्चारण एवं ध्वनि व्यवस्था के 3 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1असंगत विकल्प चुनिए।
यह प्रश्न ध्वनियों के उच्चारण-स्थान और उच्चारण-प्रयत्न से जुड़ा है। ष मूर्धन्य और अघोष ऊष्म ध्वनि है, पर इसे अल्पप्राण कहना संगत नहीं माना जाता; इसलिए यह युग्म असंगत है। ब ओष्ठ्य, घोष और अल्पप्राण व्यंजन है। य तालव्य, घोष और अल्पप्राण अंतःस्थ ध्वनि के रूप में ठीक बैठता है। ई स्वर के वर्गीकरण में अग्र, संवृत्त और अवृत्तमुखी माना जाता है। इसलिए असंगति ष वाले विवरण में है।
प्र.2नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन (1): 'र' अन्तःस्थ व्यंजन वर्ण है। कथन (2): 'ई' का उच्चारण-स्थान तालु है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
हिन्दी वर्ण-विचार में य, र, ल और व को अन्तःस्थ व्यंजन माना जाता है, इसलिए 'र' के बारे में दिया गया कथन सत्य है। स्वर-वर्ग में इ और ई का उच्चारण-स्थान तालु माना जाता है, इसलिए 'ई' के बारे में दिया गया कथन भी सही है। दोनों को असत्य मानना गलत होगा। केवल पहले को सत्य या केवल दूसरे को सत्य मानने वाले कथन भी अधूरे हैं, क्योंकि यहाँ दोनों व्याकरणिक तथ्य मानक वर्गीकरण से मेल खाते हैं।
प्र.3नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन (1): 'ह' अनुनासिक वर्ण है। कथन (2): 'उ' घोष वर्ण है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें।
'ह' अनुनासिक वर्ण नहीं है। अनुनासिक वर्ण वे हैं जिनके उच्चारण में नाक से भी ध्वनि निकलती है, जैसे ङ, ञ, ण, न और म। 'ह' को सामान्यतः ऊष्म वर्णों में रखा जाता है, इसलिए पहला कथन असत्य है। दूसरी ओर 'उ' स्वर है और स्वरों का उच्चारण घोष माना जाता है, क्योंकि इनके उच्चारण में स्वरयंत्र का कंपन रहता है। इस आधार पर दूसरा कथन सत्य है। इसलिए सही स्थिति यह है कि पहला कथन गलत और दूसरा कथन सही है।
आपने 3 में से 3 नमूना प्रश्न देख लिए हैं
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