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बहुव्रीहि समास: सामासिक पद और समास-विग्रह MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए बहुव्रीहि समास: सामासिक पद और समास-विग्रह के 15 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1निम्नलिखित में कौन-सा पद बहुव्रीहि समास का सही उदाहरण है?

A नीला कमल
B रसोईघर
C नीलकंठ
D माता-पिता
व्याख्या

बहुव्रीहि समास में सामासिक पद अपने अवयवों का सीधा अर्थ न देकर किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है। नीलकंठ का विग्रह है जिसका कंठ नीला है, अर्थात शिव। यहाँ न तो केवल नीला प्रधान है, न कंठ; दोनों मिलकर बाहर के अधिकारी शिव को बताते हैं। इसलिए यह बहुव्रीहि है। नीला कमल साधारण पदबंध है, रसोईघर तत्पुरुष है और माता-पिता द्वंद्व है।

प्र.2निम्नलिखित में से किस विकल्प में 'चक्रपाणि' का समास-विग्रह बहुव्रीहि समास के अनुसार सही दिया गया है?

A चक्र है पाणि में जिसके
B चक्र का पाणि
C चक्र जैसा पाणि
D चक्र और पाणि
व्याख्या

बहुव्रीहि समास में सामासिक पद अपने अवयवों का सीधा अर्थ नहीं देता, बल्कि किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है। 'चक्रपाणि' का अर्थ केवल 'चक्र' और 'पाणि' नहीं है, बल्कि वह व्यक्ति है जिसके हाथ में चक्र हो। इसलिए इसका स्वाभाविक विग्रह 'चक्र है पाणि में जिसके' होगा। इसी संकेत से यह विष्णु जैसे धारक का बोध कराता है। बाकी विकल्प या तो संबंध, जोड़ या तुलना दिखाते हैं, इसलिए बहुव्रीहि का पूरा भाव नहीं देते।

प्र.3निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द बहुव्रीहि समास का उदाहरण नहीं है?

A राजपुत्र
B दशानन
C कमलनयन
D चतुर्भुज
व्याख्या

बहुव्रीहि समास में सामासिक पद से किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का बोध होता है। 'दशानन' में दस मुखों वाला व्यक्ति, 'चतुर्भुज' में चार भुजाओं वाला व्यक्ति और 'कमलनयन' में कमल जैसे नयनों वाला व्यक्ति समझा जाता है। इन तीनों में अर्थ पदों से बाहर जाता है। 'राजपुत्र' का विग्रह 'राजा का पुत्र' है, जिसमें दूसरा पद 'पुत्र' प्रधान है और षष्ठी तत्पुरुष संबंध बनता है। इसलिए बहुव्रीहि न होने वाला शब्द 'राजपुत्र' है।

प्र.4नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए। कथन I: 'त्रिलोचन' में संख्या 'तीन' होने के कारण यह हमेशा द्विगु समास ही माना जाएगा। कथन II: यदि किसी सामासिक पद का अर्थ 'तीन लोचन वाला व्यक्ति' हो, तो वह बहुव्रीहि समास हो सकता है। सही विकल्प चुनिए।

A दोनों कथन सही हैं।
B केवल कथन I सही है।
C केवल कथन II सही है।
D दोनों कथन गलत हैं।
व्याख्या

द्विगु और बहुव्रीहि में भ्रम अक्सर संख्या देखकर होता है। द्विगु में सामान्यतः संख्या के आधार पर समूह या परिमाण का भाव प्रधान रहता है, जबकि बहुव्रीहि में सामासिक पद किसी बाहरी व्यक्ति या वस्तु को बताता है। 'त्रिलोचन' का अर्थ यदि 'तीन लोचन वाला' व्यक्ति, जैसे शिव, है तो पद का अर्थ अवयवों से बाहर जा रहा है। इसलिए कथन I का 'हमेशा द्विगु' कहना गलत है और कथन II सही है।

प्र.5नीचे दिए गए अभिकथन और कारण पर विचार कीजिए। अभिकथन: त्रिलोचन बहुव्रीहि समास का उदाहरण है। कारण: इसका विग्रह तीन लोचन हैं जिसके होता है और यह अर्थ शिव जैसे बाहरी व्यक्ति पर लागू होता है।

A अभिकथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
B अभिकथन और कारण दोनों सही हैं, पर कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता।
C अभिकथन गलत है, पर कारण सही है।
D अभिकथन सही है, पर कारण गलत है।
व्याख्या

त्रिलोचन में त्रि और लोचन का सीधा अर्थ केवल तीन आँखें नहीं रह जाता। सामासिक पद उस व्यक्ति का बोध कराता है जिसकी तीन आँखें हैं, यानी सामान्य प्रयोग में शिव। बहुव्रीहि समास की यही पहचान है कि विग्रह में जिसके, जिसकी या जो जैसे संकेत आते हैं और अर्थ बाहर के व्यक्ति पर जाता है। इसलिए अभिकथन सही है। कारण भी सही है और वही बताता है कि त्रिलोचन को बहुव्रीहि क्यों माना जाएगा।

आपने 15 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6नीचे दिए गए अभिकथन और कारण पर विचार कीजिए। अभिकथन: 'पीताम्बर' बहुव्रीहि समास का उदाहरण है। कारण: इसका अर्थ केवल पीला वस्त्र नहीं, बल्कि वह व्यक्ति है जिसके वस्त्र पीले हैं। सही विकल्प चुनिए।

Aअभिकथन सही है, पर कारण गलत है।
Bअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, पर कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता।
Cअभिकथन गलत है, पर कारण सही है।
Dअभिकथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

7सूची 1 के सामासिक पदों को सूची 2 के सही समास-विग्रह से मिलाइए। सूची 1 1. लंबोदर 2. दशानन 3. नीलकंठ 4. चतुर्भुज सूची 2 क. चार भुजाएँ हैं जिसकी ख. लंबा है उदर जिसका ग. नीला है कंठ जिसका घ. दस आनन हैं जिसके

A1-क, 2-घ, 3-ग, 4-ख
B1-ख, 2-घ, 3-ग, 4-क
C1-ख, 2-क, 3-ग, 4-घ
D1-ग, 2-घ, 3-ख, 4-क

8सूची एक में दिए गए सामासिक पदों को सूची दो के समास-विग्रह से मिलाइए। सूची एक क. दशानन ख. चतुर्भुज ग. पीतांबर घ. रक्ताक्ष सूची दो पहला. जिसकी चार भुजाएँ हैं दूसरा. जिसकी आँखें लाल हैं तीसरा. जिसके दस आनन हैं चौथा. जिसके पीले अंबर हैं

Aक-पहला, ख-तीसरा, ग-चौथा, घ-दूसरा
Bक-दूसरा, ख-पहला, ग-चौथा, घ-तीसरा
Cक-तीसरा, ख-पहला, ग-चौथा, घ-दूसरा
Dक-तीसरा, ख-चौथा, ग-पहला, घ-दूसरा

9'पीताम्बर' शब्द के संबंध में कौन-सा विकल्प अशुद्ध है?

Aयह शब्द श्रीकृष्ण के लिए प्रयुक्त हो सकता है।
Bइसमें केवल पीले रंग के वस्त्र का बोध है।
Cयह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।
Dइसका विग्रह 'पीत है अम्बर जिसका' हो सकता है।

10सामासिक पद घनश्याम का सही समास-विग्रह कौन-सा है?

Aघन का श्याम
Bघन और श्याम
Cश्याम घन
Dघन के समान श्याम है जो

11अभिकथन (A): 'नीलकंठ' शब्द बहुव्रीहि समास का उदाहरण है। कारण (R): इस शब्द का अर्थ केवल 'नीला कंठ' नहीं, बल्कि 'नीला कंठ है जिसका' होता है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

Aअभिकथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
Bअभिकथन गलत है, पर कारण सही है।
Cअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, पर कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता।
Dअभिकथन सही है, पर कारण गलत है।

12बहुव्रीहि समास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-सा कथन गलत है?

Aबहुव्रीहि में उत्तर पद ही हमेशा प्रधान रहता है।
Bपीतांबर का अर्थ पीले वस्त्र वाला व्यक्ति हो सकता है।
Cइसमें सामासिक पद का अर्थ उसके अवयवों से बाहर किसी अन्य पर लागू होता है।
Dलंबोदर का विग्रह लंबे उदर वाला है जो होता है।

13बहुव्रीहि समास की पहचान के संबंध में सही कथन चुनिए।

Aइसमें विग्रह करने पर हमेशा केवल करण कारक ही निकलता है।
Bइसमें पहले पद की प्रधानता रहती है और दूसरा पद केवल विशेषण बन जाता है।
Cइसमें दोनों पद समान रूप से प्रधान रहते हैं।
Dइसमें सामासिक पद अपने दोनों पदों से अलग किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है।

14'नीलकंठ' शब्द के लिए बहुव्रीहि समास का सही विग्रह कौन-सा है?

Aनीला है कंठ जिसका
Bनीला कंठ
Cनील से बना कंठ
Dकंठ का नीलापन

15सूची एक के सामासिक पदों को सूची दो के सही समास-विग्रह से मिलाइए। सूची एक 1. लंबोदर 2. दशानन 3. चतुर्भुज 4. कमलनयन सूची दो क. लंबा है उदर जिसका ख. दस आनन हैं जिसके ग. चार भुजाएँ हैं जिसकी घ. कमल के समान नयन जिसके

A1-घ, 2-ख, 3-ग, 4-क
B1-क, 2-ख, 3-ग, 4-घ
C1-क, 2-ग, 3-ख, 4-घ
D1-ख, 2-क, 3-ग, 4-घ

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