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द्विगु समास: सामासिक पद और समास-विग्रह MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए द्विगु समास: सामासिक पद और समास-विग्रह के 14 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए। कथन एक: हर वह सामासिक पद जिसमें पहला पद संख्या-सूचक हो, अपने-आप द्विगु समास नहीं हो जाता। कथन दो: द्विगु में संख्या-सूचक पूर्वपद के साथ समस्त पद से समूह या समाहार का अर्थ निकलना चाहिए। कथन तीन: 'त्रिनेत्र' को 'तीन नेत्रों वाला' अर्थ में लेने पर उसे द्विगु का शुद्ध उदाहरण माना जाएगा। सही विकल्प चुनिए।

A केवल कथन दो और तीन सही हैं
B केवल कथन एक और दो सही हैं
C तीनों कथन सही हैं
D केवल कथन एक और तीन सही हैं
व्याख्या

द्विगु समास में संख्या-सूचक पूर्वपद ज़रूरी संकेत है, पर वही अकेला पर्याप्त नहीं है। समस्त पद से समूह या समाहार का अर्थ भी निकलना चाहिए। इसलिए कथन एक सही है कि हर संख्या-आरंभ शब्द द्विगु नहीं होगा। कथन दो भी सही है, क्योंकि वह पूरा नियम बताता है। 'त्रिनेत्र' का अर्थ सामान्यतः 'तीन नेत्रों वाला' होता है; इसमें नेत्रों का समूह नहीं, किसी धारक की विशेषता प्रमुख है। इसलिए कथन तीन गलत है और सही उत्तर केवल कथन एक और दो है।

प्र.2निम्नलिखित में से कौन-सा सामासिक पद द्विगु समास का सही उदाहरण है?

A पंचपात्र
B जलपात्र
C नीलकमल
D माता-पिता
व्याख्या

द्विगु समास में पहले पद में संख्या का संकेत रहता है और पूरा शब्द किसी समूह या समाहार को बताता है। 'पंचपात्र' का विग्रह 'पाँच पात्रों का समूह' किया जा सकता है, इसलिए इसमें 'पंच' संख्या-सूचक पूर्वपद है। 'जलपात्र' में संख्या नहीं, उपयोग या संबंध का भाव है। 'नीलकमल' में रंग-गुण बताया गया है, इसलिए वह कर्मधारय है। 'माता-पिता' में दो पद समान महत्त्व से आए हैं, अतः वह द्वंद्व है। इसलिए सही उत्तर 'पंचपात्र' है।

प्र.3नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए। कथन I: द्विगु समास में पूर्वपद सामान्यतः संख्या-सूचक होता है। कथन II: हर संख्या-सूचक पूर्वपद वाला सामासिक पद द्विगु नहीं होता; अर्थ यदि किसी धारक पर जाए तो बहुव्रीहि भी हो सकता है। कथन III: द्विगु समास में दोनों पद हमेशा 'और' से जुड़े समान प्रधान पद होते हैं। सही विकल्प चुनिए।

A केवल कथन II और III सही हैं
B केवल कथन I और II सही हैं
C केवल कथन I और III सही हैं
D तीनों कथन सही हैं
व्याख्या

द्विगु समास की पहचान में दो बातें साथ देखी जाती हैं: पूर्वपद संख्या बताए और समस्त पद से समूह, समाहार या अवधि का अर्थ निकले। इसलिए कथन I सही है। कथन II भी सही है, क्योंकि संख्या दिखते ही हर शब्द को द्विगु मान लेना गलती है; 'दशानन' में अर्थ दस मुखों वाले व्यक्ति पर जाता है। कथन III द्वंद्व समास का लक्षण बताता है, जहाँ दोनों पद बराबर प्रधान होते हैं। अतः केवल कथन I और II सही हैं।

प्र.4अभिकथन (A): 'त्रिरत्न' को द्विगु समास का उदाहरण माना जा सकता है। कारण (R): द्विगु समास में संख्या-सूचक पूर्वपद के साथ समस्त पद से समूह या समाहार का बोध होता है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

A A गलत है, पर R सही है
B A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है
C A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता
D A सही है, पर R गलत है
व्याख्या

अभिकथन-कारण में पहले उदाहरण को नियम पर कसिए। 'त्रिरत्न' में 'त्रि' तीन की संख्या बताता है और पूरा शब्द तीन रत्नों के समूह का अर्थ देता है। इसलिए अभिकथन सही है। कारण में भी वही सामान्य नियम दिया गया है कि संख्या-सूचक पूर्वपद और समूह या समाहार-बोध मिलें तो द्विगु समास बनता है। यह कारण केवल सही नियम नहीं बताता, बल्कि 'त्रिरत्न' को द्विगु मानने का आधार भी समझाता है। अतः पहला विकल्प सही है।

प्र.5अभिकथन: ‘त्रिवेणी’ द्विगु समास का उदाहरण है। कारण: इसमें ‘त्रि’ संख्या-सूचक पूर्वपद है और पूरा पद तीन धाराओं या नदियों के संगम का बोध कराता है। सही विकल्प चुनिए।

A अभिकथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
B अभिकथन गलत है, पर कारण सही है।
C अभिकथन और कारण दोनों सही हैं, पर कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता।
D अभिकथन सही है, पर कारण गलत है।
व्याख्या

अभिकथन-कारण वाले प्रश्न में पहले दोनों वाक्यों की अलग-अलग सत्यता देखनी चाहिए, फिर संबंध देखना चाहिए। ‘त्रिवेणी’ में ‘त्रि’ तीन का संकेत देता है और ‘वेणी’ यहाँ तीन धाराओं या नदियों के मिलने से जुड़ा अर्थ बनाती है। इसलिए यह द्विगु समास का उदाहरण माना जाता है। कारण भी सही है और वही बताता है कि संख्या-सूचक पूर्वपद तथा संगम/समूह का अर्थ मिलकर द्विगु की पहचान बनाते हैं।

आपने 14 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6निम्नलिखित में द्विगु समास का सही उदाहरण कौन-सा है?

Aपंचवटी
Bदिनरात
Cराजपुत्र
Dनीलकमल

7द्विगु समास की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सा समास-विग्रह अशुद्ध है?

Aपंचवटी — पाँच वटों का समूह
Bदशमुख — दस मुखों का समूह
Cसप्तर्षि — सात ऋषियों का समूह
Dचतुष्पथ — चार रास्तों का संगम

8निम्नलिखित में कौन-सा कथन द्विगु समास के संदर्भ में गलत है?

Aद्विगु समास में पहला पद सामान्यतः संख्यावाचक होता है।
Bकेवल संख्या दिख जाने से हर शब्द द्विगु नहीं हो जाता।
C‘दशानन’ का विग्रह ‘दस आननों का समूह’ है।
D‘नवरत्न’ में नौ रत्नों के समूह का बोध होता है।

9‘त्रिभुवन’ शब्द का सही समास-विग्रह कौन-सा है?

Aतीन भुवनों का समूह
Bतीन प्रकार के भुवन
Cतीन और भुवन
Dतीनों भुवनों में रहने वाला

10निम्नलिखित में से कौन-सा सामासिक पद द्विगु समास का शुद्ध उदाहरण है?

Aनीलकंठ
Bचौमासा
Cरसोईघर
Dदिन-रात

11सूची एक के सामासिक पदों को सूची दो के सही समास-विग्रह से मिलाइए। सूची एक क. पंचवटी ख. त्रिभुवन ग. अष्टसिद्धि घ. चौराहा सूची दो एक. चार राहों का संगम दो. पाँच वटों का समूह तीन. आठ सिद्धियों का समूह चार. तीन भुवनों का समूह

Aक-एक, ख-चार, ग-तीन, घ-दो
Bक-दो, ख-चार, ग-तीन, घ-एक
Cक-दो, ख-तीन, ग-चार, घ-एक
Dक-चार, ख-दो, ग-एक, घ-तीन

12द्विगु समास की पहचान के लिए सबसे भरोसेमंद लक्षण कौन-सा है?

Aविग्रह में केवल 'का, की, के' संबंध ही निकले
Bदोनों पद अर्थ में समान रूप से प्रधान हों
Cपूर्वपद संख्या-सूचक हो और समस्त पद से समूह या समाहार का अर्थ निकले
Dपहला पद हमेशा अव्यय हो और पूरा पद क्रिया-विशेषण जैसा काम करे

13सूची I के सामासिक पदों को सूची II के सही समास-विग्रह से मिलाइए। सूची I 1. सप्ताह 2. त्रिवेणी 3. नवरात्र 4. पंचरत्न सूची II क. सात दिनों का समूह ख. तीन नदियों का संगम ग. नौ रातों का समूह घ. पाँच रत्नों का समूह

A1-ख, 2-क, 3-ग, 4-घ
B1-क, 2-ख, 3-ग, 4-घ
C1-ग, 2-ख, 3-क, 4-घ
D1-क, 2-घ, 3-ग, 4-ख

14सूची एक के सामासिक पदों का सूची दो में दिए गए समास-विग्रहों से सही मिलान कीजिए। सूची एक अ. सप्तर्षि ब. नवरत्न स. दोराहा द. चतुर्युग सूची दो 1. दो राहों का मिलन-स्थान 2. चार युगों का समूह 3. सात ऋषियों का समूह 4. नौ रत्नों का समूह

Aअ-1, ब-4, स-3, द-2
Bअ-3, ब-2, स-1, द-4
Cअ-4, ब-3, स-1, द-2
Dअ-3, ब-4, स-1, द-2

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