MCQ
विकास के सिद्धांत एवं आयाम MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए विकास के सिद्धांत एवं आयाम के 10 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1कक्षा 2 की एक शिक्षिका देखती है कि एक ही कक्षा के दो सात वर्षीय बच्चे समान स्कूली शिक्षा के बावजूद हस्तलेखन की सहजता, शब्द-भंडार की व्यापकता और दोस्ती करने में बहुत अलग हैं। कक्षा के इस अवलोकन की सबसे अच्छी व्याख्या विकास का कौन-सा सिद्धांत करता है?
वैयक्तिक भिन्नता का सिद्धांत बताता है कि समान आयु, लिंग और स्कूली शिक्षा वाले बच्चे भी एक जैसे नहीं होते। आनुवंशिकता, घरेलू परिवेश और पूर्व अनुभव में अंतर के कारण उनकी गत्यात्मक, भाषाई और सामाजिक क्षमताओं की गति तथा रूपरेखा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए प्राथमिक शिक्षक कक्षा 2 के एक ही कक्ष में विविध अधिगम-आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजना बनाते हैं। आरबीएसई REET स्तर 1 पाठ्यक्रम वैयक्तिक भिन्नता को मुख्य सिद्धांत के रूप में सूचीबद्ध करता है।
प्र.2प्राथमिक कक्षा-योजना के लिए विकास के निम्नलिखित विवरणों में से कितने सत्य हैं? (1) विकास जीवनपर्यंत है, बचपन तक सीमित नहीं। (2) विकास सरल से जटिल की ओर बढ़ता है। (3) विकास केवल विद्यालयी शिक्षा के कारण होता है, आनुवंशिकता से नहीं। (4) विकास वर्षों में अचानक नहीं, बल्कि क्रमिक रूप से होता है। (5) भाषा और संज्ञान का विकास परस्पर एक-दूसरे को मज़बूत करता है।
कथन (1), (2), (4) और (5) विकास के मानक सिद्धांत हैं। ये आरबीएसई REET स्तर 1 सीडीपी पाठ्यक्रम और एनसीईआरटी की प्राथमिक पुस्तिकाओं में मिलते हैं: विकास जीवनपर्यंत चलता है, सरल से जटिल की ओर बढ़ता है, अचानक नहीं बल्कि क्रमिक होता है, और भाषा का संज्ञान से घनिष्ठ संबंध रहता है। कथन (3) असत्य है, क्योंकि विकास आनुवंशिकता और परिवेश दोनों से आकार लेता है। विद्यालय भी घर, सहपाठी और पोषण के साथ एक महत्वपूर्ण परिवेशीय कारक है।
प्र.3निम्नलिखित में से कौन-सा ऐसा मान्य विकास-सिद्धांत नहीं है, जिस पर कक्षा 4 के शिक्षक को पाठ-योजना बनाते समय भरोसा करना चाहिए?
यह कहना कि हर बच्चा बिल्कुल एक ही गति और ढंग से बढ़ता है, वैयक्तिक भिन्नता के सिद्धांत का खंडन करता है, जो RBSE REET स्तर 1 CDP के लिए केंद्रीय है। बच्चे जीन, घर से मिलने वाले उद्दीपन, पोषण और भाषा-संपर्क में भिन्न होते हैं। अन्य तीन विकल्प व्यापक रूप से स्वीकृत हैं: पहले से अनुमान लगाए जा सकने वाला क्रम, आनुवंशिकता और परिवेश की परस्पर क्रिया, और सामान्य-से-विशिष्ट (सामान्यीकरण) प्रगति प्राथमिक शिक्षकों के लिए मानक विकासात्मक सिद्धांत हैं।
प्र.4कक्षा 3 के प्राथमिक शिक्षक के संदर्भ में बाल विकास के निरंतरता-सिद्धांत पर विचार कीजिए। (1) अधिकांश बच्चों में विकास बिना अचानक छलांग के निरंतर और क्रमिक चरणों में होता है। (2) बच्चा 8 वर्ष की आयु पर पहुँचते ही विकास अचानक रुक जाता है। (3) पहले का अधिगम विद्यालयी वर्षों में बाद के अधिगम का आधार बनता है। कौन-से कथन सही हैं?
निरंतरता का अर्थ है विकास जुड़े हुए, क्रमिक चरणों में सामने आता है जहाँ प्रत्येक नया कौशल पूर्व अधिगम पर आधारित होता है, इसलिए कक्षा 3 का विद्यार्थी नए शब्द इसलिए पढ़ पाता है क्योंकि पहले की वर्ण-ध्वनि की समझ ठोस थी। कथन 2 गलत है क्योंकि विकास जीवनपर्यंत चलता है और आठ वर्ष पर नहीं रुकता। कथन 1 और 3 मिलकर उस क्रमिक, संचयी प्रकृति को दर्शाते हैं जिस पर RBSE REET स्तर 1 बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र पाठ्यक्रम बल देता है।
प्र.5कक्षा 1 के शिक्षक द्वारा सिर से पाँव के विकास-क्रम को ध्यान में रखते हुए देखे जा सकने वाले निम्नलिखित स्थूल गत्यात्मक लक्ष्यों को सबसे पहले से सबसे बाद तक क्रम में लगाइए: (P) कई कदम तक एक पैर पर फुदकना। (Q) बिना बाहरी सहारे के सीधे बैठना। (R) कुछ क्षण के लिए अकेले खड़ा होना। (S) कमरे में बिना सहारे के चलना।
सिर से पाँव की दिशा में विकास होने के कारण पहले धड़ पर नियंत्रण परिपक्व होता है, फिर सीधी मुद्रा, फिर गति और अंत में संतुलन वाली गतियाँ आती हैं। सीधे बैठना (Q) सबसे पहले प्रकट होता है, फिर थोड़ी देर खड़े होना (R), फिर कमरे में चलना (S), और अंत में एक पैर पर फुदकना (P), जिसमें एक पैर पर संतुलन चाहिए। RBSE REET स्तर 1 CDP और NCERT के गत्यात्मक विकास चार्ट प्रारंभिक लक्ष्यों के लिए यही क्रम सूचीबद्ध करते हैं।
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और प्रश्न
6एक प्राथमिक शिक्षिका कक्षा 1 से 5 के लिए विकास के संज्ञानात्मक आयाम पर दो कथन पढ़ती हैं: कथन I — संज्ञानात्मक वृद्धि में ध्यान की अवधि, स्मृति, भाषा, तर्क और संख्या-बोध शामिल हैं। कथन II — कक्षा 3 के विद्यार्थी का संज्ञानात्मक विकास सामाजिक और संवेगात्मक आयामों से असंबंधित है। निम्नलिखित में से क्या सही है?
7अभिकथन (A): कक्षा 1 के शिक्षक को बच्चों से सुघड़ अक्षर-लेखन की अपेक्षा करने से पहले कूदना, फुदकना और गेंद लुढ़काना जैसी बड़ी-पेशी गतिविधियाँ करानी चाहिए। कारण (R): सिर-से-पाँव और केंद्र-से-परिधि की प्रवृत्तियों का अर्थ है कि शरीर के बड़े अंगों पर नियंत्रण हाथ की सूक्ष्म पेशियों पर नियंत्रण से पहले विकसित होता है।
8RBSE REET स्तर 1 के बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र पाठ्यक्रम में विकास के कितने अलग-अलग आयाम सामान्यतः बताए जाते हैं? यहाँ आयाम शारीरिक या गत्यात्मक, संज्ञानात्मक, भाषा, सामाजिक, संवेगात्मक और नैतिक माने गए हैं।
9सूची 1 में दिए विकास के आयामों को सूची 2 में दिए प्राथमिक कक्षा-कक्ष संकेतकों से सुमेलित कीजिए। सूची 1: (क) शारीरिक और गत्यात्मक (ख) संज्ञानात्मक (ग) भाषा (घ) सामाजिक-संवेगात्मक। सूची 2: (1) कक्षा 2 में अक्षर पहचानना और संख्या-योग पर तर्क करना (2) समूह कार्य के समय रंगीन पेंसिल बाँटना और अपनी बारी की प्रतीक्षा करना (3) तीन-अंगुलीय पकड़ से पेंसिल पकड़ना और एक पैर पर कूदना (4) कौन-क्या-कहाँ वाले प्रश्न पूछना और छोटी कहानी सुनाना।
10उस विकल्प की पहचान कीजिए जो कक्षा 5 में दिखाई देने वाले बाल विकास के एकीकरण-सिद्धांत का सही वर्णन करता है।
