MCQ
अधिगम सिद्धांत — व्यवहारवाद, गेस्टाल्ट, बंदूरा, पियाजे MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए अधिगम सिद्धांत — व्यवहारवाद, गेस्टाल्ट, बंदूरा, पियाजे के 10 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1कक्षा चार का एक बच्चा कुछ देर से जिग्सॉ पहेली में उलझा हुआ था। एक मिनट चुपचाप देखने के बाद वह अचानक टुकड़े सही तरीके से जोड़ देता है। कोहलर के गेस्टाल्ट प्रयोगों के अनुसार इस प्रकार के अधिगम को क्या नाम दिया गया है?
कोहलर के चिंपांज़ी पर किए अध्ययन से पता चला कि सीखने वाला अक्सर कुछ देर रुककर पूरी स्थिति को मन में फिर से जमाता है और तब अचानक हल समझ में आ जाता है। धीरे-धीरे प्रयास और भूल किए बिना, यह अचानक समझ आ जाना ही सूझ अधिगम कहलाता है, जो गेस्टाल्ट विचारधारा के इस सिद्धांत के केंद्र में है कि पूरा हिस्सों के जोड़ से बढ़कर होता है।
प्र.2पियाजे से जुड़ी यहाँ दी गई प्रमुख अवधारणाएँ कितनी हैं — स्कीमा, आत्मसात्करण, समायोजन और संतुलन-स्थापन?
यहाँ दी गई चार पियाजेकीय अवधारणाएँ हैं: स्कीमा, आत्मसात्करण, समायोजन और संतुलन-स्थापन। स्कीमा अनुभवों को व्यवस्थित करने की मानसिक रूपरेखा है। आत्मसात्करण नई सूचना को मौजूदा स्कीमा में फिट करता है। समायोजन तब स्कीमा को बदलता है या नया स्कीमा बनाता है जब पुरानी समझ नई स्थिति से मेल नहीं खाती। संतुलन-स्थापन वह प्रक्रिया है जिसके जरिए बच्चा असंतुलन से अधिक स्थिर समझ की ओर बढ़ता है। ये विचार मिलकर निरंतर संज्ञानात्मक विकास को समझाते हैं।
प्र.3कक्षा तीन का शिक्षक प्रतिदिन चित्रकला की शीट देने से ठीक पहले एक छोटी घंटी बजाता है। दो सप्ताह बाद बच्चे घंटी सुनते ही पेंसिल निकालने लगते हैं। यह शास्त्रीय अधिगम की कौन-सी संकल्पना दर्शाता है?
पावलोव के शास्त्रीय अनुबंधन के अनुसार जब कोई तटस्थ उद्दीपन किसी अर्थपूर्ण घटना के साथ बार-बार जोड़ा जाता है, तो वह स्वयं प्रतिक्रिया उत्पन्न करने लगता है। यहाँ घंटी पहले तटस्थ है; चित्रकला शीट के साथ जुड़ाव से वह अनुकूलित संकेत बन जाती है और पेंसिल निकालना अनुकूलित प्रतिक्रिया।
प्र.4पियाजे की मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था सामान्यतः किस अनुमानित आयु सीमा में आरंभ और समाप्त होती है?
पियाजे ने मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था लगभग 7 से 11 वर्ष की उम्र में मानी। इस अवस्था में बच्चे वास्तविक वस्तुओं पर तर्क करते हुए संरक्षण, उत्क्रमणीयता और वर्ग समावेशन सीख जाते हैं। यह उम्र REET स्तर एक के उच्च प्राथमिक आयु-वर्ग से मेल खाती है और यही तय करती है कि शिक्षक कक्षा में कौन-सी मूर्त गतिविधियाँ चुनें।
प्र.5बंदूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
बंदूरा का ढाँचा ध्यान, धारण, गत्यात्मक प्रतिकृति और अभिप्रेरणा को केंद्रीय प्रक्रियाएँ मानता है। आत्म-समर्थता और परोक्ष पुनर्बलन भी प्रमुख हैं। अवलोकनात्मक अधिगम के लिए प्रत्यक्ष बाह्य दंड आवश्यक नहीं है; नकल से जुड़े कई अधिग्रहण अवलोकनकर्ता को बिना किसी प्रत्यक्ष पुरस्कार या दंड के होते हैं।
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और प्रश्न
6कक्षा दो से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही संयोजन चुनें। कथन एक — पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन समझाता है कि विद्यालय की असेंबली घंटी बच्चों को पंक्ति में खड़े होने के लिए क्यों प्रेरित कर सकती है। कथन दो — स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन समझाता है कि शिक्षक से मिला प्रशंसा स्टिकर सुंदर लेखन को क्यों बढ़ाता है। कथन तीन — वर्थाइमर का गेस्टाल्ट सिद्धांत, जिसके अनुसार पूर्ण अपने अंगों के योग से अधिक होता है, कहानी को एक अर्थपूर्ण कथा के रूप में पढ़ाने में मदद करता है।
7स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन पर दो कथनों पर विचार करें। कथन एक: सुखद परिणाम के बाद उस व्यवहार के फिर से होने की संभावना बढ़ती है। कथन दो: अप्रिय परिणाम के बाद उस व्यवहार के फिर से होने की संभावना बढ़ती है। कौन-सा सही है?
8पियाजे की चार संज्ञानात्मक अवस्थाओं को शैशवावस्था से किशोरावस्था तक सही क्रम में लगाइए।
9थॉर्नडाइक के तीन मुख्य नियमों को कक्षा में उनके उदाहरणों से मिलाइए और सही जोड़ी समूह चुनिए।
10अभिकथन (A): बंदूरा के बोबो डॉल अध्ययन ने दिखाया कि बच्चों ने वयस्क मॉडल के आक्रामक व्यवहार की नकल की, भले ही बाद में वह मॉडल उपस्थित न हो। कारण (R): सामाजिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार अधिगमकर्ता प्रत्यक्ष पुनर्बलन के बिना केवल मॉडल को देखकर नई प्रतिक्रियाएँ सीख सकते हैं।
