MCQ
प्रतिभाशाली, सृजनशील एवं विशेष आवश्यकता वाले अधिगमकर्ता MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए प्रतिभाशाली, सृजनशील एवं विशेष आवश्यकता वाले अधिगमकर्ता के 9 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1टोरेन्स सृजनात्मक चिन्तन परीक्षण में प्रयुक्त सृजनशीलता के चार घटकों को उनके अर्थों से मिलाइए। सूची 1 (घटक) 1. प्रवाहशीलता 2. लचीलापन 3. मौलिकता 4. विस्तारण सूची 2 (अर्थ) पी. विचारों की अनेक भिन्न श्रेणियाँ उत्पन्न करना क्यू. किसी विचार को आगे विकसित करने वाले ब्योरे जोड़ना आर. बड़ी संख्या में विचार उत्पन्न करना एस. असाधारण या नए विचार उत्पन्न करना
गिलफोर्ड के अपसारी-चिन्तन कार्य पर आधारित टोरेन्स ने प्रवाहशीलता को विचारों की मात्रा (R), लचीलेपन को श्रेणियों की विविधता (P), मौलिकता को नवीनता (S) और विस्तारण को ब्योरे के विकास (Q) के रूप में परिभाषित किया।
प्र.2कक्षा 3 में प्रतिभाशाली अधिगमकर्ताओं की पहचान के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए — 1. किसी बच्चे को प्रतिभाशाली मानने के लिए केवल बुद्धिलब्धि की एक कट-ऑफ संख्या पर्याप्त है। 2. शिक्षक प्रेक्षण, बच्चे के काम के नमूने और सृजनशीलता से जुड़े कार्य जैसे अनेक मापदण्ड पहचान को अधिक विश्वसनीय बनाते हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
NCERT और NCF समेत आज के दिशानिर्देश सिर्फ़ एक IQ कट-ऑफ के आधार पर पहचान को बहुत सीमित और सांस्कृतिक रूप से पक्षपाती मानते हैं। बच्चे को कक्षा में देखना, उसके बनाए काम, रचनात्मक गतिविधियाँ और माता-पिता से मिली जानकारी—ऐसे कई आधार मिलकर प्राथमिक स्तर के प्रतिभाशाली बच्चे की कहीं ज़्यादा सही पहचान कराते हैं।
प्र.3निम्नलिखित में से वह विकल्प चुनिए जो विद्यालयी सन्दर्भ में सृजनशीलता के अध्ययन में जे. पी. गिलफोर्ड के योगदान का सर्वोत्तम वर्णन करता है।
गिलफोर्ड ने 1967 के बुद्धि-संरचना मॉडल में अभिसारी चिन्तन और अपसारी चिन्तन को सामने रखा। अभिसारी चिन्तन एक समाधान तक पहुँचने पर बल देता है, जबकि अपसारी चिन्तन अनेक और विविध समाधान उत्पन्न करता है। यही भेद विद्यालयों में सृजनशीलता के आकलन का आधार बना।
प्र.4लेविस टर्मन द्वारा प्रचलित शास्त्रीय स्टैन्फोर्ड-बिने परम्परा में, शुरुआती स्कूली पहचान-अध्ययनों में किसी बच्चे को 'प्रतिभाशाली' कहने के लिए किस बुद्धि-लब्धि (IQ) और उससे ऊपर के मान को आम तौर पर सीमा-रेखा माना जाता था?
टर्मन के शास्त्रीय कार्य में स्टैनफोर्ड-बिने पर लगभग 130 या उससे अधिक अंक को प्रतिभाशाली वर्ग की ऐतिहासिक सीमा माना गया। यह 100 के औसत से लगभग 2 मानक विचलन ऊपर था। आज की पहचान-प्रक्रिया बहु-मापदण्डों को अधिक महत्त्व देती है।
प्र.5निम्नलिखित में से किस कक्षा-संकेत को कक्षा 4 का शिक्षक अधिगमकर्ता में सृजनात्मक चिन्तन का प्रमाण मानने में सबसे कम विश्वसनीय मानेगा?
अक्षरशः प्रतिलिपि बनवाना स्मरण की जाँच करता है, अपसारी या मौलिक चिन्तन की नहीं। शेष तीन संकेत — असाधारण प्रासंगिक प्रश्न, नई प्रक्रिया सुझाना और परिचित विचारों का संयोजन — सीधे प्रवाहशीलता, लचीलेपन और मौलिकता से मेल खाते हैं।
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और प्रश्न
6अभिकथन (A): किसी प्राथमिक स्तर के शिक्षक को कक्षा 5 के उस प्रतिभाशाली अधिगमकर्ता के लिए विस्तार कार्य की योजना बनानी चाहिए जो मूल कार्यपत्रक दस मिनट में पूरा कर लेता है। कारण (R): विस्तार की व्यवस्था न होने पर प्रतिभाशाली अधिगमकर्ता को चुनौती नहीं मिलती और वह प्रायः ऊब, अनुचित व्यवहार या छुपी हुई उपलब्धि-न्यूनता दिखाता है। सही विकल्प चुनिए —
7जोसेफ रेंजुली की त्रि-वलय (तीन वृत्त) संकल्पना के अनुसार प्रतिभाशाली अधिगमकर्ता की पहचान करने वाले तीन परस्पर जुड़े गुण हैं — औसत से ऊपर की क्षमता, कार्य के प्रति प्रतिबद्धता और कौन-सा तीसरा गुण?
8कक्षा 2 के ऐसे अधिगमकर्ता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जिसे पढ़ने में विशिष्ट अधिगम कठिनाई है: 1. प्राथमिक स्तर पर उसे नियमित कक्षा से हटाकर अलग विशेष विद्यालय में भेजना ही सबसे उचित है। 2. एनसीईआरटी का समावेशी शिक्षा मार्गदर्शन उसे युक्तिसंगत अनुकूलन के साथ नियमित कक्षा में बनाए रखने का समर्थन करता है। 3. आकलन के समय युक्तिसंगत अनुकूलन में अतिरिक्त समय, मौखिक उत्तर का विकल्प और वाचक-सहायता शामिल हो सकती है। सही कथन-संयोजन कौन-सा है?
9दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत दिव्यांगता की कितनी पृथक श्रेणियाँ मान्य हैं — भारतीय विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले अधिगमकर्ताओं की पहचान इसी ढाँचे के आधार पर की जाती है?
