MCQ
हरित इस्पात और कार्बन उत्सर्जन में कमी MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए हरित इस्पात और कार्बन उत्सर्जन में कमी के 69 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1स्क्रैप-आधारित इस्पात निर्माण और पुनर्चक्रण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1) IEA कहता है कि स्क्रैप-आधारित उत्पादन लौह अयस्क से इस्पात बनाने की तुलना में काफी कम ऊर्जा-सघन है। 2) IEA वर्तमान स्क्रैप संग्रह दर लगभग 85 प्रतिशत बताता है। 3) IEA कहता है कि इस मार्ग में स्क्रैप की उपलब्धता और गुणवत्ता बाधाएं हैं। 4) IEA कहता है कि पुनर्चक्रण अकेले इस्पात डीकार्बनीकरण की सभी कच्चा-माल आवश्यकताएं पूरी कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। कथन 4 गलत है: IEA स्क्रैप की बाधा बताता है और उसका रोडमैप कहता है कि केवल पुनर्चक्रण आवश्यक स्तर तक उत्सर्जन घटाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्र.2भारत की ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी के अंतर्गत प्रमाणन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. टैक्सोनॉमी में संचालन से होने वाले स्कोप 1 प्रत्यक्ष उत्सर्जन शामिल हैं। 2. यह स्कोप 2 के बिजली-संबंधी अप्रत्यक्ष उत्सर्जन को रेटिंग गणना से बाहर रखती है। 3. सूचीबद्ध स्कोप 3 गतिविधियों में सिंटरिंग, पैलेट निर्माण, कोक निर्माण और कच्चे माल की खरीद शामिल हैं। 4. NISST को मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन तथा ग्रीन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1, 3 और 4 सही हैं। NISST पृष्ठ स्कोप 1 को शामिल करता है, स्कोप 3 में सिंटरिंग और कोक निर्माण जैसी गतिविधियां बताता है, और NISST को मापन-रिपोर्टिंग-सत्यापन तथा प्रमाणपत्र जारी करने के लिए नामित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि स्कोप 2 के बिजली-संबंधी अप्रत्यक्ष उत्सर्जन भी शामिल हैं।
प्र.3इस्पात के डीकार्बनीकरण में हरित हाइड्रोजन के उपयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन इस्पात क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं को सहायता देता है। 2. एक पात्र पायलट मार्ग ऊर्ध्वाधर शाफ्ट का उपयोग करते हुए 100 प्रतिशत हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष अपचयित लोहा निर्माण है। 3. पायलट दिशानिर्देश मौजूदा ब्लास्ट फर्नेस में हाइड्रोजन इंजेक्शन को प्रतिबंधित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1 और 2 सही हैं: मिशन इस्पात क्षेत्र की पायलट परियोजनाओं को सहायता देता है, जिनमें ऊर्ध्वाधर शाफ्ट के साथ 100 प्रतिशत हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष अपचयित लोहा निर्माण शामिल है। कथन 3 गलत है क्योंकि मौजूदा ब्लास्ट फर्नेस में हाइड्रोजन इंजेक्शन कोयला या कोक खपत घटाने के समर्थित मार्गों में से एक है।
प्र.4टाटा स्टील जमशेदपुर में लगाई जा रही ईज़ीमेल्ट तकनीक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1) ईज़ीमेल्ट लोहा बनाने में अपचायक के रूप में धातुकर्मीय कोक के बड़े हिस्से की जगह सिनगैस का उपयोग करती है। 2) इस परियोजना से सामान्य ब्लास्ट फर्नेस संचालन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में दस प्रतिशत से कम कमी होने की अपेक्षा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा कथन अथवा कौन-से कथन सही हैं?
कथन 1 सही है: ईज़ीमेल्ट अपचयन कारक के रूप में धात्विक कोक के एक महत्वपूर्ण हिस्से को सिनगैस से प्रतिस्थापित करता है, और सिनगैस टॉप-गैस पुनर्चक्रण तथा कोक-ओवन गैस की रिफॉर्मिंग द्वारा उत्पन्न होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि परियोजना का लक्ष्य आधार संचालन की तुलना में पचास प्रतिशत से अधिक CO2 कमी है, दस प्रतिशत से कम नहीं।
प्र.5भारतीय इस्पात निर्माण में हरित हाइड्रोजन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1) सरकार कहती है कि हाइड्रोजन-आधारित हरित इस्पात उत्पादन भारत में पहले से वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य है। 2) समर्थित परियोजनाएं ऊर्ध्वाधर शाफ्ट-आधारित DRI उत्पादन में प्राकृतिक गैस के आंशिक प्रतिस्थापन पर केंद्रित हैं। 3) समर्थित परियोजनाओं में कोयला और कोक खपत घटाने के लिए मौजूदा ब्लास्ट फर्नेस में हाइड्रोजन इंजेक्शन भी शामिल है। 4) इस्पात मंत्रालय का पृष्ठ सौर और पवन ऊर्जा को हरित हाइड्रोजन उत्पादन से संबंधित मानता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1 गलत है: पृष्ठ कहता है कि यह तकनीक अभी देश में वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य नहीं है। कथन 2, 3 और 4 सही हैं: समर्थित मार्गों में शाफ्ट DRI और ब्लास्ट फर्नेस में हाइड्रोजन उपयोग शामिल है, और नवीकरणीय ऊर्जा को हरित हाइड्रोजन उत्पादन से जोड़ा गया है।
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और प्रश्न
6इस्पात निर्माण मार्गों और उत्सर्जन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस्पात क्षेत्र वैश्विक मानव-जनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 7 से 8 प्रतिशत योगदान देता है। 2. अयस्क-आधारित इस्पात निर्माण में सामान्यतः कोयले वाले ब्लास्ट फर्नेस या प्राकृतिक गैस द्वारा प्रत्यक्ष अपचयन का उपयोग होता है। 3. स्क्रैप-आधारित इस्पात निर्माण मुख्यतः लौह अयस्क और कोक से भरे ब्लास्ट फर्नेस का उपयोग करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
7ईज़ीमेल्ट तकनीक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अपचायक के रूप में धातुकर्मीय कोक के बड़े हिस्से की जगह सिनगैस का उपयोग करती है। 2. इसकी जमशेदपुर परियोजना का लक्ष्य मूल ब्लास्ट फर्नेस संचालन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 10 प्रतिशत से कम कमी है। 3. इसकी औद्योगिक स्तर पर पहली तैनाती झारखंड के जमशेदपुर वर्क्स में टाटा स्टील की ई ब्लास्ट फर्नेस पर नियोजित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
8जमशेदपुर में ईज़ीमेल्ट तकनीक लागू किए जाने के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. टाटा स्टील द्वारा उल्लिखित ई ब्लास्ट फर्नेस की क्षमता 649 घन मीटर है। 2. इस तैनाती को विश्व में ईज़ीमेल्ट तकनीक के पहले कार्यान्वयन के रूप में बताया गया है। 3. टाटा स्टील की विज्ञप्ति कहती है कि परियोजना जमशेदपुर से बाहर एक नए ग्रीनफील्ड इस्पात संयंत्र में लागू होगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
9ईज़ीमेल्ट तकनीक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अपचायक के रूप में धातुकर्मीय कोक के बड़े हिस्से की जगह सिनगैस का उपयोग करती है। 2. परियोजना का लक्ष्य आधारभूत ब्लास्ट फर्नेस संचालन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में दस प्रतिशत से कम कमी है। 3. इसकी पहली औद्योगिक-स्तरीय तैनाती झारखंड के जमशेदपुर वर्क्स में टाटा स्टील की ई ब्लास्ट फर्नेस पर नियोजित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
10टाटा स्टील जमशेदपुर में ईज़ीमेल्ट तकनीक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अपचायक के रूप में धातुकर्मीय कोक के बड़े हिस्से की जगह सिनगैस का उपयोग करती है। 2. परियोजना का लक्ष्य आधारभूत ब्लास्ट फर्नेस संचालन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड में दस प्रतिशत से कम कमी है। 3. पहली औद्योगिक-स्तरीय तैनाती झारखंड के जमशेदपुर वर्क्स में टाटा स्टील की ई ब्लास्ट फर्नेस पर नियोजित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
11स्क्रैप-आधारित इस्पात-निर्माण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्क्रैप-आधारित उत्पादन में लौह अयस्क से इस्पात बनाने की तुलना में काफी कम ऊर्जा लगती है। 2. स्क्रैप-आधारित उत्पादन में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के लिए बिजली की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। 3. स्क्रैप संग्रह दर वर्तमान में लगभग पचासी प्रतिशत है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
12स्क्रैप-आधारित इस्पात निर्माण और डीकार्बनीकरण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. IEA के अनुसार स्क्रैप से इस्पात उत्पादन में लौह अयस्क से बने इस्पात की तुलना में लगभग एक-आठवीं ऊर्जा लगती है। 2. IEA कहता है कि स्क्रैप-आधारित उत्पादन ब्लास्ट फर्नेस या डायरेक्ट रिडक्शन से लौह अयस्क आधारित उत्पादन की तुलना में काफी कम ऊर्जा-सघन है। 3. स्क्रैप-आधारित मार्ग की मुख्य बाधा स्क्रैप की उपलब्धता और गुणवत्ता है। 4. IEA कहता है कि स्क्रैप-आधारित उत्पादन से उत्सर्जन-कमी का कोई लाभ नहीं होता जब तक मोल्टन ऑक्साइड इलेक्ट्रोलिसिस भी न हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
13ईज़ीमेल्ट की तकनीकी लचीलापन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ईज़ीमेल्ट प्राकृतिक गैस, कोक-ओवन गैस, हाइड्रोजन, अमोनिया और बिजली का उपयोग कर सकती है। 2. ईज़ीमेल्ट पारंपरिक सिंटर फीड का उपयोग अब भी कर सकती है। 3. SMS ग्रुप कहता है कि ईज़ीमेल्ट डायरेक्ट-रिडक्शन संयंत्रों के लिए आवश्यक महंगे और दुर्लभ उच्च-ग्रेड लौह अयस्क पर निर्भरता से बचाती है। 4. ईज़ीमेल्ट को ऐसी तकनीक बताया गया है, जिसके लिए केवल उच्च-ग्रेड लौह अयस्क चाहिए और जो इसलिए सिंटर फीड के साथ संगत नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
14भारत की ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह ग्रीन स्टील को ऐसे इस्पात के रूप में परिभाषित करती है जिसकी कार्बन डाइऑक्साइड-समतुल्य उत्सर्जन तीव्रता तैयार इस्पात के प्रति टन 2.2 टन से कम हो। 2. पांच-स्टार ग्रीन-रेटेड स्टील की उत्सर्जन तीव्रता तैयार इस्पात के प्रति टन 1.6 टन कार्बन डाइऑक्साइड-समतुल्य से कम होती है। 3. तैयार इस्पात के प्रति टन 2.2 टन कार्बन डाइऑक्साइड-समतुल्य से अधिक उत्सर्जन तीव्रता वाला इस्पात भी तीन-स्टार ग्रीन रेटिंग के लिए पात्र है। 4. रेटिंग सीमाओं की समीक्षा हर 3 वर्ष में की जानी है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
15भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 जनवरी 2023 को मंजूरी दी। 2. मिशन का परिव्यय 19,744 करोड़ रुपये है। 3. मिशन की पायलट परियोजनाएं केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित हैं और इस्पात को बाहर रखती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
