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RAS प्रश्न

21 अप्रैल 2026 को टाटा स्टील ने ईजीमेल्ट ब्लास्ट-फर्नेस डीकार्बनीकरण समझौते की घोषणा की। इसके संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1) पहली तैनाती झारखंड के जमशेदपुर वर्क्स में टाटा स्टील की 'ई' ब्लास्ट फर्नेस पर होगी। 2) यह समझौता लक्ज़मबर्ग की कंपनी पॉल वुर्थ एस.ए. के साथ हुआ, जो एसएमएस ग्रुप जीएमबीएच का हिस्सा है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

सही उत्तर: (A) 1 और 2 दोनों।

ईजीमेल्ट तकनीक की पहली औद्योगिक तैनाती झारखंड के जमशेदपुर वर्क्स की 649 घन मीटर वाली टाटा स्टील की 'ई' ब्लास्ट फर्नेस पर होगी और इसके लिए पॉल वुर्थ, एस.ए. के साथ समझौता हुआ है, जो एसएमएस ग्रुप जीएमबीएच का हिस्सा है।

  1. (A)

    1 और 2 दोनों

  2. (B)

    केवल 1

  3. (C)

    केवल 2

  4. (D)

    न तो 1 और न ही 2

व्याख्या

दोनों कथन सही हैं, क्योंकि टाटा स्टील की 21 अप्रैल 2026 की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में साफ कहा गया है कि कंपनी ने ईजीमेल्ट तकनीक के कार्यान्वयन के लिए लक्ज़मबर्ग की पॉल वुर्थ, एस.ए. के साथ अंतिम समझौते किए हैं, और यह कंपनी एसएमएस ग्रुप जीएमबीएच का हिस्सा है। इसी विज्ञप्ति के अनुसार विश्व में औद्योगिक स्तर पर ईजीमेल्ट की पहली तैनाती टाटा स्टील के जमशेदपुर वर्क्स की 'ई' ब्लास्ट फर्नेस, जिसकी क्षमता 649 घन मीटर है, पर चरणबद्ध ढंग से की जाएगी। परियोजना का घोषित लक्ष्य ब्लास्ट फर्नेस के आधारभूत संचालन की तुलना में CO2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत से अधिक कमी लाना है। इसलिए कथन 1 और 2 दोनों स्रोत से समर्थित हैं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) यह विकल्प कथन 1 को तो सही मानता है, लेकिन कथन 2 को छोड़ देता है, जबकि आधिकारिक विज्ञप्ति पॉल वुर्थ, एस.ए. और उसके एसएमएस ग्रुप जीएमबीएच से संबंध दोनों की पुष्टि करती है।
  • (C) यह विकल्प कथन 2 को तो सही मानता है, लेकिन कथन 1 को नकारता है, जबकि स्रोत में पहली औद्योगिक तैनाती जमशेदपुर वर्क्स की 'ई' ब्लास्ट फर्नेस पर बताई गई है।
  • (D) यह विकल्प दोनों कथनों को गलत मानता है, जबकि प्रेस विज्ञप्ति में समझौते की कंपनी और पहली तैनाती का स्थान, दोनों स्पष्ट रूप से दिए गए हैं।

अवधारणा

यह प्रश्न विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में औद्योगिक डीकार्बनीकरण और स्वच्छ इस्पात निर्माण से जुड़ी चालू घटना की जांच करता है। RAS में ऐसी तकनीकें इसलिए बार-बार पूछी जाती हैं क्योंकि वे उद्योग, पर्यावरण और भारत की नेट-जीरो दिशा को एक साथ जोड़ती हैं।

स्रोत

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