RAS प्रश्न
गीगर-मूलर काउंटर किसका पता लगाने में प्रयोग होता है?
सही उत्तर: (B) आयनकारी विकिरण।
गीगर-मूलर काउंटर आयनकारी विकिरण, जैसे अल्फा, बीटा और गामा किरणों, का पता लगाने के लिए प्रयोग होता है।
व्याख्या
गीगर-मूलर काउंटर विकिरण पहचान और मापन का उपकरण है। इसमें गैस-भरी ट्यूब और इलेक्ट्रोड होते हैं; इनके बीच विद्युत विभव रहता है, लेकिन सामान्य स्थिति में धारा नहीं बहती। जब आयनकारी विकिरण इस ट्यूब से गुजरता है, तो गैस में आयन बनते हैं और थोड़ी देर के लिए तीव्र धारा-पल्स बनती है। इन्हीं पल्सों को मापा या गिना जाता है, इसलिए उपकरण विकिरण की उपस्थिति बताता है। प्रति सेकंड पल्सों की संख्या विकिरण क्षेत्र की तीव्रता मापने में काम आती है। इसी कारण अल्फा, बीटा और गामा जैसे आयनकारी विकिरण के लिए गीगर-मूलर काउंटर सही उपकरण है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) ध्वनि तरंगें आयनकारी विकिरण नहीं हैं; उन्हें पहचानने के लिए माइक्रोफोन जैसे ध्वनि-संवेदी उपकरण प्रयुक्त होते हैं, गैस-भरी विकिरण ट्यूब नहीं।
- (C) चुंबकीय क्षेत्र का पता मैग्नेटोमीटर से लगाया जाता है; गीगर-मूलर काउंटर चुंबकत्व नहीं, विकिरण से बनी धारा-पल्स गिनता है।
- (D) भूकंप धरती के कंपन से जुड़े होते हैं और सिस्मोग्राफ से दर्ज किए जाते हैं; गीगर-मूलर काउंटर का काम आयनकारी विकिरण पहचानना है।
अवधारणा
यह प्रश्न विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकिरण और मापन-उपकरणों की मूल समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि उपकरण का सिद्धांत और उसका सही उपयोग सीधे विकल्प-आधारित तथ्यों से जुड़ता है।
