RAS प्रश्न
टाटा स्टील जमशेदपुर में लगाई जा रही ईज़ीमेल्ट तकनीक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1) ईज़ीमेल्ट लोहा बनाने में अपचायक के रूप में धातुकर्मीय कोक के बड़े हिस्से की जगह सिनगैस का उपयोग करती है। 2) इस परियोजना से सामान्य ब्लास्ट फर्नेस संचालन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में दस प्रतिशत से कम कमी होने की अपेक्षा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा कथन अथवा कौन-से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (B) केवल 1।
टाटा स्टील जमशेदपुर में लगाई जा रही ईज़ीमेल्ट तकनीक लोहा बनाने में धातुकर्मीय कोक के बड़े हिस्से की जगह सिनगैस को अपचायक के रूप में इस्तेमाल करती है और इसका लक्ष्य CO2 उत्सर्जन में 50% से अधिक कमी है।
व्याख्या
कथन 1 सही है, क्योंकि ईज़ीमेल्ट में लोहा बनाने की प्रक्रिया में अपचायक के रूप में धातुकर्मीय कोक के महत्वपूर्ण हिस्से को सिनगैस से बदला जाता है। यह सिनगैस टॉप-गैस पुनर्चक्रण और कोक-ओवन गैस की रिफॉर्मिंग से बनती है। ETInfra के अनुसार टाटा स्टील ने जमशेदपुर संयंत्र में EASyMelt तकनीक लगाने के लिए SMS Group से समझौता किया है और यह तकनीक लोहा बनाने की प्रक्रिया में उत्सर्जन घटाने के लिए है। कथन 2 गलत है, क्योंकि परियोजना से वर्तमान या आधार संचालन की तुलना में CO2 उत्सर्जन में 50% से अधिक कमी बताई गई है; इसलिए “10% से कम” वाला दावा उलटा है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A गलत है, क्योंकि इसमें कथन 2 को भी सही मान लिया गया है, जबकि परियोजना का लक्ष्य CO2 उत्सर्जन में 10% से कम नहीं बल्कि 50% से अधिक कमी है।
- (C) C गलत है, क्योंकि कथन 2 गलत है और कथन 1 सही है; ईज़ीमेल्ट अपचायक के रूप में धातुकर्मीय कोक के बड़े हिस्से की जगह सिनगैस का उपयोग करती है।
- (D) D गलत है, क्योंकि कथन 1 को नकारना सही नहीं है; ईज़ीमेल्ट में सिनगैस द्वारा धातुकर्मीय कोक के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिस्थापन स्पष्ट है।
अवधारणा
यह प्रश्न विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा इस्पात निर्माण की नई तकनीक की समझ जाँचता है। RAS में ऐसी तकनीकें बार-बार पूछी जाती हैं क्योंकि वे ऊर्जा, उद्योग और जलवायु-नीति के संगम पर आती हैं।
