MCQ
सूचना का अधिकार अधिनियम MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम के 5 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1राज्य सूचना आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट किसे प्रस्तुत करता है?
सूचना का अधिकार व्यवस्था में राज्य सूचना आयोग अपने कामकाज और कानून के क्रियान्वयन पर वार्षिक रिपोर्ट तैयार करके राज्य सरकार को भेजता है। इसके बाद राज्य सरकार उस रिपोर्ट को राज्य विधानमंडल के सामने रखवाती है। राज्यपाल इस रिपोर्ट के सीधे वैधानिक प्राप्तकर्ता नहीं हैं। राज्य का उच्च न्यायालय भी इस प्रशासनिक प्रक्रिया में रिपोर्ट प्राप्त करने वाला निकाय नहीं है। विधानमंडल के सामने रिपोर्ट बाद में रखी जाती है, पर आयोग रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करता है।
प्र.2निम्नलिखित कथनों को पढ़ें: (1) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। (2) अरुणा रॉय ने उस आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसने सूचना का अधिकार अधिनियम के लागू होने का रास्ता तैयार किया। सही उत्तर चुनें।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 लोक प्राधिकारियों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लाया गया था, इसलिए पहला कथन सही है। अरुणा रॉय ने राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़े सूचना के अधिकार आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, जिससे इस कानून के लिए जनदबाव बना; इसलिए दूसरा कथन भी सही है। केवल एक कथन को सही मानने वाले उत्तर दूसरे सही कथन को छोड़ देते हैं। दोनों को गलत मानना अधिनियम के उद्देश्य और आंदोलन के इतिहास, दोनों से मेल नहीं खाता।
प्र.3सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर राजस्थान राज्य सूचना आयोग अधिकतम कितनी राशि का जुर्माना लगा सकता है?
सूचना का अधिकार व्यवस्था में सूचना देने में देरी या सूचना न देने पर सूचना आयोग प्रतिदिन ₹250 के हिसाब से जुर्माना लगा सकता है, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा ₹25000 है। इसलिए प्रश्न में पूछा गया अधिकतम जुर्माना ₹25000 ही है। ₹15000 और ₹20000 कम राशि हैं, वे कानूनी अधिकतम सीमा नहीं बतातीं। ₹30000 निर्धारित सीमा से अधिक है, इसलिए राजस्थान राज्य सूचना आयोग इस आधार पर अधिकतम जुर्माने के रूप में इतनी राशि नहीं लगा सकता।
प्र.4नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण घोषित करने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायालय ने माना कि किसी निकाय के 'लोक प्राधिकरण' होने का निर्धारण करने के लिए स्वामित्व और वित्तपोषण ही एकमात्र कसौटी हैं। 2. न्यायालय ने माना कि केंद्र सरकार और SEBI NSE पर गहरा एवं व्यापक नियंत्रण रखते हैं, जिससे यह RTI अधिनियम की धारा 2(h) के अंतर्गत आ जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
कथन 1 गलत है: न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्वामित्व और वित्तपोषण ही लोक प्राधिकरण की एकमात्र कसौटी नहीं हैं, और इसके लिए K.C. Sharma बनाम दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज मामले का आधार लिया। कथन 2 सही है: खंडपीठ ने NSE को RTI अधिनियम की धारा 2(h) के तहत इसलिए लोक प्राधिकरण घोषित किया क्योंकि केंद्र सरकार और वैधानिक प्राधिकरण SEBI इस पर गहरा एवं व्यापक नियंत्रण रखते हैं — उदाहरणस्वरूप, NSE प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 के तहत SEBI की मान्यता के बिना कार्य नहीं कर सकता। अतः केवल कथन 2 सही है।
प्र.5जन-आधारित संगठन एमकेएसएस ने अकाल राहत कार्यों के रिकॉर्ड और मजदूरों के हिसाब माँगने की पहल की। यह माँग सबसे पहले किस राज्य में उठाई गई थी?
मजदूर किसान शक्ति संगठन ने सार्वजनिक रिकॉर्ड देखने की माँग राजस्थान में उठाई, खासकर अकाल राहत कार्यों के रिकॉर्ड, मस्टर रोल और मजदूरों के भुगतान के हिसाब को लेकर। यही पहल आगे चलकर भारत में सूचना के अधिकार आंदोलन की बड़ी आधारभूमि बनी। बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में भी सामाजिक आंदोलनों का इतिहास है, लेकिन राहत कार्यों के रिकॉर्ड माँगने की एमकेएसएस-नेतृत्व वाली खास पहल राजस्थान से जुड़ी है। इसलिए प्रश्न पारदर्शिता और सूचना के अधिकार आंदोलन की राजस्थानी जड़ों की ओर संकेत करता है।
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