MCQ
पारिवारिक कानून MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए पारिवारिक कानून के 96 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राहतों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. घरेलू संबंध में प्रत्येक महिला को साझे गृह में रहने का अधिकार है, चाहे उसमें उसका कोई अधिकार, स्वत्व या हित हो या न हो। 2. मौद्रिक राहत में पीड़ित महिला और उसके बच्चों के लिए भरण-पोषण शामिल हो सकता है। 3. इस अधिनियम के अंतर्गत मजिस्ट्रेट बच्चों की अस्थायी अभिरक्षा नहीं दे सकता। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1 और 2 सही हैं। अधिनियम साझे गृह में निवास का अधिकार सुरक्षित करता है और मौद्रिक राहत में भरण-पोषण शामिल कर सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि धारा 21 मजिस्ट्रेट को बच्चों की अस्थायी अभिरक्षा देने की अनुमति देती है।
प्र.2हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अधीन विवाह की शर्तों और संस्कारों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यदि विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवित जीवनसाथी है, तो हिंदू विवाह संपन्न नहीं किया जा सकता। 2. अधिनियम विवाह के समय वर के लिए 18 वर्ष और वधू के लिए 21 वर्ष निर्धारित करता है। 3. निषिद्ध संबंध की डिग्री में आने वाला विवाह फिर भी संपन्न हो सकता है, यदि दोनों पक्षों को नियंत्रित करने वाली प्रथा या रूढ़ि इसकी अनुमति देती हो। 4. जहां सप्तपदी संस्कार का भाग है, वहां विवाह पहला कदम लेते ही पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1 सही है, क्योंकि धारा 5 जीवित जीवनसाथी होने पर विवाह को रोकती है। कथन 2 गलत है: आयु वर के लिए 21 वर्ष और वधू के लिए 18 वर्ष है, उलट नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि निषिद्ध संबंध में आने वाले दो लोगों के बीच भी विवाह तब हो सकता है जब उन पर लागू कोई प्रथा या रूढ़ि इसकी इजाज़त देती हो। कथन 4 गलत है: सप्तपदी में विवाह सातवां कदम लेने पर पूर्ण होता है, पहला कदम लेने पर नहीं।
प्र.32005 संशोधन के बाद हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 6 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मिताक्षरा संयुक्त हिन्दू परिवार में सहदायिक की पुत्री जन्म से ही अपने अधिकार में सहदायिक बनती है। 2. पुत्री को सहदायिक संपत्ति में वही अधिकार हैं जो पुत्र होने पर उसे मिलते। 3. सहदायिक संपत्ति के संबंध में पुत्री पर पुत्र जैसी ही देयताएँ लागू होती हैं। 4. 2005 संशोधन 20 दिसंबर 2004 से पहले हुए हर विभाजन या वसीयती निपटान को अमान्य कर देता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1, 2 और 3 सही हैं: संशोधित धारा 6 पुत्रियों को जन्म से सहदायिक दर्जा, समान अधिकार और संबंधित देयताएँ देती है। कथन 4 गलत है, क्योंकि उपबंध 20 दिसंबर 2004 से पहले हुए निपटान, अंतरण, विभाजन और वसीयती निपटान को सुरक्षित रखता है।
प्र.4विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अधीन लिखित सूचना और आपत्ति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पक्षकारों को निर्धारित प्रपत्र में इच्छित विवाह की लिखित सूचना देनी होती है। 2. विशेष विवाह पर आपत्ति केवल इस आधार पर की जा सकती है कि वह धारा 4 में निर्दिष्ट एक या अधिक शर्तों का उल्लंघन करेगा। 3. यदि दोनों पक्ष विवाह अधिकारी के सामने मौखिक सहमति दे दें, तो अधिनियम लिखित सूचना से छूट देता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1 और 2 सही हैं: धारा 5 में लिखित सूचना जरूरी है और धारा 7 के तहत आपत्ति धारा 4 की शर्तों के उल्लंघन तक सीमित रहती है। कथन 3 गलत है, क्योंकि उद्धृत प्रावधान लिखित सूचना को अनिवार्य करता है।
प्र.5हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिंदू विवाह तभी संपन्न हो सकता है जब विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवनसाथी जीवित न हो। 2. अधिनियम में न्यूनतम आयु वर के लिए 18 वर्ष और वधू के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। 3. प्रतिषिद्ध संबंध की डिग्री में आने वाले पक्ष विवाह कर सकते हैं, यदि उन दोनों पर लागू प्रथा या रूढ़ि ऐसा विवाह अनुमत करती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1 सही है, क्योंकि धारा 5 में विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवनसाथी जीवित न होने की शर्त है। कथन 2 गलत है: अधिनियम में वर के लिए 21 वर्ष और वधू के लिए 18 वर्ष है, इसका उलटा नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि निषिद्ध नातेदारी के संबंधों पर लगी रोक ऐसी प्रथा या रूढ़ि के अधीन है जो विवाह की अनुमति देती हो।
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और प्रश्न
6बाल-विवाह और दहेज अपराधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 18 वर्ष से अधिक आयु का वयस्क पुरुष यदि बाल-विवाह करता है तो उसे 2 वर्ष तक के कठोर कारावास या 1 लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है। 2. ले जाए जाने, बहकाए जाने, बल, छल, बिक्री, तस्करी या अनैतिक प्रयोजन से जुड़े कुछ गंभीर बाल-विवाह शून्य होते हैं। 3. दहेज मांगना, वैधानिक अपवाद के अधीन, कम-से-कम 6 महीने और अधिकतम 2 वर्ष के कारावास तथा 10 हजार रुपये तक के जुर्माने से दंडनीय है। 4. यदि विवाह से पहले दहेज महिला के अलावा किसी और को मिला हो, तो उसे विवाह के बाद 6 महीनों के भीतर महिला को हस्तांतरित करना होता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
7हिन्दू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अधीन दत्तक ग्रहण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वैध दत्तक ग्रहण के लिए दत्तक लेने वाले की क्षमता, दत्तक देने वाले की क्षमता, दत्तक लिए जाने वाले की योग्यता और अन्य वैधानिक शर्तों का पालन आवश्यक है। 2. जीवित पत्नी वाला पुरुष हिन्दू, वैधानिक अपवाद लागू न हो तो, पत्नी की सहमति के बिना दत्तक ग्रहण नहीं कर सकता। 3. दत्तक ग्रहण के बाद जन्म-परिवार से बच्चे के सभी संबंध हर प्रयोजन के लिए यथावत बने रहते हैं। 4. वैध रूप से किया गया दत्तक ग्रहण दत्तक माता-पिता द्वारा रद्द नहीं किया जा सकता और दत्तक संतान भी अपना दर्जा छोड़कर जन्म-परिवार में वापस नहीं जा सकती। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
8विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अंतर्गत आपत्ति-प्रक्रिया के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूचना के प्रकाशन से 30 दिन बीतने के बाद विवाह संपन्न हो सकता है, यदि पहले आपत्ति न की गई हो। 2. आपत्ति प्राप्त होने पर विवाह अधिकारी जांच और निर्णय के लिए 60 दिन तक ले सकता है। 3. यदि विवाह अधिकारी आपत्ति स्वीकार कर विवाह संपन्न करने से इंकार करता है, तो कोई भी पक्ष इंकार की तारीख से 30 दिन के भीतर जिला न्यायालय में अपील कर सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
9हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अधीन दत्तक ग्रहण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दत्तक ग्रहण अध्याय के प्रावधानों के उल्लंघन में किया गया दत्तक ग्रहण शून्य है। 2. दत्तक बालक या बालिका दत्तक की तारीख से सभी प्रयोजनों के लिए दत्तक पिता या माता की संतान मानी जाती है। 3. 15 वर्ष पूरे कर चुके व्यक्ति को तब तक दत्तक नहीं लिया जा सकता जब तक पक्षकारों पर लागू प्रथा या रूढ़ि इसकी अनुमति न दे। 4. दत्तक ग्रहण की वैधता के लिए दत्तहोम का किया जाना अनिवार्य है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
10हिंदू अल्पवयस्कता और संरक्षकता अधिनियम, 1956 के अधीन प्राकृतिक संरक्षकता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिंदू अल्पवयस्क बालक या अविवाहित बालिका के लिए माता को पिता से पहले प्राकृतिक संरक्षक माना गया है। 2. जिसने 5 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है, ऐसे अल्पवयस्क की अभिरक्षा सामान्यतः माता के पास रहेगी। 3. वास्तविक संरक्षक केवल इस आधार पर कि वह वास्तविक संरक्षक है, हिंदू अल्पवयस्क की संपत्ति का निपटान कर सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
11विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अधीन सूचना और आपत्ति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यदि किसी भी पक्ष का जीवित पति या पत्नी हो, तब भी विशेष विवाह संपन्न किया जा सकता है। 2. सूचना देने से ठीक पहले कम-से-कम एक पक्ष ने विवाह अधिकारी के जिले में न्यूनतम 30 दिन निवास किया होना चाहिए। 3. सूचना के प्रकाशन से 30 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद कोई भी व्यक्ति विवाह पर आपत्ति कर सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
12मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के अधीन अधिकारों और प्रक्रिया के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जिस विवाहित मुस्लिम महिला को तलाक दिया गया है, वह अपने और आश्रित बच्चों के लिए मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित निर्वाह-भत्ते की अधिकारी है। 2. तलाक दिए जाने की स्थिति में नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित की जानी है। 3. अपराध किसी भी व्यक्ति की सूचना पर संज्ञेय है, चाहे वह विवाहित मुस्लिम महिला से संबंधित हो या न हो। 4. अपराध विवाहित मुस्लिम महिला के कहने पर मजिस्ट्रेट की अनुमति से शमनीय है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
13हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अधीन वैध दत्तक ग्रहण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वैध दत्तक ग्रहण के लिए दत्तक लेने वाले व्यक्ति में क्षमता और दत्तक लेने का अधिकार होना चाहिए। 2. यदि दत्तक लिया जाने वाला व्यक्ति दत्तक लिए जाने में सक्षम न हो, तब भी दत्तक ग्रहण वैध रहता है। 3. वैध दत्तक ग्रहण में दत्तक अध्याय में उल्लिखित अन्य शर्तों का पालन आवश्यक होता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
14मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अधिनियम में जिस तलाक की बात है, उसमें इलेक्ट्रॉनिक रूप से दिया गया तलाक भी शामिल है। 2. अधिनियम केवल लिखित रूप में दिए गए तलाक को शून्य और अवैध घोषित करता है। 3. धारा 3 में निर्दिष्ट तलाक देने वाले मुस्लिम पति को 3 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। 4. जिस विवाहित मुस्लिम महिला को तलाक दिया गया है, उसे सुने बिना जमानत दी जा सकती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
15परिवार न्यायालय की कार्यवाहियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. परिवार न्यायालय के समक्ष किसी पक्ष को विधि व्यवसायी द्वारा प्रतिनिधित्व का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं है। 2. परिवार न्यायालय ऐसे साक्ष्य को स्वीकार कर सकता है जो विवाद के प्रभावी निपटारे में सहायक हो, भले ही वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अंतर्गत अन्यथा अप्रासंगिक या अग्राह्य हो। 3. परिवार न्यायालय के वादों में गवाहों के साक्ष्य को विस्तार से दर्ज करना आवश्यक है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
