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साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 के 93 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1धारा 112 के संदर्भ में 'निश्चायक प्रमाण' के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. धारा 4 के अनुसार, जब एक तथ्य दूसरे का निश्चायक प्रमाण घोषित हो, तो न्यायालय उसे असिद्ध करने के लिए साक्ष्य की अनुमति नहीं देगा। 2. 'निश्चायक प्रमाण' का अर्थ 'अनुमान कर सकेगा' के समान है। 3. धारा 112 वैधता के लिए 'निश्चायक प्रमाण' पद का स्पष्ट प्रयोग करती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

A केवल 1 और 2
B केवल 2 और 3
C केवल 1 और 3
D 1, 2 और 3
व्याख्या

कथन 1 सही है: धारा 4 निश्चायक प्रमाण घोषित तथ्य को असिद्ध करने के लिए साक्ष्य की अनुमति नहीं देती। कथन 2 गलत है, क्योंकि 'अनुमान कर सकेगा' अलग परिभाषित है और न्यायालय को विकल्प देता है। कथन 3 सही है, क्योंकि धारा 112 शीर्षक और मुख्य पाठ में 'निश्चायक प्रमाण' का प्रयोग करती है।

प्र.2भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 और साक्ष्य अधिनियम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 अपनी धारा 2 में निश्चायक प्रमाण को परिभाषित करता है। 2. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में विवाह के दौरान जन्म से संबंधित समान उपबंध धारा 116 है। 3. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को बिना निरस्त किए यथावत रखा। 4. प्रारंभ से ठीक पहले लंबित कार्यवाहियां इस प्रकार सुरक्षित हैं कि वे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अधीन उसी तरह निपटेंगी मानो नया अधिनियम लागू न हुआ हो। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

A केवल 1 और 2
B केवल 1 और 4
C केवल 2 और 4
D केवल 1, 2 और 4
व्याख्या

कथन 1 सही है: धारा 2 निश्चायक प्रमाण को परिभाषित करती है। कथन 2 सही है: 2023 अधिनियम की धारा 116 विवाह के दौरान जन्म का नियम बताती है। कथन 3 गलत है क्योंकि धारा 170 भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्पष्ट निरसन करती है। कथन 4 सही है क्योंकि निरसन और बचत उपबंध लंबित मामलों को पुराने अधिनियम के अधीन सुरक्षित रखता है।

प्र.3धारा 112 के पाठ और स्थान के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. धारा 112 का शीर्षक 'विवाह के दौरान जन्म, वैधता का निश्चायक प्रमाण' है। 2. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113 क्षेत्र-समर्पण के प्रमाण से संबंधित है। 3. धारा 112 स्वयं दहेज मृत्यु के अनुमानों से संबंधित है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

A केवल 2 और 3
B केवल 1 और 3
C 1, 2 और 3
D केवल 1 और 2
व्याख्या

कथन 1 सही है, क्योंकि यह धारा 112 का शीर्षक है। कथन 2 सही है, क्योंकि अगली धारा 113 क्षेत्र-समर्पण के प्रमाण से संबंधित है। कथन 3 गलत है: दहेज मृत्यु का अनुमान धारा 113बी में है, धारा 112 में नहीं।

प्र.4भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के समतुल्य प्रावधान के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में समतुल्य प्रावधान धारा 116 है। 2. धारा 116 में पुराने अधिनियम के 'वैध पुत्र' के स्थान पर 'वैध संतान' की भाषा है। 3. धारा 116 विवाह-विच्छेद के बाद 280 दिनों का नियम पूरी तरह हटा देती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

A केवल 2 और 3
B केवल 1 और 3
C 1, 2 और 3
D केवल 1 और 2
व्याख्या

कथन 1 सही है: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में यह प्रावधान धारा 116 है। कथन 2 सही है, क्योंकि इसमें 'वैध संतान' कहा गया है। कथन 3 गलत है, क्योंकि धारा 116 में 280 दिनों का नियम बना रहता है।

प्र.5धारा 112 के संदर्भ में गौतम कुंडू बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायालय रक्त-परीक्षण का आदेश नियमित ढंग से नहीं दे सकते। 2. केवल इधर-उधर खोज करने के लिए रक्त-परीक्षण के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए। 3. निर्णय ने कहा कि प्रत्येक भरण-पोषण कार्यवाही अनिवार्य DNA परीक्षण से ही शुरू होनी चाहिए। 4. आवेदक को धारा 112 की उपधारणा हटाने के लिए पहुंच न होने का मजबूत प्रथमदृष्टया मामला बनाना होगा। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

A केवल 1 और 2
B केवल 2 और 3
C केवल 1, 2 और 4
D सभी चार
व्याख्या

कथन 1, 2 और 4 गौतम कुंडू मामले के अनुसार सही हैं: रक्त-परीक्षण का आदेश नियमित रूप से नहीं दिया जाता, अटकलों के आधार पर दी गई अर्ज़ियाँ स्वीकार नहीं होतीं, और पहुँच न होने का मज़बूत प्रथमदृष्टया आधार होना ज़रूरी है। कथन 3 इसी सावधानीपूर्ण नियम के उलट कहता है।

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और प्रश्न

6साक्ष्य के परीक्षा-प्रासंगिक नियम के रूप में धारा 112 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्य उपधारणा वैध विवाह के दौरान या वैधानिक विवाह-विच्छेदोत्तर अवधि में जन्मे बच्चे से जुड़ती है। 2. पाठ में निश्चायक प्रमाण हटाने का एकमात्र वैधानिक रास्ता संभावित गर्भाधान-काल में पहुंच न होने का प्रमाण है। 3. कानून स्वयं कहता है कि DNA साक्ष्य हमेशा बिना न्यायिक संतुलन के वैधता पर प्रबल होगा। 4. कानून विवाह-विच्छेदोत्तर अवधि 280 दिन रखता है, 6 महीने नहीं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1 और 3
Bकेवल 2 और 4
Cकेवल 1, 2 और 3
Dकेवल 1, 2 और 4

7धारा 112 के अंतर्गत DNA साक्ष्य के न्यायिक विकास के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नंदलाल वासुदेव बडवाइक में न्यायालय ने कहा कि उचित स्थिति में वैज्ञानिक प्रमाण कानूनी अनुमान से अधिक प्रभावी हो सकता है। 2. दीपान्विता रॉय में न्यायालय ने कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर DNA परीक्षण की अनुमति हो सकती है। 3. अपर्णा अजिंक्य फिरोदिया में न्यायालय ने कहा कि पहुंच न होने के प्रमाण के बिना मात्र DNA रिपोर्ट अनुमान का खंडन नहीं कर सकती। 4. 2026 के निखत परवीन निर्णय ने कहा कि भारतीय न्यायालयों को न्यायालय-निर्देशित DNA रिपोर्टों को हमेशा अनदेखा करना चाहिए। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

A1 और 2 केवल
B2, 3 और 4 केवल
C1, 2 और 3 केवल
D1, 3 और 4 केवल

8RAS प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य-क्षेत्र में धारा 112 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वैधानिक पाठ में मुख्य संख्या विवाह-विच्छेद के बाद 280 दिन है। 2. वैधानिक पाठ में मुख्य अपवाद उस समय पक्षकारों के बीच पहुंच न होना है जब बच्चा गर्भ में आ सकता था। 3. यह प्रावधान भारतीय दंड संहिता में है, भारतीय साक्ष्य अधिनियम में नहीं। 4. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 विवाह के दौरान जन्म के लिए वैधता का अनुमान बनाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 1, 2 और 3
Cकेवल 3 और 4
D1, 2, 3 और 4

9धारा 112 में निहित वैधानिक शर्तों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विवाह-विच्छेद के बाद 280 दिन वाले भाग के लागू होने के लिए माता का अविवाहित रहना आवश्यक है। 2. उस भाग के लागू होने के लिए बच्चे का जन्म विवाह-विच्छेद के बाद 280 दिनों के भीतर होना चाहिए। 3. कानून पूरे विवाह-काल में पहुंच न होने का प्रमाण मांगता है, भले ही संभव गर्भाधान-काल सीमित हो। 4. यह प्रावधान केवल आपराधिक अभियोजन तक सीमित है और दीवानी पारिवारिक विवादों पर प्रभाव नहीं डालता। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 3 और 4
Cकेवल 1 और 4
Dकेवल 1 और 2

10धारा 112 की धारणा और DNA साक्ष्य के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उच्चतम न्यायालय ने धारा 112 को वैधता के निश्चायक सबूत की धारणा बनाने वाला प्रावधान बताया है। 2. 2023 के निर्णय में न्यायालय ने कहा कि यदि पहुंच न होने का अभिवचन नहीं है, तो DNA परीक्षण का निर्देश नहीं दिया जा सकता। 3. 2023 के निर्णय ने कहा कि पितृत्व निर्धारित करने के लिए DNA परीक्षणों को खोजी प्रयोगों की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1 और 3
Bकेवल 2
C1, 2 और 3
Dकेवल 1 और 2

11धारा 112 के अधीन भार और प्रमाण की प्रकृति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वैध विवाह के दौरान बच्चे के जन्म के बाद वैधता पर प्रश्न उठाने वाले व्यक्ति पर भार आता है। 2. उच्चतम न्यायालय के अनुसार धारा 112 की धारणा लोक नैतिकता और लोक नीति पर आधारित है। 3. उच्चतम न्यायालय ने धारा 112 को केवल कमजोर साक्ष्यगत धारणा बनाने वाला उपबंध बताया। 4. धारा 112 का उद्देश्य ऐसे मामले में पितृत्व की अनावश्यक जांच रोकना है जहां संबंधित समय पर माता-पिता की पहुंच थी। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1 और 3
Bकेवल 2 और 4
Cकेवल 1, 2 और 4
D1, 2, 3 और 4

12धारा 112 और चुनौती देने वाले व्यक्ति के भार के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. धारा 112 विवाह की निरंतरता में जन्मी संतान की वैधता का अनुमान बनाती है। 2. संतान की वैधता पर प्रश्न उठाने वाले व्यक्ति पर भार पड़ता है। 3. भार हमेशा संतान पर होता है कि वह पहले जैविक पितृत्व सिद्ध करे। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3

13धारा 112 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में निर्णायक प्रमाण की अवधारणा के प्रभाव के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. धारा 4 कहती है कि जब एक तथ्य दूसरे का निर्णायक प्रमाण घोषित हो, तो न्यायालय दूसरे तथ्य को सिद्ध मानेगा। 2. धारा 4 यह भी कहती है कि ऐसे सिद्ध तथ्य को असिद्ध करने के लिए साक्ष्य देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 3. धारा 112 केवल विवेकाधीन अनुमान बनाती है जिसे न्यायालय बिना प्रमाण के स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है। 4. धारा 112 में जन्म का तथ्य वैधता से जुड़ा है, क्षेत्र-अर्पण के प्रमाण से नहीं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 1, 2 और 4
Cकेवल 2, 3 और 4
Dकेवल 1, 3 और 4

14धारा 112 से जुड़े DNA परीक्षण मामलों में न्यायालयों की सावधानी के कारणों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायालयों ने धारा 112 को लोक नैतिकता और लोक नीति से जोड़ा है। 2. इसका उद्देश्य वैध विवाह से जन्मे बच्चों को अडिग वैधता देना भी है। 3. नियमित DNA परीक्षण बच्चे की पहचान और निजता-हितों को प्रभावित कर सकता है। 4. जब भी अभिवचनों में पितृत्व से इंकार किया जाए, न्यायालय यांत्रिक ढंग से DNA परीक्षण का आदेश देते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 1 और 4
Cकेवल 2 और 3
D1, 2, 3 और 4

15निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 विवाह के दौरान जन्म को वैधता का निश्चायक प्रमाण मानने से संबंधित है। 2. यह धारा केवल विवाह-विच्छेद के बाद जन्मे बच्चे पर लागू होती है, विवाह जारी रहने के दौरान जन्मे बच्चे पर कभी नहीं। 3. धारा 112 में वैधानिक अपवाद यह है कि जब बच्चा गर्भित हो सकता था, उस समय विवाह के पक्षकारों की एक-दूसरे तक पहुंच नहीं थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Aकेवल 1 और 3
Bकेवल 1 और 2
Cकेवल 2 और 3
D1, 2 और 3

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