MCQ
upsc-p1-polity-state-executive MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए upsc-p1-polity-state-executive के 9 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1राज्यपाल की नियुक्ति और पद की शर्तों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर वाले वारंट से करते हैं। 2. संबंधित राज्य का निवासी होना राज्यपाल की नियुक्ति के लिए संवैधानिक योग्यता है। 3. संसद का कोई सदस्य राज्यपाल नियुक्त होने पर पद ग्रहण करते ही अपनी संसदीय सीट खाली कर देता है। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
कथन 1 और 3 सही हैं। अनुच्छेद 155 में राष्ट्रपति के वारंट से नियुक्ति होती है और अनुच्छेद 158 के अनुसार राज्यपाल का पद ग्रहण करते ही विधायक या सांसद की सीट खाली मानी जाती है। अनुच्छेद 157 में भारत की नागरिकता और 35 वर्ष की आयु जरूरी है, संबंधित राज्य का निवासी होना नहीं।
प्र.2सूची I को सूची II से मिलाइए: सूची I (मामला) क. शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य ख. हरगोविंद पंत बनाम रघुकुल तिलक ग. बी. पी. सिंघल बनाम भारत संघ घ. नबाम रेबिया बनाम उपाध्यक्ष सूची II (सिद्धांत) 1. राज्यपाल संघ सरकार के कर्मचारी या सेवक नहीं हैं 2. राज्यपाल को मनमाने या दुर्भावनापूर्ण ढंग से नहीं हटाया जा सकता 3. राष्ट्रपति और राज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर काम करते हैं 4. विधानसभा सत्र से जुड़ा राज्यपाल का विवेकाधिकार संवैधानिक रूप से सीमित है नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
शमशेर सिंह ने सहायता और सलाह को सामान्य नियम माना; हरगोविंद पंत ने राज्यपाल को संघ सरकार का कर्मचारी मानने से इनकार किया; बी. पी. सिंघल ने मनमाने हटाने पर सीमा लगाई; और नबाम रेबिया ने विधानसभा सत्र से जुड़े विवेकाधिकार को सीमित माना। इसलिए विकल्प D सही है।
प्र.3राज्यपाल की संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित करता है। 2. अनुच्छेद 163 में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह सामान्य नियम है, जबकि विवेकाधिकार का सीमित संवैधानिक अपवाद भी है। 3. अनुच्छेद 168 राज्यपाल को राज्य विधानमंडल का घटक बनाता है, हालांकि वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 154 औपचारिक रूप से राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में रखता है, लेकिन अनुच्छेद 163 सामान्य सहायता और सलाह का ढांचा बनाता है। अनुच्छेद 168 राज्यपाल को राज्य विधानमंडल का घटक भी बनाता है, पर किसी सदन का सदस्य नहीं।
प्र.4अनुच्छेद 200 के तहत राज्य विधेयक पर राज्यपाल की कार्रवाई के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. धन विधेयक न हो तो उसे संदेश सहित पुनर्विचार के लिए लौटाया जा सकता है। 2. ऐसा लौटाया गया विधेयक फिर से पारित हो जाए तो विधेयक लौटाने की सामान्य प्रक्रिया में राज्यपाल अनुमति नहीं रोक सकते। 3. इसी प्रावधान के तहत धन विधेयक भी पुनर्विचार के लिए लौटाया जा सकता है। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है। अनुच्छेद 200 में राज्यपाल केवल उस विधेयक को लौटा सकते हैं जो धन विधेयक न हो। विधानमंडल लौटाए गए विधेयक को फिर पारित कर दे तो विधेयक लौटाने की सामान्य प्रक्रिया में अनुमति नहीं रोकी जा सकती।
प्र.5राज्यपाल के पद से जुड़े निम्नलिखित फैसलों को सबसे पुराने से नवीनतम के कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए: क. एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ ख. बी. पी. सिंघल बनाम भारत संघ ग. शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य घ. हरगोविंद पंत बनाम रघुकुल तिलक नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सही कालक्रम शमशेर सिंह (1974), हरगोविंद पंत (1979), एस. आर. बोम्मई (1994) और बी. पी. सिंघल (2010) है। इसलिए विकल्प A में दिया क्रम ग-घ-क-ख सही है।
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और प्रश्न
6राज्य मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य-संख्या के 15% से अधिक और 12 से कम नहीं हो सकती। 2. कोई मंत्री लगातार 6 महीने तक राज्य विधानमंडल का सदस्य न बने तो उसका मंत्री पद समाप्त हो जाता है। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
7राज्य कार्यपालिका से जुड़े निम्नलिखित संवैधानिक घटनाक्रमों को सबसे पुराने से नवीनतम के कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए: क. 94वें संविधान संशोधन ने जनजातीय कल्याण के प्रभारी मंत्री की अपेक्षा वाले राज्यों की सूची बदली। ख. 7वें संविधान संशोधन ने एक व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल बनने की अनुमति दी। ग. 91वें संविधान संशोधन ने अनुच्छेद 164(1A) में राज्य मंत्रिपरिषद की संख्या की सीमा जोड़ी। घ. बी. पी. सिंघल ने राज्यपालों को मनमाने ढंग से हटाने पर सीमा लगाई। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
8राज्यपाल की कार्रवाई पर न्यायिक नियंत्रण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 361 राज्यपाल को पद से जुड़े कार्यों के संबंध में निजी उन्मुक्ति देता है। 2. यह निजी उन्मुक्ति राज्यपाल की कार्रवाई से बने संवैधानिक परिणामों की वैधता की न्यायिक जांच को नहीं रोकती। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
9राज्यपाल के विशेष कार्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के संबंध में राज्यपाल पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजने की विशेष जिम्मेदारी है। 2. छठी अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम की स्वायत्त जिला तथा क्षेत्रीय परिषदों से जुड़े राज्यपाल के कार्य हैं। 3. राज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होना अनुच्छेद 153 के तहत हर राज्यपाल की सामान्य संवैधानिक शक्ति है। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
