MCQ
upsc-p1-history-vedic-age MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए upsc-p1-history-vedic-age के 9 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1वैदिक साहित्य की निम्नलिखित परतों को मंत्र-संग्रह से दार्शनिक प्रश्नों की ओर बढ़ने वाले क्रम में लगाइए: 1. उपनिषद 2. संहिताएं 3. आरण्यक 4. ब्राह्मण ग्रंथ नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
विकल्प B सही क्रम देता है। संहिताएं मंत्र-संग्रह हैं; ब्राह्मण ग्रंथ कर्मकांड की व्याख्या करते हैं; आरण्यक कर्मकांड की प्रतीकात्मक और आंतरिक व्याख्या करते हैं; उपनिषद आत्मा, ब्रह्म और ज्ञान से जुड़े दार्शनिक सवालों को केंद्र में लाते हैं।
प्र.2वैदिक काल की भौतिक संस्कृति और विनिमय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चित्रित धूसर मृदभांड प्रत्येक वैदिक समुदाय और स्थल की सीधी जातीय पहचान है। 2. बाद के संदर्भों में श्याम अयस् या कृष्ण अयस् को सामान्यतः लोहा माना जाता है। 3. निष्क को आरंभिक वैदिक अर्थव्यवस्था का नियमित सिक्का ही माना जाना चाहिए। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
केवल कथन 2 सही है। सामान्यतः इसे बाद के संदर्भों में लोहा माना जाता है। चित्रित धूसर मृदभांड का उत्तर वैदिक क्षेत्रों से केवल व्यापक और संभावित संबंध है; यह सीधी जातीय पहचान नहीं है। निष्क आभूषण या मूल्यवान वस्तु के रूप में आता है, इसलिए उसे आरंभिक वैदिक काल का नियमित सिक्का नहीं मानना चाहिए।
प्र.3सूची 1 को सूची 2 से मिलाइए। सूची 1 (वैदिक ग्रंथ) क. सामवेद ख. यजुर्वेद ग. अथर्ववेद घ. आरण्यक सूची 2 (मुख्य संबंध) 1. यज्ञ-मंत्र और कर्मकांड संबंधी निर्देश 2. कर्मकांड की प्रतीकात्मक और आंतरिक व्याख्या 3. सूक्तों का गान और संगीतात्मक व्यवस्था 4. मंत्र, उपचार और घरेलू विषय नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
विकल्प C सही मिलान देता है। सामवेद में सूक्तों को गान के लिए व्यवस्थित किया गया है; यजुर्वेद में यज्ञ-मंत्र और कर्मकांड संबंधी निर्देश हैं; अथर्ववेद में मंत्र, उपचार और घरेलू विषय हैं; आरण्यक कर्मकांड की प्रतीकात्मक और आंतरिक व्याख्या करते हैं।
प्र.4वैदिक ग्रंथों के संरक्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पदपाठ, क्रमपाठ और अन्य पाठ-पद्धतियों ने प्रत्येक शब्द और ध्वनि को असाधारण सावधानी से सुरक्षित रखने में मदद की। 2. आरंभिक वैदिक समाज में वेदों के संरक्षण का मुख्य साधन शुरुआती लिखित पांडुलिपियों पर निर्भरता थी। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
कथन 1 सही और कथन 2 गलत है। अनुशासित मौखिक पाठ-पद्धतियां शब्दों और ध्वनियों को कई क्रमों में जांचती थीं। वैदिक परंपरा की मुख्य सांस्कृतिक उपलब्धि मौखिक संरक्षण थी; लेखन और शुरुआती पांडुलिपियां आरंभिक वैदिक समाज की मुख्य पहचान नहीं थीं।
प्र.5वैदिक काल के समाज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. परिवार मुख्यतः पितृसत्तात्मक और पितृवंशीय था तथा गृहपति घर का मुखिया था। 2. चार वर्णों की व्यवस्था 10वें मंडल के पुरुष सूक्त में आती है, जिसे सामान्यतः 10वें मंडल का बाद में जोड़ा गया हिस्सा माना जाता है। 3. पूरे वैदिक काल में सभी स्त्रियों और सभी शूद्रों को समान रूप से शिक्षा से वंचित रखा गया था। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
कथन 1 और 2 सही हैं। वैदिक समाज मुख्यतः पितृसत्तात्मक था और पुरुष सूक्त 10वें मंडल के बाद में जोड़े गए हिस्से से जुड़ा है। कथन 3 में अत्यधिक सामान्यीकरण किया गया है; शिक्षा के अवसर समय के साथ कम हुए और वे दर्जे, वंश, क्षेत्र तथा कर्मकांड के संदर्भ के अनुसार बदलते थे।
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और प्रश्न
6वैदिक काल में भौगोलिक बदलाव के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक संस्कृति का केंद्र मुख्यतः उत्तर-पश्चिम में, पंजाब और सप्त-सिंधु क्षेत्र में था। 2. उत्तर वैदिक काल में इसका विस्तार कुरु-पांचाल और गंगा-यमुना दोआब से आगे कोसल और विदेह की ओर हुआ। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
7निम्नलिखित भौगोलिक क्षेत्रों को ऋग्वैदिक चरण से महाजनपदों की ओर संक्रमण तक उनके व्यापक क्रम में लगाइए: 1. बड़े राज्यों की ओर संक्रमण में मध्य गंगा मैदान 2. कुरु-पांचाल और गंगा-यमुना दोआब 3. पंजाब और सप्त-सिंधु क्षेत्र 4. बाद के काल में पूर्व की ओर कोसल और विदेह नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
8वैदिक साहित्य की परतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वेद संहिता में 10 मंडल हैं, जिनमें मंडल 2-7 को अक्सर पुराने पारिवारिक मंडल माना जाता है। 2. ब्राह्मण ग्रंथ ऐसे गद्य ग्रंथ हैं जो यज्ञ-विधि, उसके प्रतीकों और पुरोहितों के कार्यों की व्याख्या करते हैं। 3. आरण्यक वैदिक साहित्य से बाहर हैं, क्योंकि वे कर्मकांड को पूरी तरह खारिज करते हैं। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
9वैदिक राजव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सभा और समिति शुरुआती राजव्यवस्था में सहभागिता के संकेत देती हैं। 2. आरंभिक वैदिक राजन स्थायी नौकरशाही और पेशेवर स्थायी सेना का प्रमुख था। 3. बाद के राजसूय, वाजपेय और अश्वमेध जैसे यज्ञों ने राजा का दर्जा बढ़ाया तथा सत्ता को यज्ञीय वैधता से जोड़ा। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
