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सामाजिक विज्ञान — भाग I (माध्यमिक/उच्च माध्यमिक) MCQ - अभ्यास प्रश्न

5 विषयों में 581 प्रश्नों का विस्तृत व्याख्या के साथ अभ्यास करें।

581प्रश्न
5विषय
3कठिनाई स्तर

सामाजिक विज्ञान — भाग I (माध्यमिक/उच्च माध्यमिक) में विषय

नमूना प्रश्न

1निम्न में से कौन सी वस्तुनिष्ठ प्रकार के परीक्षण की विशेषता है ?

A मितव्ययी
B व्यक्तिनिष्ठ
C उच्च स्तरीय विश्वसनीयता
D अल्प विषय-वस्तु व्यापकता

2मुगल व्यवस्था में मनसबदारों और जागीरों के संबंध में सबसे सटीक कथन कौन-सा है?

A अधिकांश मनसबदार अपनी जागीरों में ही रहते थे और स्थानीय सरदारों की तरह सीधे गांवों का प्रशासन चलाते थे।
B जागीर मनसबदार की स्थायी निजी संपत्ति थी और शाही स्वीकृति के बिना उसके उत्तराधिकारियों को मिल सकती थी।
C जागीर मनसबदार को शाही सेवा के पारिश्रमिक के रूप में किसी निर्धारित क्षेत्र से राजस्व वसूलने का अधिकार देती थी।
D जागीर एक धार्मिक दान-संपत्ति थी जिसका उपयोग केवल मस्जिदों और मदरसों के पालन के लिए होता था।

3हड़प्पाई समाज में सामाजिक भेद के प्रमाण को कौन-सा कथन सबसे ठीक रूप में प्रस्तुत करता है?

A हड़प्पाई कब्रिस्तान बाद की वर्ण-व्यवस्था जैसी कठोर जाति-सीढ़ी सिद्ध करते हैं
B सामाजिक भेद केवल लिखित राजवंशावलियों से ही दिख सकता है, और हड़प्पा के लिए ऐसी कोई वंशावली नहीं है
C सभी हड़प्पाई घर और दफन पूरी तरह एक जैसे थे, जिससे पूर्ण सामाजिक समानता सिद्ध होती है
D घरों, वस्तुओं और दुर्लभ सामग्रियों तक पहुंच में अंतर सामाजिक भेद का संकेत देता है, लेकिन सटीक पदानुक्रम पूरी तरह स्पष्ट नहीं है

4वैदिक सामाजिक व्यवस्था से जुड़े प्रश्नों में पुरुषसूक्त का बार-बार उपयोग होता है। इस प्रमाण का सबसे उचित ऐतिहासिक उपयोग क्या है?

A यह ब्राह्मण और क्षत्रिय की अनुष्ठानिक भूमिकाओं के अस्तित्व को नकारता है।
B यह सिद्ध करता है कि आरंभिक वैदिक चरण में ही सैकड़ों जातियां अंतर्विवाही और वंशानुगत हो चुकी थीं।
C यह बौद्ध संघीय साहित्य का अंश है और वैदिक यज्ञ की आलोचना करता है।
D यह विचारधारात्मक चार-वर्णीय सामाजिक वर्गीकरण का प्रमाण है, लेकिन केवल इसके आधार पर आरंभिक ऋग्वैदिक समाज में पूरी तरह कठोर जाति-व्यवस्था सिद्ध नहीं मानी जानी चाहिए।

5वैदिक संस्कृति में इन पांच-महायज्ञों में से कौन सा एक घर गृहस्थ के द्वारा नहीं किया जाता था ?

A पितृ यज्ञ
B पुत्री यज्ञ
C भूत यज्ञ
D देव यज्ञ

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