MCQ
राजस्थान के पारंपरिक आभूषण MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए राजस्थान के पारंपरिक आभूषण के 4 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1राजस्थान में दांतों के बीच सोने की कील लगाने को क्या कहा जाता है?
राजस्थान की लोक-आभूषण परंपरा में दांतों के बीच सोने की कील लगाने को चूंप कहा जाता है। दामना इस खास दंत-आभूषण का नाम नहीं है। बारी भी दांतों के बीच लगाई जाने वाली सोने की कील के लिए प्रयुक्त शब्द नहीं है। बोरला राजस्थान का प्रसिद्ध सिर या माथे पर पहना जाने वाला आभूषण है, इसलिए वह आभूषणों से जुड़ा शब्द होते हुए भी इस संदर्भ में सही नहीं बैठता। इसीलिए सही उत्तर चूंप है।
प्र.2ओगनिया, अंगोटिया और सुरलिया आभूषण कहाँ पहने जाते हैं?
ओगनिया, अंगोटिया और सुरलिया राजस्थान के पारंपरिक कानों में पहने जाने वाले आभूषणों में गिने जाते हैं। इसलिए सही स्थान कान हैं। सिर के आभूषणों में बोरला या राखड़ी जैसे नाम आते हैं, ये नहीं। कलाई वाले आभूषण चूड़ी या कड़े की श्रेणी में आते हैं। पैरों के आभूषण पायल, कड़ा या बिछिया जैसे अलग नामों से पहचाने जाते हैं। सवाल असल में लोक-आभूषणों के नाम और उनके पहनने के स्थान की पहचान पूछता है।
प्र.3निम्नलिखित में से आभूषण और मानव शरीर के अंग का कौनसा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
राजस्थानी पारंपरिक आभूषणों में सुरलिया कान में पहना जाने वाला आभूषण है, तिमणिया गले का आभूषण है और तगड़ी कमर में पहनी जाती है। रमझोल कलाई का आभूषण नहीं है; यह पैरों या टखने के हिस्से से जुड़ा आभूषण माना जाता है। कलाई के आभूषण के लिए परंपरागत नाम अलग मिलते हैं। इसलिए रमझोल - कलाई वाला युग्म गलत सुमेलित है, जबकि बाकी तीन युग्म आभूषण और शरीर के अंग को सही ढंग से जोड़ते हैं।
प्र.4महिलाएं बोरला नामक आभूषण कहां पहनती हैं?
बोरला राजस्थान का पारंपरिक सिर का आभूषण है। इसे आम तौर पर मांग या माथे के बीच की ओर, सिर पर पहना जाता है और विवाह व उत्सवों की सजावट में इसका खास स्थान है। कान के लिए झुमके या कर्णफूल जैसे आभूषण होते हैं, बोरला नहीं। नाक के लिए नथ या नथनी पहनी जाती है। हाथ में चूड़ी, कड़ा या बाजूबंद जैसे आभूषण आते हैं। इसलिए बोरला सिर पर पहना जाने वाला आभूषण है।
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