MCQ
राजस्थानी साहित्य MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए राजस्थानी साहित्य के 11 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1राजस्थानी भाषा में पद्य रूप में उपलब्ध संतों के जीवन-वृत्त को _______________ कहा जाता है।
राजस्थानी साहित्य में परची संतों के जीवन, उपदेश और भक्तिपरक प्रभाव का पद्य रूप में लिखा गया संक्षिप्त जीवन-वृत्त मानी जाती है। प्रश्न में भी संतों के जीवन-इतिहास के उसी पद्यात्मक रूप की बात है, इसलिए परची सही पद है। वात सामान्य कथा या प्रसंग के अर्थ में आता है, संत-जीवन की खास पद्य जीवनी नहीं। वचनिका कथन या गद्यनुमा प्रस्तुति से जुड़ी है, और दवावैत अलग साहित्यिक रूप है; इसलिए ये दिए गए संकेत से मेल नहीं खाते।
प्र.2'बेली कृष्ण रुक्मणी री' के लेखक किस शासक के दरबारी कवि थे?
प्रकाशित उत्तर के अनुसार 'बेली कृष्ण रुक्मणी री' के लेखक अकबर के दरबारी कवि थे। यह कृति पृथ्वीराज राठौड़ से जुड़ी मानी जाती है, जो डिंगल परंपरा के प्रमुख कवि थे और अकबर के मुगल दरबार से संबंधित बताए जाते हैं। विग्रहराज चतुर्थ और महाराणा कुंभा की अपनी राजपूत दरबारी-सांस्कृतिक परंपराएँ थीं, लेकिन इस लेखक का दरबारी संदर्भ उनसे नहीं जुड़ता। शाहजहाँ बाद का मुगल शासक था, इसलिए यह साहित्यिक संबंध उसके शासन से मेल नहीं खाता।
प्र.3गीत ‘धरती धोरां री’ के लेखक कौन हैं?
‘धरती धोरां री’ राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रसिद्ध गीत है और इसके लेखक कन्हैयालाल सेठिया हैं। विजयदान देथा राजस्थानी कहानियों और लोककथा-आधारित लेखन के लिए जाने जाते हैं, इस गीत के लेखक के रूप में नहीं। अल्लाह जिलाई बाई मांड गायन के लिए प्रसिद्ध लोक गायिका थीं। गवरी देवी भी गायन परंपरा से जुड़ी नामी कलाकार थीं। प्रश्न लेखक पूछता है, गायक नहीं, इसलिए कन्हैयालाल सेठिया ही सही उत्तर हैं।
प्र.4साहित्यिक कृति और लेखक का असंगत युग्म पहचानिए।
असंगत युग्म राज वल्लभ और महाराणा कुम्भा है। महाराणा कुम्भा संगीत, स्थापत्य और संस्कृत विद्या से जुड़ी रचनात्मक परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन इस सूची में राज वल्लभ को उनके साथ जोड़ना सही नहीं माना जाता। राज प्रकाश और किशोरदास का युग्म साहित्यिक संदर्भ में सही माना गया है। पाबू प्रकाश और मोड़जी आशिया भी राजस्थानी साहित्य की मानक जोड़ी है। अमरसार और पं. जीवाधर का युग्म भी संगत है। प्रश्न गलत जोड़ी पूछता है, इसलिए राज वल्लभ वाला युग्म उत्तर है।
प्र.5"राणे जगपत रा मरस्या" किस शासक की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए लिखा गया था?
"राणे जगपत रा मरस्या" एक शोक-रचना है, जिसे महाराजा जगत सिंह की मृत्यु पर विलाप से जोड़ा जाता है। प्रश्न में उसी शासक का नाम पूछा गया है जिसकी मृत्यु पर यह रचना लिखी गई थी। महाराजा जनक सिंह इस मरस्या परंपरा से इस संदर्भ में नहीं जुड़े हैं। महाराजा जीवन सिंह नाम की समानता के कारण रखा गया भ्रामक विकल्प है, पर रचना का विषय नहीं है। महाराजा जयदीप सिंह का भी इस शोक-रचना से संबंध नहीं माना जाता।
आपने 11 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं
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और प्रश्न
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