MCQ
चित्रकला शैलियाँ (मेवाड़, मारवाड़, किशनगढ़, हाड़ौती) और हस्तशिल्प MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए चित्रकला शैलियाँ (मेवाड़, मारवाड़, किशनगढ़, हाड़ौती) और हस्तशिल्प के 9 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1अभिकथन (A): बीकानेर चित्रकला, व्यापक मारवाड़ सांस्कृतिक क्षेत्र में रखे जाने पर भी, जोधपुर की अपेक्षाकृत भारी शैली से अधिक महीन रेखांकन और स्वाभाविकता दिखा सकती है। कारण (R): बीकानेर के शासकों के मुगल और दक्कनी संपर्क सहित राजस्थान के बाहर दरबारी संबंध रहे।
मारवाड़ खंड हर राठौड़-सम्बद्ध केंद्र को एक जैसा नहीं मानता। जोधपुर को प्रभावी रंग, बलिष्ठ आकृतियों, घोड़ों, योद्धाओं और दरबारी दृश्यों से याद किया जाता है। बीकानेर व्यापक मारवाड़ सांस्कृतिक क्षेत्र में है, लेकिन वहाँ मुगल और दक्कनी संपर्क अधिक दिखता है, क्योंकि शासकों के साम्राज्यिक अभियानों और बाहर के दरबारी संबंधों से संपर्क बने। यही संपर्क बीकानेर में महीन रेखांकन और अधिक स्वाभाविकता को समझाता है। इसलिए अभिकथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण अभिकथन की सीधी व्याख्या करता है।
प्र.2राजस्थान के हस्तशिल्पों के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: थेवा कला प्रतापगढ़ से जुड़ी है और रंगीन काँच पर सोने की महीन कारीगरी के लिए प्रसिद्ध है। कथन 2: कोटा डोरिया कोटा और आसपास के बुनाई केंद्रों से जुड़ा हल्का जालीदार वस्त्र है। कथन 3: उस्ता कला जयपुर की ब्लू पॉटरी से जुड़ी है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
हस्तशिल्प को स्थान, सामग्री और तकनीक की त्रयी में याद करने को कहा जाता है। थेवा प्रतापगढ़ से जुड़ी है और रंगीन काँच पर सोने की महीन कारीगरी के लिए पहचानी जाती है। कोटा डोरिया कोटा और आसपास के बुनाई केंद्रों से जुड़ा हल्का जालीदार वस्त्र है। उस्ता कला, इसके विपरीत, बीकानेर का संकेत है, जबकि ब्लू पॉटरी जयपुर का संकेत है। इसलिए प्रतापगढ़-थेवा और कोटा-कोटा डोरिया वाले कथन सही हैं, पर उस्ता-जयपुर ब्लू पॉटरी वाला कथन दो अलग शिल्प-पहचानें मिला देता है।
प्र.3चित्रशैली को उसके सबसे उपयुक्त परीक्षा-संकेत से मिलाइए। सूची 1: 1. मारवाड़ 2. किशनगढ़ 3. हाड़ौती 4. मेवाड़ सूची 2: क. बणी-ठणी और राधा-कृष्ण की परिष्कृत भक्ति-छवि ख. बूंदी-कोटा के वर्षा और शिकार दृश्य ग. चावंड रागमाला और प्रभावी भक्ति-कथा घ. राठौड़ दरबार, लोकनायक और मरुस्थलीय समाज
चारों शैलियों को स्पष्ट संकेतों से अलग किया जाता है। मारवाड़ राठौड़ संरक्षण, पश्चिमी राजस्थान, लोकनायकों और मरुस्थलीय दरबार से जुड़ता है। किशनगढ़ सावंत सिंह, निहालचंद, बणी-ठणी और राधा-कृष्ण की परिष्कृत भक्ति-छवि से पहचाना जाता है। हाड़ौती का अर्थ बूंदी-कोटा है, जहाँ वर्षा, महल-उद्यान और शिकार-दृश्य प्रमुख हैं। मेवाड़ चावंड रागमाला, प्रभावी रेखांकन और भक्ति-कथा से जुड़ता है। इसलिए सही मिलान केंद्र, संरक्षण, विषय और दृश्य-लक्षण को साथ रखता है।
प्र.4हाड़ौती चित्रशैली के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन गलत है?
हाड़ौती बूंदी-कोटा की क्षेत्रीय परंपरा है, किशनगढ़ की नहीं। बूंदी को हरियाली, वर्षा-बादल, महल की छतों, उद्यानों और प्रकृति के सजीव प्रयोग से जोड़ा जाता है। कोटा निकट परंपरा है, पर उसे बाघ, हाथी और तेज गति वाले पशुओं वाले राजसी शिकार-दृश्यों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। बणी-ठणी किशनगढ़ से जुड़ती है, जहाँ सावंत सिंह, निहालचंद और राधा-कृष्ण भक्ति-श्रृंगार मुख्य पहचान बनाते हैं। इसलिए बणी-ठणी को हाड़ौती की मुख्य दृश्य-पहचान बताना गलत है।
प्र.51605 के आसपास की चावंड रागमाला, स्पष्ट रेखांकन, तीखे रंग और भक्ति-कथा से किस चित्रशैली की सबसे सही पहचान होती है?
1605 के आसपास की चावंड रागमाला को मेवाड़ परंपरा का महत्वपूर्ण प्रारंभिक प्रमाण बताया जाता है। इसके परीक्षा-संकेत स्पष्ट रेखांकन, तीखे रंग, ठोस आकृतियाँ और रागमाला, कृष्ण-लीला, भागवत तथा रामायण जैसे धार्मिक-साहित्यिक विषय हैं। किशनगढ़ बणी-ठणी और राधा-कृष्ण भक्ति-श्रृंगार से, मारवाड़ मरुस्थलीय दरबार और लोकगाथा से, तथा हाड़ौती बूंदी-कोटा की प्रकृति और शिकार से पहचानी जाती है। इसलिए चावंड वाला संकेत सीधे मेवाड़ शैली की ओर ले जाता है।
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और प्रश्न
6कौन-सा शिल्प-स्थान युग्म सही है?
7चित्रशैली को उसके सबसे स्थिर परीक्षा-संकेत से मिलाइए। सूची I: 1. मेवाड़ 2. मारवाड़ 3. किशनगढ़ 4. हाड़ौती सूची II: क. बणी-ठणी और राधा-कृष्ण की परिष्कृत भक्ति ख. बूंदी-कोटा के वर्षा-दृश्य और शिकार-दृश्य ग. चावंड रागमाला, भक्ति-कथा और स्थानीय रेखांकन घ. राठौड़ मरुस्थलीय दरबार, लोकनायक और प्रभावी दरबारी दृश्य
8हाड़ौती चित्रशैली के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: बूंदी चित्रकला घनी वनस्पति, वर्षा-बादलों, महल की छतरियों, उद्यान-दृश्यों और अभिव्यंजक प्रकृति-दृश्य के लिए जानी जाती है। कथन 2: कोटा चित्रकला विशेष रूप से बाघ, हाथी और तेज गति वाले पशुओं से जुड़े राजसी शिकार-दृश्यों से सम्बद्ध है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
9अभिकथन: किशनगढ़ चित्रशैली को केवल किसी चित्र-नाम की तरह नहीं, बल्कि बणी-ठणी आदर्श से जुड़ी परिष्कृत भक्ति-शैली के रूप में समझना चाहिए। कारण: किशनगढ़ को सावंत सिंह, निहालचंद, राधा-कृष्ण भक्ति, लंबी आकृति-विशेषताओं और काव्यमय भाव से जोड़ा जाता है। सही उत्तर चुनिए।
