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राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ एवं हस्तशिल्प MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ एवं हस्तशिल्प के 12 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.110 अप्रैल 1605 की चावंड रागमाला और बाद की नाथद्वारा पिछवाई भक्ति-परंपरा को किस चित्रशैली से जोड़ना चाहिए?

A किशनगढ़ शैली
B मेवाड़ शैली
C कोटा शैली
D बीकानेर शैली
व्याख्या

सही संबंध मेवाड़ से बनता है, क्योंकि इसके केंद्र चावंड, उदयपुर और आगे नाथद्वारा से जुड़े भक्ति-स्थल रहे। 10 अप्रैल 1605 की चावंड रागमाला मेवाड़ चित्रकला का शुरुआती पक्का प्रमाण मानी गई है। नाथद्वारा में श्रीनाथजी की उपासना और पिछवाई चित्रकला मजबूत हुई। किशनगढ़ बणी-ठणी से, कोटा शिकार-दृश्यों से और बीकानेर पश्चिमी दरबारी शैली से पहचाना जाता है; इसलिए ये दोनों संकेत साथ नहीं निभाते।

प्र.2अभिकथन (A): CET की तैयारी में हाड़ौती चित्रकला को बूंदी की वर्षा-बाग वाली छवि और कोटा के गतिशील शाही शिकार-दृश्यों से याद रखा जा सकता है। कारण (R): दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की पहाड़ियों, नदियों, वनों और महल-स्थलों को बूंदी-कोटा चित्रकला को आकार देने वाला बताया गया है, और कोटा को खासकर शिकार-दृश्यों के लिए जाना गया है। सही उत्तर चुनिए।

A A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है
B A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की व्याख्या नहीं करता
C A सही है, लेकिन R गलत है
D A गलत है, लेकिन R सही है
व्याख्या

हाड़ौती चित्रकला दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के बूंदी और कोटा केंद्रों को समेटती है। बूंदी की पहचान हरियाली, वर्षा-बादल, महल-छतों, बाग-दृश्यों और सक्रिय प्राकृतिक वातावरण से बनती है। कोटा निकट शैली होते हुए भी बाघ, हाथी, घोड़े और वन-गतिविधि वाले शाही शिकार-दृश्यों से अलग पहचाना जाता है। कारण इसका भौगोलिक आधार देता है: पहाड़ियां, नदियां, वन, बाग और महल-स्थल इस दृश्य संसार को आकार देते हैं। इसलिए हाड़ौती वाला संकेत सही है और कारण उसे समझाता है।

प्र.3नीचे दिए गए शिल्प-स्थान युग्मों में कौन-सा गलत मिलाया गया है?

A प्रतापगढ़ - थेवा कला
B बगरू और सांगानेर - हाथ की ब्लॉक छपाई
C नाथद्वारा के पास मोलेला - मृणशिल्प पट्टिकाएँ
D बीकानेर - बणी-ठणी चित्र
व्याख्या

गलत युग्म बीकानेर के साथ बणी-ठणी चित्र है। बणी-ठणी को किशनगढ़ शैली से जोड़ा गया है, खासकर सावंत सिंह, निहालचंद और राधा-कृष्ण भक्ति-श्रृंगार के साथ। बीकानेर अलग संदर्भों में आता है: मारवाड़ से जुड़ा महीन बाहरी प्रभाव वाला चित्रकला केंद्र और ऊँट-चर्म तथा उस्ता सज्जा से जुड़ा शिल्प केंद्र। प्रतापगढ़-थेवा, बगरू और सांगानेर-हाथ की ब्लॉक छपाई, तथा मोलेला-मृणशिल्प पट्टिकाएँ सही युग्म हैं।

प्र.4किशनगढ़ शैली के बारे में नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: इसका संबंध सावंत सिंह, निहालचंद, राधा-कृष्ण रूपांकन और बणी-ठणी से निकटता से है। कथन 2: इसके सामान्य दृश्य-संकेतों में लंबा चेहरा, कमानीदार भौंहें, कमल जैसी आँखें और भावपूर्ण कोमलता आती है। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

A केवल कथन 1
B केवल कथन 2
C कथन 1 और कथन 2 दोनों
D न तो कथन 1 और न ही कथन 2
व्याख्या

किशनगढ़ शैली को पहचानना आसान है, क्योंकि इसकी साफ कड़ी दी गई है: सावंत सिंह, कलाकार निहालचंद, आदर्शीकृत राधा-कृष्ण रूपांकन और बणी-ठणी। उसी वर्णन में लंबा चेहरा, कमानीदार भौंहें, कमल जैसी आँखें, नुकीली ठुड्डी, पतला शरीर और भावपूर्ण कोमलता भी दृश्य-लक्षण के रूप में बताए गए हैं। इसलिए ऐतिहासिक संबंध और दृश्य-संकेत दोनों किशनगढ़ शैली के ही हिस्से हैं, और दोनों कथन सही हैं।

प्र.5हाड़ौती चित्रशैली की परंपराओं के लिए निम्न में से कौन-सा युग्म गलत है?

A बूंदी - हरी-भरी वनस्पति और वर्षा-दृश्य
B कोटा - राजसी शिकार-दृश्य
C हाड़ौती - बूंदी और कोटा परंपराएँ
D कोटा - बणी-ठणी और परिष्कृत राधा-कृष्ण भक्ति
व्याख्या

हाड़ौती चित्रशैली बूंदी और कोटा से जुड़ी है, लेकिन दोनों के परीक्षा-संकेत अलग हैं। बूंदी वर्षा, हरी-भरी वनस्पति, महल की छतरियों और बाग-दृश्यों से याद रखी जाती है। कोटा की अलग पहचान बाघ, हाथी, घोड़े और जंगलों वाले राजसी शिकार-दृश्यों में है। बणी-ठणी और परिष्कृत राधा-कृष्ण भक्ति किशनगढ़ की पहचान हैं, कोटा की नहीं। इसलिए कोटा-बणी-ठणी वाला युग्म गलत है।

आपने 12 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6सूची 1 को सूची 2 से मिलाइए। सूची 1: 1. फड़ 2. पिछवाई 3. मांडना सूची 2: क. नाथद्वारा-श्रीनाथजी की भक्ति-पृष्ठभूमि ख. लोकदेवता की कथा वाला प्रदर्शन-प्रयुक्त चित्रपट ग. घरों में दीवार और फर्श की सजावट

A1-ख, 2-क, 3-ग
B1-क, 2-ख, 3-ग
C1-ख, 2-ग, 3-क
D1-ग, 2-क, 3-ख

7गोपाल सैनी राजस्थान की किस हस्तकला से संबंधित हैं?

Aटेराकोटा
Bब्लू पॉटरी
Cकाष्ठ कला
Dथेवा कला

8किशनगढ़ चित्रशैली के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: इसका उत्कर्ष 18वीं शताब्दी में सावंत सिंह के समय हुआ, जिन्हें नागरी दास भी कहा जाता है। कथन 2: निहालचंद इस शैली की आदर्शीकृत राधा-कृष्ण और बणी-ठणी छवि से निकट रूप से जुड़े हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Aकेवल कथन 1
Bकेवल कथन 2
Cकथन 1 और कथन 2 दोनों
Dन तो कथन 1, न कथन 2

9चित्र या शिल्प परंपरा का उसके सही स्थान या उपयोग से मिलान कीजिए। सूची 1: 1. फड़ 2. पिछवाई 3. मांडना 4. थेवा सूची 2: क. प्रतापगढ़ में रंगीन काँच पर सोने की कारीगरी ख. लोक देवताओं की कथात्मक पट्ट-चित्र परंपरा ग. नाथद्वारा-श्रीनाथजी से जुड़ा भक्ति-पृष्ठपट घ. घरों और पूजा-स्थलों में दीवार-फर्श सज्जा

A1-ख, 2-ग, 3-घ, 4-क
B1-ग, 2-ख, 3-घ, 4-क
C1-ख, 2-घ, 3-ग, 4-क
D1-क, 2-ग, 3-घ, 4-ख

10अभिकथन: प्रतापगढ़ थेवा शिल्प से जुड़ा है। कारण: थेवा में रंगीन काँच पर सोने की महीन कारीगरी की जाती है। सही उत्तर चुनिए।

Aअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
Bअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, लेकिन कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता।
Cअभिकथन सही है, लेकिन कारण गलत है।
Dअभिकथन गलत है, लेकिन कारण सही है।

1110 अप्रैल 1605 की चावंड रागमाला सीधे किस चित्रशैली से जुड़ी है?

Aकोटा शैली
Bमेवाड़ शैली
Cकिशनगढ़ शैली
Dबीकानेर शैली

12राजस्थान की किस चित्रकला शैली में महिलाओं को शिकारी के रूप में चित्रित किया गया है?

Aबीकानेर
Bजयपुर
Cकोटा
Dअलवर

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