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MCQ

बिजौलिया किसान आंदोलन MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए बिजौलिया किसान आंदोलन के 5 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1निम्नलिखित में से किस ठिकाने ने चंवरी कर लगाया था?

A कुचामन
B डीडवाना
C भैंसरोड़गढ़
D बिजौलिया
व्याख्या

चंवरी कर बिजौलिया ठिकाने से जुड़ा माना जाता है। बिजौलिया किसान आंदोलन में किसानों की मुख्य शिकायतों में ऐसे कई तरह के कर और लाग बाग शामिल थे, जिनसे उनका आर्थिक बोझ बढ़ता था। कुचामन और डीडवाना राजस्थान के महत्त्वपूर्ण स्थान हैं, लेकिन इस प्रश्न में पूछे गए चंवरी कर से उनका संबंध नहीं माना जाता। भैंसरोड़गढ़ भी एक ठिकाना था, पर इस कर की मानक पहचान उससे नहीं जुड़ती। इसलिए उत्तर बिजौलिया है।

प्र.2विजय सिंह पथिक ने बिजौलिया किसान आंदोलन का प्रचार पूरे भारत में किस समाचार पत्र के ज़रिए किया था?

A नवीन राजस्थान
B तरुण राजस्थान
C युगांतर
D प्रताप
व्याख्या

विजय सिंह पथिक ने बिजौलिया किसान आंदोलन को पूरे भारत में पहचान दिलाने के लिए प्रताप समाचार पत्र का सहारा लिया। प्रताप राष्ट्रीय चेतना वाली पत्रकारिता से जुड़ा था और किसान शिकायतों को व्यापक मंच देता था। नवीन राजस्थान और तरुण राजस्थान भी जनजागरण से जुड़े पत्र रहे, लेकिन इस प्रश्न में पथिक द्वारा बिजौलिया आंदोलन के अखिल भारतीय प्रचार का संदर्भ प्रताप से है। युगांतर बंगाल की क्रांतिकारी राष्ट्रवादी धारा से अधिक जुड़ा माना जाता है, बिजौलिया आंदोलन से नहीं।

प्र.3नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन 1: अप्रैल 1919 में उदयपुर राज्य सरकार ने बिजोलिया किसानों की शिकायतें सुनने के लिए मांडलगढ़ हाकिम बिंदुलाल भट्टाचार्य की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया। आयोग ने किसानों के हित में कई सिफारिशें कीं। कथन 2: भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का मानना था कि बिजोलिया किसान पंचायत के साथ जल्दी समझौता किया जाना चाहिए, अन्यथा राजपूताना में किसान आंदोलन हिंसक रूप ले सकता है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनिए।

A कथन 1 और कथन 2 दोनों सही हैं।
B कथन 1 और कथन 2 दोनों गलत हैं।
C कथन 1 सही है, लेकिन कथन 2 गलत है।
D कथन 1 गलत है, लेकिन कथन 2 सही है।
व्याख्या

दोनों कथन बिजोलिया किसान आंदोलन से जुड़ी घटनाओं को बताते हैं। अप्रैल 1919 में उदयपुर राज्य सरकार ने बिजोलिया किसानों की शिकायतें सुनने के लिए मांडलगढ़ हाकिम बिंदुलाल भट्टाचार्य की अध्यक्षता में आयोग बनाया था और आयोग ने किसानों के पक्ष में सिफारिशें दी थीं। दूसरा कथन भी उसी प्रशासनिक चिंता को दिखाता है कि बिजोलिया किसान पंचायत से जल्दी समझौता न हुआ तो राजपूताना में आंदोलन उग्र हो सकता था। इसलिए दोनों कथन सही माने जाते हैं; केवल एक कथन को सही या दोनों को गलत बताने वाले उत्तर ठीक नहीं बैठते।

प्र.4निम्नलिखित में से किस नेता ने बिजौलिया आंदोलन का नेतृत्व किया?

A विजय सिंह पथिक
B चूना राम पूनिया
C कंवर विजय पाल
D सुरेंद्र सिंह
व्याख्या

बिजौलिया किसान आंदोलन मेवाड़ क्षेत्र में किसानों पर लगान और सामंती दबावों के खिलाफ चला था। इस आंदोलन के प्रमुख नेतृत्व में विजय सिंह पथिक का नाम स्पष्ट रूप से जुड़ा है। चूना राम पूनिया को इस आंदोलन का मानक नेता नहीं माना जाता। कंवर विजय पाल भी बिजौलिया आंदोलन के स्थापित नेतृत्व से मेल नहीं खाते। सुरेंद्र सिंह का नाम भी इस किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में नहीं आता। इसलिए दिए गए नामों में सही उत्तर विजय सिंह पथिक है।

प्र.51903 में बिजौलिया के किसानों पर चंवरी कर किसने लगाया था?

A राव कृष्ण सिंह
B जागीरदार पृथ्वी
C साधु सीताराम दास
D महाराणा फतेह सिंह
व्याख्या

बिजौलिया किसान आंदोलन के संदर्भ में 1903 का चंवरी कर राव कृष्ण सिंह से जुड़ा है। वे बिजौलिया के जागीरदार थे और किसानों पर यह कर लगाया गया था, जो बाद में किसानों की नाराज़गी का बड़ा कारण बना। जागीरदार पृथ्वी को इस 1903 वाले करारोपण का मानक उत्तर नहीं माना जाता। साधु सीताराम दास आंदोलन से जुड़े संगठनकर्ता और नेता थे, कर लगाने वाले शासक नहीं। महाराणा फतेह सिंह मेवाड़ के शासक थे, लेकिन बिजौलिया में यह विशेष कर स्थानीय जागीरदार ने लगाया था।

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