MCQ
राजस्थान में जनजातीय, किसान एवं प्रजामंडल आंदोलन MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए राजस्थान में जनजातीय, किसान एवं प्रजामंडल आंदोलन के 21 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1रियासती राजस्थान की प्रजामंडल राजनीति के बारे में कौन-सा कथन गलत है? कथन 1: प्रजामंडलों ने नागरिक स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता, सभा की स्वतंत्रता, प्रतिनिधि संस्थाओं और उत्तरदायी शासन की मांग उठाई। कथन 2: रियासतों में प्रजामंडलों का मुख्य लक्ष्य निर्वाचित प्रांतीय सरकार थी, ठीक वैसे ही जैसे ब्रिटिश भारतीय प्रांतों में कांग्रेस राजनीति का था।
प्रजामंडल रियासतों में जनता के राजनीतिक संगठन थे। उनकी मांगों में नागरिक स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता, सभा की स्वतंत्रता, प्रतिनिधि संस्थाएं और उत्तरदायी शासन शामिल थे। मुख्य फर्क लक्ष्य का था। ब्रिटिश भारतीय प्रांतों में राजनीति औपनिवेशिक प्रांतीय सरकार से टकराती थी, जबकि रियासतों में प्रजामंडल कार्यकर्ताओं का सामना शासक, दरबार और राज्य प्रशासन से था। इसलिए निर्वाचित प्रांतीय सरकार को उनका मुख्य लक्ष्य बताना रियासती राजनीति की संरचना को गलत पढ़ना है।
प्र.2अभिकथन: 1938 में बना मेवाड़ प्रजामंडल महत्वपूर्ण उदाहरण है, क्योंकि मेवाड़ में बिजौलिया, बेगूं और जनजातीय-ग्रामीण आंदोलनों की पृष्ठभूमि पहले से थी। कारण: माणिक्य लाल वर्मा पुराने किसान संगठन को मेवाड़ में उत्तरदायी शासन की व्यापक मांग से जोड़ते हैं। सही उत्तर चुनिए।
मेवाड़ प्रजामंडल 1938 में बना और यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि मेवाड़ में बिजौलिया, बेगूं और जनजातीय-ग्रामीण आंदोलनों की पृष्ठभूमि पहले से थी। माणिक्य लाल वर्मा मुख्य कड़ी हैं: वे किसान आंदोलन में भी दिखते हैं और आगे मेवाड़ की सार्वजनिक राजनीति में भी। इसलिए कारण केवल अलग सही बात नहीं कहता, बल्कि बताता है कि पुराने ग्रामीण असंतोष ने उत्तरदायी शासन की मांग को कैसे बल दिया।
प्र.3कौन-सा युग्म मानगढ़ को प्रमुख जनजातीय शहादत-स्मृति स्थल बनाने वाली घटना को सही पहचानता है?
मानगढ़ को गोविंद गुरु के भगत आंदोलन से जोड़ा गया है। 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर भील-गरासिया अनुयायियों की बड़ी सभा पर ब्रिटिश और रियासती बलों ने गोली चलाई। इसी राज्य-दमन ने मानगढ़ को जनजातीय शहादत-स्मृति का बड़ा स्थल बनाया। गोविंदपुरा बेगूं किसान आंदोलन से जुड़ा है, बिजौलिया का 1941 समझौता किसान रियायतों से जुड़ा है, और जयपुर प्रजामंडल रियासती राजनीतिक संगठन का उदाहरण है।
प्र.4राजस्थान के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में, गोविन्द गुरु ने 1883 में भील समाज के बीच कौन-सा संगठन बनाया था?
गोविन्द गुरु, जिन्हें गोविन्द गिरी भी कहा गया है, को 1883 की सम्प सभा से जोड़ा गया है। यह काम बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र के भील समाज में हुआ और इसमें संयम, संगठन, सामाजिक सुधार तथा शोषण के विरोध को साथ रखा गया। एकी आंदोलन 1921 में मोतीलाल तेजावत से जुड़ता है, जबकि प्रजामंडल संगठन बाद की रियासती राजनीति से जुड़े हैं। इसलिए 1883 में गोविन्द गुरु से जुड़ा संगठन सम्प सभा है।
प्र.5CET पुनरावृत्ति के लिए, राजस्थान में जनजातीय और किसान असंतोष के साझा कारणों को कौन-सी श्रृंखला सबसे सही पकड़ती है?
कारणों के लिए परीक्षा-दृष्टि दिया जाता है: लगान-दबाव, बेगार, स्थानीय अधिकारियों का दमन, वन प्रतिबंध और प्रतिनिधि उपायों की कमी। किसानों पर जागीरदारी और ठिकानेदारी ढाँचे में लगान, अनेक लाग-बाग, बिना मजदूरी की बेगार और असुरक्षित काश्तकारी का बोझ था। जनजातीय समुदायों पर वन, चराई, आवाजाही और पारंपरिक आजीविका से जुड़े नियंत्रण थे, साथ में राज्य-समर्थित पुलिस व्यवस्था भी थी। आर्थिक बोझ और राजनीतिक बहिष्कार मिलकर सम्मान, अधिकार और प्रतिनिधित्व की व्यापक मांगों का आधार बने।
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और प्रश्न
6कथन 1: राजस्थान के जनजातीय आंदोलनों ने सामुदायिक सम्मान, वन-प्रवेश, राजस्व दबाव और राज्य-समर्थित कलंक के विरोध के मुद्दे उठाए। कथन 2: प्रजामंडल आंदोलनों ने बिखरी स्थानीय शिकायतों को अधिकार, प्रतिनिधित्व और उत्तरदायी शासन की राजनीतिक भाषा दी। निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
7राजस्थान में बिजोलिया, बेगूँ और शेखावाटी जैसे किसान आंदोलनों का व्यापक कारण कौन-सा कथन सबसे ठीक समझाता है?
8रियासती राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलन के बारे में कौन-सा कथन गलत है?
9कथन 1: बिजोलिया किसान आंदोलन 1897 में मेवाड़ के बिजोलिया ठिकाने में शुरू हुआ। कथन 2: 1916 के बाद विजय सिंह पथिक ने अवैध लाग-बाग को दर्ज करके और किसान शिकायतों को बाहर पहुंचाकर इसे संगठित दिशा दी। कथन 3: यह आंदोलन मुख्य रूप से एक छोटे विद्रोह के रूप में याद किया जाता है, जो 1923 में गोविंदपुरा गोलीकांड के बाद समाप्त हुआ। कौन-से कथन सही हैं?
10घटनाओं को सही तिथियों से मिलाइए। सूची I: 1. मानगढ़ पहाड़ी गोलीकांड 2. बिजोलिया किसान आंदोलन की शुरुआत 3. बेगूँ आंदोलन के दौरान गोविंदपुरा गोलीकांड सूची II: क. 1897 ख. 17 नवंबर 1913 ग. 13 जुलाई 1923
11अभिकथन और कारण पढ़िए। अभिकथन: किसान और जनजातीय संघर्षों ने नीचे से दबाव बनाया, जबकि प्रजामंडलों ने उसी दबाव को रियासतों के भीतर संगठित संवैधानिक राजनीति में बदला। कारण: प्रजामंडलों ने स्थानीय शिकायतों को नागरिक स्वतंत्रता, प्रतिनिधि संस्थाओं और उत्तरदायी शासन जैसी मांगों से जोड़ा।
12आंदोलनों को सबसे उपयुक्त पहचान-चिह्न से मिलाइए। सूची 1: 1. बिजौलिया 2. बेगूं 3. शेखावाटी 4. एकी सूची 2: क. भील, गरासिया और संबंधित समुदायों में एकता-आधारित लामबंदी ख. उत्तर-पूर्वी राजस्थान में जाट किसान संगठन ग. 1897 से 1941 तक चला मेवाड़ का लंबा किसान संघर्ष घ. 13 जुलाई 1923 का गोविंदपुरा गोलीकांड
13रियासती राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों के बारे में अभिकथन और कारण पढ़िए। अभिकथन (A): प्रजामंडलों ने रियासतों में नागरिक स्वतंत्रता, प्रतिनिधि संस्थाओं और उत्तरदायी शासन की मांग की। कारण (R): उन्होंने स्थानीय शिकायतों को अधिकार, प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक एकीकरण की राजनीतिक भाषा दी। सही उत्तर चुनिए।
14सूची I को सूची II से मिलाइए। सूची I: 1. बेगूँ किसान आंदोलन 2. शेखावाटी की किसान लामबंदी 3. गोविंदपुरा गोलीकांड 4. सीकर किसान सम्मेलन सूची II: a. सीकर-झुंझुनूं क्षेत्र और ठिकानेदारी शोषण b. 13 जुलाई 1923; रूपाजी और कृपाजी शहीद c. मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ जिले का बेगूँ ठिकाना d. 1934 में किसान संगठन का संकेत सही मिलान चुनिए।
15एकी आंदोलन के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: मोतीलाल तेजावत ने 1921 में दक्षिणी राजस्थान के भीलों और अन्य जनजातीय समूहों के बीच यह आंदोलन शुरू किया। कथन 2: यह आंदोलन गोविन्द गुरु ने 1883 में सम्प सभा के रूप में संगठित किया और मानगढ़ गोलीकांड के साथ समाप्त हुआ। इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
