MCQ
संस्कृत उपसर्ग और प्रत्यय MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए संस्कृत उपसर्ग और प्रत्यय के 10 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1कौन-सा युग्म प्रत्यय और उससे बनने वाले रूप को सही ढंग से मिलाता है?
क्त-कृत युग्म ही ठीक मिलाया गया है। कृत् प्रत्यय क्त कर्मवाच्य भूत कृदन्त बनाता है, इसलिए कृ + क्त = कृत, अर्थात किया हुआ। बाकी युग्म प्रत्यय को गलत परिणाम से जोड़ते हैं। तुमुन् से पठितुम् बनता है, पठित नहीं। शतृ वर्तमान कृदन्त बनाता है, जबकि कर्तव्य के लिए तव्यत् चाहिए। मतुप् तद्धित स्वामित्ववाची प्रत्यय है, पर कर्तृवाचक संज्ञा कर्तृ के लिए तृच् चाहिए। कौन-सा प्रत्यय कौन-सी कोटि देता है, यह पहचानने से मिलान का भ्रम दूर हो जाता है।
प्र.2शिक्षक धातु "कृ" से कर्तृवाचक संज्ञा "करने वाला" बनवाना चाहता है। कौन-सी व्युत्पत्ति शुद्ध है?
कृ + ण्वुल् = कारक व्युत्पत्ति सही है। धातु से “करने वाले” का नाम बनाना हो तो संस्कृत में कृत् कर्तृवाचक प्रत्यय ण्वुल्, जिससे -अक बनता है, या तृच्, जिससे -तृ बनता है, लगाए जाते हैं। इसलिए कृ + ण्वुल् से कारक, अर्थात् करने वाला, बनता है; कृ + तृच् से कर्तृ भी बन सकता है। बाकी रूप असली हैं, पर उनकी कोटि अलग है। अनीयर् से कर्तव्य-अर्थक करणीय, क्त से कर्मवाच्य भूत कृदन्त कृत और त्व से तद्धित भाववाचक संज्ञा बनती है। इनमें कोई भी क्रिया करने वाले व्यक्ति का नाम नहीं बताता; यही इस प्रश्न का सूक्ष्म कोटि-भेद है।
प्र.3कौन-सा शब्द कृत् प्रत्यय से नहीं, तद्धित प्रत्यय से बना है?
धनवत् शब्द तद्धित-निर्माण है। निर्णायक जाँच मूल है: कृत् प्रत्यय धातु से और तद्धित प्रत्यय प्रातिपदिक (संज्ञा-मूल) से जुड़ता है। धनवत् संज्ञा धन और स्वामित्ववाची मतुप् से बना है, अतः तद्धित। गत (गम् + क्त), कर्तुम् (कृ + तुमुन्) और पठित्वा (पठ् + क्त्वा) सभी धातुओं से कृत् प्रत्यय द्वारा बने हैं। केवल अंत देखना कृत्-तद्धित भ्रम का फंदा है; मूल देखना उसे सुलझा देता है।
प्र.4स्त्री-प्रत्यय द्वारा कौन-सी व्युत्पत्ति शुद्ध है?
अज + टाप् = अजा व्युत्पत्ति सही है। स्त्रीलिंग बनाने वाले दोनों प्रत्यय तय स्वर जोड़ते हैं: टाप् दीर्घ आ जोड़ता है (अज से अजा) और ङीप् दीर्घ ई जोड़ता है (गौर से गौरी)। अज + टाप् = अजी में टाप् के साथ गलत दीर्घ ई लगा दिया गया है और गौर + ङीप् = गौरा में ङीप् के साथ गलत दीर्घ आ लगा दिया गया है — ये दोनों मानक टाप्-ङीप् अदला-बदली वाले भ्रम हैं। गौर + ङीप् = गौर में मूल शब्द को अछूता छोड़ दिया गया है, इसलिए प्रत्यय का कोई प्रभाव नहीं दिखता। केवल अजा में सही प्रत्यय सही स्वर से जुड़ता है।
प्र.5मूल "लघु" (छोटा) से "लघुता" के अर्थ वाली भाववाचक संज्ञा बनाने वाले दो तद्धित प्रत्यय कौन-से हैं?
त्व और तल् युग्म सही है। दोनों भाववाचक तद्धित प्रत्यय विशेषण-प्रातिपदिक से जुड़कर उसी गुण को व्यक्त करते हैं। इसलिए लघु से लघुत्व और लघुता बनते हैं; दोनों का अर्थ ‘छोटापन’ है। मतुप्-इन् युग्म स्वामित्व या ‘वाला’ अर्थ देता है। क्त-क्तवतु धातुओं से भूतकालिक कृदन्त बनाते हैं, जबकि टाप्-ङीप् स्त्री-प्रत्यय हैं। ये सभी वास्तविक प्रत्यय-समूह हैं, पर भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं; यही प्रश्न में श्रेणी बदलकर दिया गया भ्रम है।
आपने 10 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं
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और प्रश्न
6धातु "हृ" का अर्थ "लेना या ले जाना" है। कौन-सा उपसर्ग-युक्त रूप "प्रहार करना" अर्थ देता है?
7शास्त्रीय संस्कृत व्याकरण में कितने उपसर्ग गिने जाते हैं?
8कथन I: उत् + स्था से उत्था "उठना" बनता है। कथन II: प्र + स्था से प्रस्था "प्रस्थान करना" बनता है। कौन-सा सही है?
9आ + कृ से कौन-सा पूर्वकालिक रूप सही बनता है?
10अभिकथन (A): शिक्षक द्वारा "आगतः" को आ + गम् + क्त में बाँटकर दिखाना एक अवलंबन है। कारण (R): वायगोत्स्की का निकटस्थ विकास-क्षेत्र मानता है कि निर्देशित सहायता स्वतंत्र रूप से करने से पहले आती है। सही विकल्प चुनिए।
