MCQ
संस्कृत अलंकार और छंद MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए संस्कृत अलंकार और छंद के 10 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1शास्त्रीय गण-योजना में किस गण का लघु-गुरु क्रम गुरु-गुरु-गुरु है?
आठ-गण योजना में हर गण लघु-गुरु का निश्चित त्रिक है: म-गण गुरु-गुरु-गुरु है, तीन भारी अक्षरों वाला एकमात्र समूह। य-गण लघु-गुरु-गुरु, न-गण लघु-लघु-लघु (म का उल्टा) और त-गण गुरु-गुरु-लघु है। सूत्र "यमाताराजभानसलगम्" को अतिव्यापी त्रिक में पढ़ने से हर क्रम निकल आता है, अतः करण म-गण को सूत्र का दूसरा त्रिक पढ़कर निकाल सकता है, रटे बिना।
प्र.2अभिकथन (A): "मुखचन्द्रः" अर्थात् मुख-चन्द्र रूपक है। कारण (R): रूपक में उपमान को उपमेय पर आरोपित कर वाचक छोड़ दिया जाता है।
दोनों कथन सत्य हैं और कारण अभिकथन को समझाता है। रूपक रूपकालंकार है: उपमान ("चन्द्र") को उपमेय ("मुख") पर आरोपित कर एकरूप किया जाता है, और निर्णायक रूप से "इव/यथा" वाचक छोड़ दिया जाता है। "मुखचन्द्रः" समास ठीक यही करता है, अतः A सत्य; और R वही लुप्त-वाचक आरोप-विधि बताता है जो इसे उपमा नहीं रूपक बनाती है, अतः R, A को सही समझाता है। आशा, जो रूपक-उपमा भ्रमित करती है, लुप्त वाचक की जाँच करे: आरोप के साथ उसका अभाव ही रूपक की पहचान है।
प्र.3एक पूर्ण अनुष्टुप् (श्लोक) में कितने अक्षर होते हैं और वे कैसे बँटे होते हैं?
अनुष्टुप् यानी सामान्य श्लोक में बत्तीस अक्षर होते हैं: चार पाद, प्रत्येक में आठ-आठ अक्षर। इसके सामान्य नियम में प्रायः हर पाद का पाँचवाँ अक्षर लघु और छठा गुरु माना जाता है। बाकी विकल्प अन्य पाठ्य छंदों की अक्षर-संख्या बताते हैं: इन्द्रवज्रा या उपेन्द्रवज्रा में प्रति पाद ग्यारह, वसन्ततिलका में चौदह और मन्दाक्रान्ता में सत्रह अक्षर होते हैं। जोसेफ छंद सुनाता है लेकिन गिनती में चूकता है; उसे अनुष्टुप् को आठ-अक्षर-प्रति-पाद आधार मानना चाहिए, जिससे लंबे वृत्तों की पहचान की जाती है।
प्र.4ह्रस्व स्वर "अ" सामान्यतः लघु होता है। छंद-गणना में वह अक्षर किस स्थिति में गुरु हो जाता है?
ह्रस्व स्वर वाला अक्षर सामान्यतः लघु माना जाता है। पर उसके बाद संयुक्ताक्षर, अनुस्वार या विसर्ग हो तो वह गुरु गिना जाता है। स्वर स्वयं दीर्घ हो, या अक्षर पंक्ति के अंत में आए, तब भी वह वैकल्पिक रूप से गुरु हो सकता है। पाद के आरम्भ की स्थिति, कहीं और स्वर की पुनरावृत्ति तथा वैदिक स्वर-चिह्न यहाँ मात्रा तय नहीं करते। इसी नियम की उपेक्षा से अभ्यर्थी इन्द्रवज्रा की गणना गलत कर बैठते हैं। इमरान को योग करने से पहले हर ह्रस्व-स्वर अक्षर के बाद आने वाले संयुक्ताक्षर की जाँच करनी चाहिए।
प्र.5एक पंक्ति वीर की तलवार को इतना लम्बा बताती है कि उसकी नोक आकाश छूती है, उपमान स्वाभाविक सीमा से परे उपमेय को पूरी तरह लीन कर लेता है। यह कौन-सा अर्थालंकार है?
अतिशयोक्ति अत्युक्ति है: वर्णन स्वाभाविक सीमा से इतना बढ़ जाता है कि उपमान उपमेय को पूरी तरह लीन कर लेता है, जैसे तलवार जिसकी नोक आकाश छूती है। दृष्टान्त सामान्य कथन को समानान्तर उदाहरण के साथ दो स्वतन्त्र वाक्यों में रखता, उपमा वाचक सहित संतुलित सादृश्य रखती, और श्लेष एक रचना में दो अर्थ भरता। आशा स्वाभाविक सीमा के उल्लंघन को अतिशयोक्ति का निर्णायक संकेत माने, जो दृष्टान्त की शान्त समानान्तरता से भिन्न है।
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और प्रश्न
6दो कथनों पर विचार कीजिए। (1) मात्रिक छंद पाद की कुल मात्रा गिनकर चलता है। (2) वर्णिक छंद अक्षर-संख्या और उनका लघु-गुरु क्रम दोनों निश्चित करता है। क्या सही है?
7छंदों की सूची: I इन्द्रवज्रा, II वसन्ततिलका, III मन्दाक्रान्ता। गण-क्रमों की सूची: 1 त-त-ज-ग-ग, 2 त-भ-ज-ज-ग-ग, 3 म-भ-न-त-त-ग-ग। प्रत्येक छंद को उसके सही गण-क्रम से मिलाएँ।
8"मुखं चन्द्रः इव सुन्दरम्" में "इव", उपमेय, उपमान और साधारण-धर्म चारों हैं। यह कौन-सा अलंकार है?
9एक श्लोक में "भूयो भूयो" अक्षर-समूह दोहराया गया है और हर बार अर्थ अलग है। यह कौन-सा शब्दालंकार है?
10एक श्लोक कहता है कि अँधेरी रात मानो (मन्ये) काले वस्त्र वाली नारी है। यहाँ संभावना-शब्द "मन्ये" किस अर्थालंकार का संकेत है?
