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संस्कृत में आकलन एवं उपचारात्मक शिक्षण MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए संस्कृत में आकलन एवं उपचारात्मक शिक्षण के 10 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1जब सीता संस्कृत इकाई-परीक्षा बनाती है तो प्रश्न-पत्र रूपरेखा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A प्रश्न-पत्र लंबा करना ताकि अधिक प्रश्न आएँ
B हर प्रश्न को अधिगम उद्देश्य और कौशल से निर्धारित अंकों सहित जोड़ना
C सभी प्रश्न केवल स्मृति-स्तर पर रखना
D परीक्षा होने से पहले ही बच्चों को क्रमबद्ध करना
व्याख्या

सही विकल्प B है क्योंकि टायलर के उद्देश्य-आधारित मॉडल पर बनी प्रश्न-पत्र रूपरेखा हर प्रश्न को घोषित अधिगम-उद्देश्य, कौशल और नियत अंकों से जोड़ती है। इससे पाठ्यवस्तु का दायरा और भार संतुलित रहता है। A प्रश्नों की लंबाई को योजना समझ लेता है; C सभी प्रश्न स्मृति-स्तर पर रखकर ब्लूम के ऊंचे स्तरों की जांच कम करता है; D परीक्षा से पहले क्रमांकन की बात कहता है, जो रूपरेखा कभी नहीं करती। केवल B रूपरेखा का परिभाषक उद्देश्य-से-प्रश्न संबंध बताता है।

प्र.2प्रत्येक सिद्धांतकार का मिलान उस संकल्पना से कीजिए जिसे संस्कृत शिक्षक मूल्यांकन में लागू करता है।

A ब्लूम–वर्गीकरण; वायगोत्स्की–निकटस्थ विकास क्षेत्र; कृशेन–भावात्मक छन्नी; टायलर–उद्देश्य मॉडल
B ब्लूम–निकटस्थ विकास क्षेत्र; वायगोत्स्की–वर्गीकरण; कृशेन–उद्देश्य मॉडल; टायलर–भावात्मक छन्नी
C ब्लूम–भावात्मक छन्नी; वायगोत्स्की–उद्देश्य मॉडल; कृशेन–वर्गीकरण; टायलर–निकटस्थ विकास क्षेत्र
D ब्लूम–उद्देश्य मॉडल; वायगोत्स्की–भावात्मक छन्नी; कृशेन–निकटस्थ विकास क्षेत्र; टायलर–वर्गीकरण
व्याख्या

सही विकल्प A है क्योंकि मानक मिलान ये हैं: ब्लूम का छह-स्तरीय संज्ञानात्मक वर्गीकरण, वायगोत्स्की का निकटस्थ विकास क्षेत्र, कृशेन की भावात्मक छन्नी, और टायलर का उद्देश्य-प्रतिमान। B, C, D इन्हें उलट-पुलट कर देते हैं — इस विषय का सबसे सामान्य REET फंदा यही है — जिससे संकल्पना याद होने पर भी सिद्धांतकार याद न रखने वाला अभ्यर्थी गलत पंक्ति की ओर खिंच जाता है। केवल A हर सिद्धांतकार को सही संकल्पना से जोड़ता है।

प्र.3सीता श्लोक का श्रुतलेख कराती है और परिणाम के आधार पर अगले दिन फिर से पढ़ाने की योजना बनाती है। उद्देश्य की दृष्टि से यह आकलन है:

A योगात्मक, क्योंकि यह लिखित परीक्षा है
B रचनात्मक, क्योंकि परिणाम अगले पाठ को दिशा देता है
C निदानात्मक, क्योंकि यह अंतिम श्रेणी देता है
D कोई नहीं, क्योंकि श्रुतलेख का मूल्यांकन नहीं हो सकता
व्याख्या

सही विकल्प B है क्योंकि कोई आकलन रचनात्मक है या योगात्मक, यह उसके उद्देश्य और समय से तय होता है, उसके प्रारूप से नहीं। सीता श्रुतलेख के परिणाम देखकर सीखने की प्रक्रिया के बीच में ही फिर से पढ़ाने की योजना बनाती है, और यही रचनात्मक आकलन की पहचान है। विकल्प A इसे प्रारूप के आधार पर तय करता है; विकल्प C अंतिम श्रेणी यानी उपलब्धि को निदान समझ बैठता है; और विकल्प D यह गलत कहता है कि श्रुतलेख के अंक नहीं दिए जा सकते। इसलिए केवल B उद्देश्य के आधार पर सही अंतर करता है।

प्र.4राजस्थान बोर्ड संस्कृत (ऐच्छिक) पाठ्यक्रम इस विषय के लिए तीन मूल्यांकन उपकरण बताता है। सही समूह कौन-सा है?

A मौखिक, लिखित, निदानात्मक
B मौखिक, लिखित, क्रमांकन
C लिखित, परियोजना, उपस्थिति
D मौखिक, निदानात्मक, केवल सत्रांत
व्याख्या

सही विकल्प A है क्योंकि राजस्थान बोर्ड संस्कृत (ऐच्छिक) संकेत मौखिक, लिखित और निदानात्मक उपकरणों को ठीक-ठीक बताता है। B निदानात्मक को क्रमांकन से बदलकर त्रुटि-खोज वाले उद्देश्य को उलट देता है; C नामित मौखिक और निदानात्मक उपकरण छोड़ता है; D 'केवल-सत्रांत' सीमा जोड़ता है जो संकेत में है ही नहीं। केवल A तीनों उपकरण ज्यों-के-त्यों दोहराता है।

प्र.5मोहन श्लोक सुनाता है, एक स्वर गलत बोलता है, फिर शिक्षक के एक संकेत पर स्वयं सुधार लेता है। सहारे को लेकर सजग चेकलिस्ट में शिक्षक इसे कैसे अंकित करे?

A शून्य, क्योंकि पहली बार की कोई त्रुटि पूर्ण विफलता है
B पूर्ण अंक, आरंभिक स्वर-त्रुटि को पूरी तरह अनदेखा करके
C केवल उपस्थिति अंकित करना, क्योंकि वाचन का वस्तुनिष्ठ अंकन नहीं हो सकता
D मध्य-श्रेणी के अंक, संकेत मिलने पर स्वयं सुधार करने को श्रेय देते हुए
व्याख्या

सही विकल्प D है, क्योंकि वायगोत्स्की के निकटस्थ विकास क्षेत्र और सहारा-आधारित मूल्यांकन में उस काम को श्रेय दिया जाता है जो बच्चा न्यूनतम निर्देशित सहायता से कर सके। मोहन ने एक संकेत मिलने पर स्वर स्वयं सुधार लिया, इसलिए प्रारंभिक चूक और सहायता से हुए सुधार, दोनों को दर्ज करने वाला मध्यम अंक सही है। A में या तो पूरा या शून्य अंक देने की कठोर पद्धति है; B त्रुटि को अनदेखा करके उच्चारण-मानदंड खो देता है; C वाचन को अंक देने योग्य न मानकर गलत कहता है। केवल D मूल्यांकन-सूची और सहारा-आधारित सिद्धांत को साथ रखता है।

आपने 10 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समग्र प्रगति-पत्र के अंतर्गत सीता रवि की संस्कृत प्रगति कैसे दर्ज करे?

Aकेवल कक्षा में स्थान, जैसे 'रवि: 40 में 18वाँ'
Bकेवल सत्र के लिए उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण चिह्न
Cयोग्यता-वार विवरण, जैसे 'शब्द-रूप विश्वसनीय रूप से पहचानता है; कारक असमान रूप से लगाता है — उपचार जारी'
Dसभी विषयों का औसत निकालकर संस्कृत की एक ही श्रेणी में मिला देना

7निदानात्मक परीक्षण से पता चलता है कि रवि बार-बार वहाँ चतुर्थी लिखता है जहाँ द्वितीया विभक्ति चाहिए। शिक्षक का अगला कदम क्या होना चाहिए?

Aकम श्रेणी देकर आगे बढ़ जाना
Bवही सत्रांत प्रश्न-पत्र बिना बदले दोहराना
Cकारक पर केंद्रित छोटा उपचारात्मक अभ्यास कराकर फिर पुनर्परीक्षण करना
Dरवि को पूरी शब्द-रूप तालिका फिर रटने को कहना

8कौन-सा कथन सबसे ठीक बताता है कि संस्कृत कक्षा में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन को 'व्यापक' क्या बनाता है?

Aयह अधिक बार लिखित परीक्षाएँ कराता है
Bयह हर माह केवल व्याकरण के अंक दर्ज करता है
Cयह मौखिक वाचन को आकलन से हटा देता है
Dइसमें शैक्षिक और सह-शैक्षिक प्रगति, अभिवृत्ति और सहभागिता शामिल हैं

9दो कथन देखें। (I) उपलब्धि परीक्षण मापता है कि बच्चे ने उद्देश्य कितना पाया। (II) निदानात्मक परीक्षण बच्चों को प्रथम से अंतिम तक क्रमबद्ध करता है। कौन-सा/से सही है/हैं?

AI और II दोनों सही हैं
Bकेवल I सही है
Cकेवल II सही है
Dन तो कथन 1 सही है और न ही कथन 2।

10अभिकथन (A): कम भय पैदा करने वाली मौखिक वाचन-जाँच बच्चे के संस्कृत बोलने के कौशल की सही तस्वीर देती है। कारण (R): बहुत चिंता पैदा करने वाली परीक्षा भावात्मक छन्नी को ऊँचा कर देती है और वास्तविक क्षमता छिपा देती है। सही विकल्प चुनें।

AA और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है
BA और R दोनों सत्य हैं, पर R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है
CA सत्य है पर R असत्य है
DA असत्य है पर R सत्य है

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