MCQ
संस्कृत गद्यांश और पद्यांश MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए संस्कृत गद्यांश और पद्यांश के 10 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1प्रत्येक कार्य को उसके सही वर्णन से मिलाइए। 1. अन्वय 2. शीर्षक। सही क्रम चुनिए।
“पद्य को गद्य-क्रम में पुनः रचना; केंद्रीय भाव बताने वाला शीर्षक” वाला युग्म सही है। अन्वय में पद्य को छंद-क्रम से हटाकर स्वाभाविक गद्य-क्रम में रखा जाता है। सही शीर्षक अंश के केंद्रीय विचार को नाम देता है, किसी आकर्षक लेकिन गौण विवरण को नहीं। “संधि-पद अलग करना; एकपद उत्तर” पदच्छेद और एकपदेन से जुड़ा है। “पद्य की सीख; सजीव विवरण का शीर्षक” भावार्थ को गलत शीर्षक वाले फंदे से मिला देता है, जबकि अंतिम युग्म शीर्षक को एकपद उत्तर से गलत जोड़ता है।
प्र.2अपठित संस्कृत गद्यांश में किसी प्रश्न का उत्तर देने से पूर्व अभ्यर्थी को सबसे पहले कौन-सा एक कार्य करना चाहिए?
पूरा अंश पहले एक बार भावग्रहण के लिए पढ़ना सही है। इसी पाठ से पदच्छेद, अन्वय और कारक-निर्धारण से पहले विषय तथा भाव-स्वर स्पष्ट हो जाते हैं। प्रत्येक पद को छपे क्रम में अनुवाद करना शाब्दिक-पद जाल है। मिलते-जुलते अंश की स्मृति से लिखना अपठित कौशल-कार्य को स्मरण-आधारित उत्तर से मिला देता है। पढ़ने से पहले शीर्षक चुनना भी क्रम उलटता है, क्योंकि उचित शीर्षक केंद्रीय भाव समझने के बाद ही चुना जा सकता है।
प्र.3कथन पढ़िए। पहला कथन है कि अन्वय मुख्यतः पद्य में आवश्यक होता है, क्योंकि पद्य का शब्द-क्रम अर्थ से नहीं, छन्द से तय होता है। दूसरा कथन है कि सन्धि उपस्थित होने पर पदच्छेद अनावश्यक हो जाता है। इनमें कौन-सा सही है?
केवल पहला कथन सही है। पद्य का शब्द-क्रम छन्द के अनुसार होता है, अर्थ के अनुसार नहीं, अतः अर्थ पाने के लिए अन्वय आवश्यक है। दूसरा कथन गलत है क्योंकि सन्धि पदों को जोड़ देती है, जिससे पदच्छेद अधिक आवश्यक होता है, अनावश्यक नहीं। दोनों कथन मानने पर सन्धि वाला गलत दावा भी मानना पड़ेगा; केवल दूसरा मानना विधि को उलट देता है, और दोनों को नकारना सही अन्वय-वर्णन छोड़कर अति-सुधार करता है।
प्र.4अंश: "सिंहः वने अवसत्।" प्रश्न है "सिंहः कुत्र अवसत्?"। कौन-सा पूर्ण-वाक्य उत्तर सही है?
पूर्ण वाक्य सिंहः वने अवसत् सही है क्योंकि "कुत्र" प्रश्न अधिकरण माँगता है, जो सप्तमी "वने" में, प्रथमा कर्ता "सिंहः" सहित पूर्ण वाक्य में दिया जाता है। सिंहः वनम् अवसत् उत्तर द्वितीया "वनम्" लेता है, सिंहस्य वने अवसत् उत्तर कर्ता को सम्बन्ध बना देता है, और केवल "वने" पूर्ण वाक्य की माँग पर एक पद देता है।
प्र.5किसी अपठित अंश में अभ्यर्थी को "सूर्योदये" का पदच्छेद करना है। कौन-सा विच्छेद सही है?
विच्छेद सूर्य + उदये सही है क्योंकि "सूर्योदये" "सूर्य" (अकारान्त) और "उदये" (उदय की सप्तमी) की गुण सन्धि से बनता है, जहाँ अ + उ से ओ बनता है। सूर्यो + दये में शब्द गलत जगह टूटता है और निरर्थक "दये" बचता है, सूर्य + आउदये में ऐसा दीर्घ स्वर मान लिया गया है जो है ही नहीं, और सूर्य + उदयः में विभक्ति प्रथमा हो जाती है, जिससे "उदये" का सप्तमी रूप टूट जाता है।
आपने 10 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं
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और प्रश्न
6अपठित पद्य के उत्तर से जुड़े कथन पढ़िए। पहला: नीति-श्लोक का भावार्थ उसकी सीख बताए, केवल घटना न दोहराए। दूसरा: कर्तृ सबसे अच्छा तब मिलता है जब पहले तिङन्त क्रिया खोजी जाए। कौन-सा सही है?
7अभिकथन: "उद्यमेन" श्लोक का उचित शीर्षक "उद्यम का महत्त्व" है, "सिंह" नहीं। कारण: शीर्षक अंश का केन्द्रीय भाव बताए, जबकि सिंह केवल दृष्टान्त है।
8कक्षा 7 पढ़ाते समय अपठित अर्थबोध के लिए कौन-सा क्रम-निर्णय उत्तम भाषा-अर्जन व्यवहार के अनुरूप है?
9किसी गद्यांश में सप्तमी-पद का अर्थ पूछने वाले बहुविकल्पीय प्रश्न में सबसे प्रभावी भ्रामक विकल्प कैसा होना चाहिए?
10श्लोक: "उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।" प्रश्न "कार्याणि केन सिध्यन्ति?" का कौन-सा उत्तर सही है?
