Q1. राजस्थानी भाषा में पद्य रूप में उपलब्ध संतों के जीवन-वृत्त को _______________ कहा जाता है।
Explanation
राजस्थानी साहित्य में परची संतों के जीवन, उपदेश और भक्तिपरक प्रभाव का पद्य रूप में लिखा गया संक्षिप्त जीवन-वृत्त मानी जाती है। प्रश्न में भी संतों के जीवन-इतिहास के उसी पद्यात्मक रूप की बात है, इसलिए परची सही पद है। वात सामान्य कथा या प्रसंग के अर्थ में आता है, संत-जीवन की खास पद्य जीवनी नहीं। वचनिका कथन या गद्यनुमा प्रस्तुति से जुड़ी है, और दवावैत अलग साहित्यिक रूप है; इसलिए ये दिए गए संकेत से मेल नहीं खाते।
