MCQ
सामाजिक-धार्मिक सुधार एवं राष्ट्रवाद का उदय (1858-1919) MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए सामाजिक-धार्मिक सुधार एवं राष्ट्रवाद का उदय (1858-1919) के 30 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1सुधार आंदोलनों की स्रोत-समालोचनात्मक तुलना में कौन-सा कथन आर्य समाज की शुद्धि और ब्रह्मो समाज के सुधार को सबसे सही ढंग से अलग करता है?
सावधान तुलना में तिथि, नेतृत्व और सुधार की भाषा अलग रखनी पड़ती है. ब्रह्मो समाज 1828 में राजा राममोहन राय से और सती-विरोधी सुधार से जुड़ता है, जबकि आर्य समाज 1875 में दयानंद सरस्वती से तथा वेदों की ओर लौटने और शुद्धि की धारा से जुड़ता है; सूरत, अलीगढ़ और होम रूल अलग प्रसंग हैं.
प्र.21885 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहल और प्रथम अधिवेशन से जुड़ा कौन-सा कथन सही है?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में ए. ओ. ह्यूम की पहल से हुई थी। उसका प्रथम अधिवेशन बंबई में डब्ल्यू. सी. बनर्जी की अध्यक्षता में हुआ; दूसरे विकल्प बाद के उदारवादी, उग्रवादी, सूरत-विभाजन या होम रूल प्रसंगों को स्थापना से मिला देते हैं।
प्र.31916 की होम रूल लीगों से जुड़ी मांग का सबसे सटीक वर्णन कौन-सा है?
1916 की होम रूल लीगें तिलक और एनी बेसेंट से जुड़ी थीं और उनका लक्ष्य साम्राज्य के भीतर स्वशासन की मांग को संगठित करना था। अन्य विकल्प 1909 के पृथक निर्वाचक मंडल, 1905 के बंगाल विभाजन के बाद स्वदेशी-बहिष्कार और आर्य समाज की शुद्धि धारा से संबंधित हैं।
प्र.4कथन: दादाभाई नौरोजी के धन का अपवाह सिद्धांत ने आरंभिक राष्ट्रवादी आलोचना को मजबूत आर्थिक आधार दिया. कारण: पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया में नौरोजी ने तर्क दिया कि ब्रिटिश शासन भारत के संसाधनों का अपवाह कर रहा था.
नौरोजी का धन का अपवाह सिद्धांत इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि उसने राष्ट्रवादी आलोचना को आर्थिक शोषण के तर्क में बदला. पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया इसी तर्क से जुड़ा ग्रंथ है; केवल संवैधानिक या धार्मिक-सुधार की दृष्टि से इसे समझना अधूरा रहेगा.
प्र.5कौन-सा युग्म दयानंद सरस्वती के सुधार कार्यक्रम को ठीक बताता है, किसी अन्य 19वीं सदी के सुधार आंदोलन को नहीं?
दयानंद सरस्वती के आर्य समाज ने वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया और शुद्धि पुनर्प्रवेश आंदोलन चलाया। ब्रह्म समाज, रामकृष्ण मिशन और अलीगढ़ सुधार क्रमशः राजा राम मोहन राय, विवेकानंद और सर सैयद अहमद खान से जुड़े हैं।
आपने 30 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं
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और प्रश्न
61905 में बंगाल में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के तेज़ विस्तार का सबसे सीधा कारण कौन-सी घटना थी?
7निम्न घटनाओं को सही कालक्रम में रखिए: 1. बंगाल विभाजन 2. मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल लागू करने वाले मॉर्ले-मिंटो सुधार 3. गदर पार्टी 4. होम रूल लीगें
81905 के बंगाल विभाजन के बाद स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में उसकी मुख्य आर्थिक पद्धति को कौन-सा कथन सबसे ठीक बताता है?
9अभिकथन: कर्जन के 1905 के बंगाल विभाजन ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को जन्म दिया। कारण: भारतीय राष्ट्रवादियों ने इस विभाजन को बंगाल को बांटने और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध विरोध को तीखा करने वाली राजनीतिक कार्रवाई माना। सही उत्तर चुनिए।
10उन्नीसवीं सदी के भारतीय सुधार-इतिहास में ब्रह्म समाज की सही पहचान कौन-सी है?
11आरंभिक उदारवादी चरण से जुड़े नेता को उसके प्रमुख ग्रंथ या पद्धति से मिलाइए: 1. दादाभाई नौरोजी 2. गोपाल कृष्ण गोखले 3. फिरोजशाह मेहता। सही समूह चुनिए।
12स्वामी विवेकानंद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उन्होंने रामकृष्ण की शिक्षाओं का प्रसार किया। 2. उन्होंने 1893 में शिकागो के धर्म संसद को संबोधित किया। कौन-सा कथन सही है?
13सामाजिक-धार्मिक सुधार से उग्र राष्ट्रवाद तक इन घटनाओं का सही कालक्रम कौन-सा है?
14गांधी के उभार से पहले जन-राजनीति की पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत है?
15आरंभिक उदारवादी नेता या ग्रंथ को उसके ऐतिहासिक रूप से सही संबंध से मिलाइए. 1. दादाभाई नौरोजी 2. गोपाल कृष्ण गोखले 3. फिरोजशाह मेहता 4. पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया अ. धन का अपवाह सिद्धांत ब. उदारवादी संवैधानिक राजनीति स. आरंभिक उदारवादी नेतृत्व द. ब्रिटिश शासन की आर्थिक आलोचना
