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आरंभिक मध्यकालीन भारत: राजपूत राज्य एवं दक्षिण भारतीय राजवंश MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए आरंभिक मध्यकालीन भारत: राजपूत राज्य एवं दक्षिण भारतीय राजवंश के 30 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1लगभग 753 ईस्वी में दक्कन में दंतिदुर्ग के उदय से कौन-सा राजनीतिक परिवर्तन सबसे निकटता से जुड़ा है?

A बंगाल में पालों के स्थान पर सेन राजवंश का आना
B आरंभिक राष्ट्रकूटों द्वारा बादामी चालुक्य शक्ति का अपदस्थ होना
C तराइन में पृथ्वीराज चौहान तृतीय की पराजय
D श्रीविजय के विरुद्ध चोल नौसैनिक अभियान
व्याख्या

दंतिदुर्ग आरंभिक राष्ट्रकूट उभार के शासक हैं; लगभग 753 ईस्वी में बादामी चालुक्य सत्ता के क्षय के बाद दक्कन में राष्ट्रकूट शक्ति उभरी. पाल-सेन बंगाल, तराइन का संघर्ष और राजेंद्र प्रथम का श्रीविजय अभियान अलग ऐतिहासिक संदर्भ हैं.

प्र.28वीं-10वीं शताब्दी में कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष को कौन-सा संयोजन सबसे सही रूप में दर्शाता है?

A चोल, पल्लव और पांड्य
B मिहिर भोज के अधीन गुर्जर-प्रतिहार, बंगाल के पाल और दक्कन के राष्ट्रकूट
C केवल चाहमान, परमार और चालुक्य
D बंगाल के सेन, बुंदेलखंड के चंदेल और गुजरात के सोलंकी
व्याख्या

कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष में गुर्जर-प्रतिहार, जिनमें मिहिर भोज प्रमुख थे, बंगाल के पाल और दक्कन के राष्ट्रकूट शामिल थे। अन्य विकल्प दक्षिण भारतीय राजवंशों या अलग क्षेत्रीय शक्तियों को इस संघर्ष में रख देते हैं।

प्र.3मध्यकालीन चारण परंपरा की अग्निकुल कथा के अनुसार, माउंट आबू के अग्नि-यज्ञ से जुड़े चार राजपूत कुलों का सही समूह कौन-सा है?

A प्रतिहार, चाहमान, परमार और चालुक्य
B प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट और चोल
C चंदेल, सेन, पाल और परमार
D चाहमान, गहड़वाल, कलचुरी और चालुक्य
व्याख्या

अग्निकुल की चारण परंपरा प्रतिहार, चाहमान या चौहान, परमार और चालुक्य या सोलंकी को माउंट आबू के अग्नि-यज्ञ से जोड़ती है. पाल, राष्ट्रकूट, चोल, सेन, गहड़वाल और कलचुरी अलग राजनीतिक संदर्भों के राजवंश हैं, इस कथा के चार कुल नहीं.

प्र.4दक्कन और दक्षिण भारतीय राजवंशों के अभिलेखीय प्रमाणों के बारे में इन कथनों पर विचार कीजिए: 1. रविकीर्ति का ऐहोल अभिलेख बादामी चालुक्य पुलकेशिन द्वितीय की प्रशंसा करता है। 2. उत्तरमेरुर अभिलेख चोल ग्राम समितियों के निर्वाचन नियम बताते हैं। 3. अग्निकुल परंपरा मंदिर प्रशासन से जुड़ा चोल अभिलेख है। कौन-से कथन सही हैं?

A केवल 1
B केवल 2 और 3
C केवल 1 और 2
D 1, 2 और 3
व्याख्या

रविकीर्ति का ऐहोल अभिलेख बादामी चालुक्य पुलकेशिन द्वितीय के लिए महत्त्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें हर्ष से उसका संघर्ष भी आता है। उत्तरमेरुर अभिलेख चोल ग्राम स्वशासन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, जबकि अग्निकुल माउंट आबू से जुड़ी राजपूत चारण-परंपरा है, कोई चोल अभिलेख नहीं।

प्र.5कथन: एलोरा के कैलास मंदिर का श्रेय सामान्यतः राष्ट्रकूट कृष्ण प्रथम को दिया जाता है. कारण: मंदिर में समर्पण-अभिलेख नहीं है, इसलिए यह श्रेय एलापुरा के कैलासनाथ से कृष्णराज को जोड़ने वाले बाद के अभिलेखीय संदर्भों पर आधारित है. सही विकल्प चुनिए.

A कथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण इस श्रेय के आधार को स्पष्ट करता है.
B कथन और कारण दोनों सही हैं, पर कारण इस श्रेय से संबंधित नहीं है.
C कथन सही है, पर कारण गलत है क्योंकि मंदिर में कृष्ण प्रथम का नाम देने वाला समर्पण-अभिलेख है.
D कथन गलत है, पर कारण सही है.
व्याख्या

कैलास मंदिर को सामान्यतः राष्ट्रकूट कृष्ण प्रथम से जोड़ा जाता है, पर स्रोत-समालोचना में यह महत्त्वपूर्ण है कि मंदिर के भीतर समर्पण-अभिलेख नहीं है. एलापुरा के कैलासनाथ और कृष्णराज को जोड़ने वाले अभिलेखीय संकेत इस श्रेय का आधार समझाते हैं; बाकी विकल्प इसी आधार को गलत पढ़ते हैं.

आपने 30 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6चोल प्रशासन के अध्ययन में उत्तरमेरूर अभिलेखों का ऐतिहासिक महत्व किस व्याख्या से सबसे ठीक स्पष्ट होता है?

Aवे मुख्य रूप से राजेंद्र प्रथम के श्रीविजय अभियान का विवरण देते हैं।
Bवे सिद्ध करते हैं कि चोल राज्य में मंदिर-केंद्रित स्थानीय संस्थाओं की कोई भूमिका नहीं थी।
Cवे चोल काल की ग्राम-सभा समितियों के चुनावी नियमों के अभिलेखीय प्रमाण हैं।
Dवे प्रतिहारों, चाहमानों, परमारों और चालुक्यों की अग्निकुल उत्पत्ति का वर्णन करते हैं।

7अग्निकुल परंपरा में माउंट आबू के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन गलत है?

Aपरंपरा माउंट आबू को ऐसे अग्नि-यज्ञ से जोड़ती है जिससे कुछ राजपूत कुलों की उत्पत्ति कही गई है.
Bपरंपरा माउंट आबू के यज्ञ से जुड़े कुलों में प्रतिहारों का नाम लेती है.
Cपरंपरा इस उत्पत्ति-कथा को एलोरा में राष्ट्रकूट कृष्ण प्रथम के दक्खिनी दरबार से जोड़ती है.
Dपरंपरा परमारों और चालुक्यों को अन्य राजपूत कुलों के साथ शामिल करती है.

8पल्लवों और चोलों के काल में विकसित द्रविड़ शैली की सबसे सटीक स्थापत्य पहचान कौन-सी है?

Aगर्भगृह के ऊपर पिरामिडाकार विमान वाला दक्षिण भारतीय मंदिर-रूप
Bवक्ररेखीय शिखर पर आधारित उत्तर भारतीय मंदिर-रूप
Cनागर और द्रविड़ तत्वों को मिलाने वाली दक्खिनी संकर शैली
Dएलोरा के राष्ट्रकूट कैलास मंदिर तक सीमित एकाश्म शैलकृत रूप

9प्रारंभिक मध्यकालीन भारतीय मंदिर स्थापत्य के वर्गीकरण में वेसर शैली की सबसे सटीक पहचान कौन-सी है?

Aनागर और द्रविड़ विशेषताओं के मिश्रण वाली शैली, जिसका संबंध विशेष रूप से दक्कन के चालुक्यों से है
Bगंगा मैदान के वक्ररेखीय शिखर से ही पहचानी जाने वाली पूर्णतः उत्तरी शैली
Cतंजावुर के पिरामिडाकार विमान से ही परिभाषित चोल साम्राज्य की शैली
Dबंगाल के पालों द्वारा ही संरक्षित शैल-कट बौद्ध गुफा शैली

10अभिकथन: राजेंद्र प्रथम ने गंगैकोंड की उपाधि धारण की। कारण: उसने चोल शक्ति को गंगा क्षेत्र तक बढ़ाया और दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय के विरुद्ध नौसैनिक अभियान भी किया। सही उत्तर चुनिए।

Aअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, पर कारण अभिकथन की व्याख्या नहीं करता।
Bअभिकथन सही है, पर कारण गलत है।
Cअभिकथन गलत है, पर कारण सही है।
Dअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है।

11इन मंदिर या ग्रंथ-संबंधों पर विचार कीजिए: 1. कृष्ण प्रथम - एलोरा का कैलास मंदिर; 2. राजराज प्रथम - तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर; 3. गुजरात के सोलंकी - मोढेरा सूर्य मंदिर; 4. अमोघवर्ष - कविराजमार्ग। इनमें से कितने युग्म सही हैं?

Aकेवल एक
Bकेवल दो
Cकेवल तीन
Dसभी चार

12बादामी चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय के संदर्भ में कौन-सा समूह सही सुमेलित है?

Aरविकीर्ति का ऐहोल अभिलेख; हर्ष को रोका; पल्लवों से संघर्ष
Bउत्तरमेरूर अभिलेख; ग्राम समिति चुनाव; चोल स्थानीय प्रशासन
Cएलोरा का कैलास मंदिर; कृष्ण प्रथम; राष्ट्रकूट संरक्षण
Dमामल्लपुरम के रथ; नरसिंहवर्मन प्रथम; पल्लव स्थापत्य

13प्रारंभिक मध्यकालीन राजपूत इतिहास में अग्निकुल विवरण की स्रोत-समालोचनात्मक समझ किस कथन से सबसे सही व्यक्त होती है?

Aयह मिहिर भोज का समकालीन राजकीय अभिलेख है, जो प्रतिहारों की पालों से उत्पत्ति सिद्ध करता है.
Bयह एक चारण उत्पत्ति-कथा है, जो कुछ राजपूत कुलों को माउंट आबू के अग्नि-यज्ञ से जोड़ती है; इसलिए इसे शाब्दिक राजवंशीय अभिलेख की तरह नहीं पढ़ना चाहिए.
Cयह उत्तरमेरूर अभिलेखों जैसा चोल ग्राम-लेख है और समितियों के चुनाव का वर्णन करता है.
Dयह दक्खिन के चालुक्यों की वेसर मंदिर-शैली को समझाने वाला स्थापत्य वर्गीकरण है.

14सम्राट चोल राजेंद्र प्रथम के बारे में इन कथनों पर विचार कीजिए: 1. गंगा तक चोल शक्ति के विस्तार के बाद उसने गंगैकोंड की उपाधि धारण की। 2. उसने दक्षिण-पूर्व एशिया में श्रीविजय के विरुद्ध नौसैनिक अभियान चलाया। कौन-सा कथन सही है?

Aकेवल 1
Bकेवल 2
C1 और 2 दोनों
Dन तो 1, न ही 2

15अग्निकुल परंपरा में प्रयुक्त राजपूत कुल-नाम को उसके प्रचलित ऐतिहासिक रूप से मिलाइए. पहली सूची: 1. चाहमान 2. चालुक्य 3. परमार 4. प्रतिहार. दूसरी सूची: क. चौहान ख. सोलंकी ग. पंवार घ. गुर्जर-प्रतिहार. सही कूट चुनिए.

A1-क, 2-ग, 3-ख, 4-घ
B1-ख, 2-क, 3-घ, 4-ग
C1-घ, 2-ख, 3-ग, 4-क
D1-क, 2-ख, 3-ग, 4-घ

इतिहास (पेपर II) में और विषय

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