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हिन्दी भाषा-अर्जन एवं भाषा-अधिगम — सिद्धांत एवं रणनीतियाँ MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए हिन्दी भाषा-अर्जन एवं भाषा-अधिगम — सिद्धांत एवं रणनीतियाँ के 10 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1बालकों के निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के माध्यम के बारे में यह बात कहता है कि बच्चे की घर की भाषा सुरक्षित रहे। पाठ्यचर्या और मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित खंड में कौन-सा प्रावधान इस विचार को सबसे स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है?

A धारा 29(2)(च) — शिक्षा का माध्यम, जहाँ तक व्यावहारिक हो, बालक की मातृ-भाषा होगा।
B धारा 16 — प्रारंभिक शिक्षा में रोके जाने और निष्कासन का प्रतिषेध।
C धारा 21 — सरकारी विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन समितियों का गठन।
D धारा 12(1)(ग) — अशासकीय विद्यालयों में वंचित समूहों के बालकों का प्रवेश।
व्याख्या

बालकों के निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29(2)(च) पाठ्यचर्या और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी है। यह कहती है कि जहाँ तक व्यावहारिक हो, शिक्षा का माध्यम बालक की मातृभाषा हो। प्राथमिक स्तर पर घर की भाषा की रक्षा का यह सबसे प्रत्यक्ष प्रावधान है। अन्य धाराएँ भी महत्त्वपूर्ण हैं, पर उनके उद्देश्य अलग हैं: अनुत्तीर्ण न रोकना, विद्यालय प्रबंधन और अल्पसुविधा प्राप्त समूहों का प्रवेश। उनमें शिक्षा के माध्यम का उल्लेख नहीं है।

प्र.2ध्वनि से अर्थ तक की प्राथमिक हिन्दी शिक्षार्थी की यात्रा के निम्नलिखित चरणों को मुख्यधारा प्राथमिक शिक्षण-पद्धति की संस्तुति के अनुसार क्रम में रखिए। (1) छोटे वाक्यों को आत्मविश्वास से पढ़ना और अर्थ के लिए ठहरना। (2) मुद्रित पाठ में अक्षर और सामान्य मात्राओं को पहचानना। (3) कहानियाँ और तुकांत सुनना तथा मौखिक रूप से उनमें भाग लेना। (4) अक्षर और मात्रा-ध्वनियों को मिलाकर परिचित पूर्ण शब्दों का वाचन करना।

A (3), (2), (4), (1)
B (1), (4), (2), (3)
C (2), (4), (1), (3)
D (4), (3), (1), (2)
व्याख्या

मुख्यधारा की प्राथमिक शिक्षण-पद्धति बच्चों को खूब मौखिक रूप से भाषा सुनाने से शुरू होती है, ताकि वे कहानियों और तुकबंदियों से अर्थ का मज़बूत भंडार बना सकें। इसके बाद बच्चों में छपे हुए अक्षरों की समझ बनती है, जब वे अक्षर और सामान्य मात्राओं को पहचानने लगते हैं। छपाई से परिचित हो जाने पर परिचित पूरे शब्दों को पढ़ना शुरू होता है। और अंत में, इसी शुरुआती क्रम में, अर्थ पर ध्यान देते हुए छोटे वाक्यों को पढ़ना सबसे आगे का चरण है।

प्र.3सूची एक की प्रत्येक प्राथमिक हिन्दी शिक्षण-रणनीति का मिलान सूची दो में दिए गए भाषा-कौशल केंद्र से कीजिए और सही संयोजन चुनिए। सूची एक: (क) परिचित गाँव के दृश्य पर आधारित चित्र-वार्ता। (ख) बड़ी पुस्तक पर शिक्षक द्वारा शब्दों की ओर संकेत करते हुए साझा पठन। (ग) प्रातः-वृत्त के बाद दो मिनट का व्यक्तिगत समाचार-डायरी लेखन। (घ) पट्ट पर बने शब्द-परिवार से जुड़े ध्वनि-तुकांत उच्चारण। सूची दो: (1) आरंभिक ध्वनि-संवेदन, (2) स्वतंत्र मौखिक अभिव्यक्ति, (3) पठन के समय मुद्रित-शब्द मिलान, (4) आरंभिक लिखित रचना।

A (क)-3, (ख)-2, (ग)-1, (घ)-4
B (क)-2, (ख)-3, (ग)-4, (घ)-1
C (क)-1, (ख)-4, (ग)-3, (घ)-2
D (क)-4, (ख)-1, (ग)-2, (घ)-3
व्याख्या

परिचित दृश्य पर चित्र-वार्ता हर बच्चे को बोलकर अपनी बात कहने का मौका देती है, इसलिए यह स्वतंत्र मौखिक अभिव्यक्ति में मदद करती है। बड़ी पुस्तक पर शिक्षक शब्दों की ओर इशारा करते हुए साझा पठन कराते हैं, इससे बोले गए शब्द छपे हुए शब्दों से जुड़ते हैं — यही मुद्रित-शब्द मिलान है। दो मिनट की निजी समाचार-डायरी लिखित रचना की शुरुआती कोशिश है। शब्द-परिवार से जुड़े तुकांत बार-बार आने वाली ध्वनियों और पैटर्न की ओर ध्यान खींचते हैं, जिससे शुरुआती ध्वनि-संवेदन मज़बूत होता है।

प्र.4अभिकथन और कारण पढ़कर सही विकल्प चुनिए। अभिकथन: प्राथमिक हिन्दी शिक्षक को कई सप्ताह तक केवल औपचारिक व्याकरण-नियमों का पृथक अभ्यास करवाना चाहिए और तब तक बच्चों को कक्षा में कहानियाँ सुनने या वार्तालाप करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। कारण: प्राथमिक स्तर पर बच्चे अर्थपूर्ण संदर्भों में भाषा के समृद्ध परिचय से बहुत पहले लाभ उठा लेते हैं, औपचारिक व्याकरण-कार्य उसके बाद आता है।

A अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, और कारण अभिकथन की उचित व्याख्या है।
B अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, परंतु कारण अभिकथन की उचित व्याख्या नहीं है।
C अभिकथन सत्य है किन्तु कारण असत्य है।
D अभिकथन असत्य है किन्तु कारण सत्य है।
व्याख्या

अभिकथन असत्य है। प्राथमिक हिन्दी शिक्षण-पद्धति किसी मौखिक या कहानी-कार्य से पहले कई सप्ताह के अलग व्याकरण-अभ्यास से शुरू नहीं होती; ऐसा क्रम बच्चों को अर्थपूर्ण भाषा-संपर्क से वंचित कर देगा, जिसकी उन्हें पहले आवश्यकता होती है। कारण सत्य है: इस स्तर के बच्चे औपचारिक व्याकरण-शिक्षण से बहुत पहले श्रवण, भाषण और अर्थपूर्ण संदर्भ से लाभ उठाते हैं। अतः अभिकथन मिथ्या है और कारण प्राथमिक शिक्षण-पद्धति के सत्य सिद्धांत के रूप में सही है।

प्र.5प्राथमिक हिन्दी कक्षा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

A बोलते समय व्याकरण की गलती करने वाले बच्चे को अनदेखा करना चाहिए और उसे कोई मार्गदर्शन कभी नहीं देना चाहिए, क्योंकि इस स्तर पर प्रतिपुष्टि हानिकारक है।
B कहानियाँ, तुकांत और साझा पठन शब्दों और संरचनाओं का वह भंडार बनाते हैं जो आगे के लेखन को सहारा देता है।
C परिचित स्थानीय शब्द नई पाठ्यपुस्तकीय शब्दावली तक पहुँचने का सेतु बन सकते हैं; उन्हें मिटाने वाली समस्या नहीं माना जाना चाहिए।
D श्रवण-बोध के क्रियाकलाप अर्थ का वह आधार बनाते हैं, जिसका उपयोग शिक्षार्थी बाद में छपे हुए पाठ को पढ़ते समय करता है।
व्याख्या

तीन विकल्प सर्वस्वीकृत शिक्षण-पद्धति का वर्णन करते हैं: कहानियाँ और साझा पठन भाषा-भंडार बनाते हैं, स्थानीय शब्द पाठ्यपुस्तकीय शब्दों का सेतु बनते हैं, और श्रवण आगे के पठन के लिए अर्थ-आधार तैयार करता है। पहला विकल्प गलत है। प्राथमिक हिन्दी में गुणवत्तापूर्ण प्रतिपुष्टि सहारा देने वाली और कोमल होती है; सभी त्रुटियों को सदा अनदेखा करने से भ्रांतियाँ यथावत बनी रहती हैं और शिक्षार्थी को आवश्यक सहारा नहीं मिल पाता।

आपने 10 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6कक्षा 2 की हिन्दी शिक्षिका सत्र की योजना इस प्रकार बनाती है कि श्रवण और भाषण के क्रियाकलाप औपचारिक स्वर-पठन अभ्यास से पहले आते हैं, और स्वर-पठन निर्देशित लेखन से पहले रखा जाता है। यह क्रम भाषा-अर्जन के किस सिद्धांत को सर्वाधिक स्पष्ट रूप से दर्शाता है?

Aलेखन सदैव पठन से पहले आना चाहिए क्योंकि हाथ का नियंत्रण देखकर पढ़ने की क्षमता से पहले विकसित होता है।
Bमौखिक भाषा वह आधार है जिस पर पठन और लेखन टिकते हैं; ग्रहणात्मक कौशल सामान्यतः छपे शब्दों में अभिव्यक्ति वाले कौशलों से पहले विकसित होते हैं।
Cचारों कौशलों को एक ही दिन एक ही पाठ में बराबर समय देकर पढ़ाना अनिवार्य है।
Dश्रवण और भाषण भाषा-शिक्षण के अंग नहीं हैं, इन्हें केवल घर पर छोड़ देना चाहिए।

7प्राथमिक हिन्दी कक्षा में घर की भाषा की भूमिका से जुड़े निम्न कथनों पर विचार कीजिए। (1) घर की भाषा के शब्द नए पाठ्यपुस्तकीय शब्दों तक पुल का काम कर सकते हैं। (2) पहले दिन से घर की भाषा पर रोक लगा देनी चाहिए ताकि केवल मानक हिन्दी बोली जाए। (3) घर की भाषा की कहानियाँ, गीत और मुहावरे नई अवधारणाओं का अर्थ बनाने में सहारा दे सकते हैं। (4) घर की भाषा को अनुमति देना इस बात का संकेत है कि शिक्षक ठीक से प्रशिक्षित नहीं है। (5) शिक्षक घर की भाषा का सम्मान बनाए रखते हुए मानक हिन्दी रूपों को धीरे-धीरे जोड़ सकता है। NCF 2005 और प्राथमिक हिन्दी शिक्षण-पद्धति से मेल खाने वाले कथनों को कौन-सा विकल्प सही पहचानता है?

Aकेवल कथन (1) और (3)।
Bकेवल कथन (1), (2) और (5)।
Cपाँचों कथन।
Dकेवल कथन (1), (3) और (5)।

8आरंभिक हिन्दी पठन के बारे में दिए गए दो कथन पढ़कर सही विकल्प चुनिए। कथन एक: आरंभिक कक्षाओं में बोध-कार्य को मुख्यतः कहानी के पुनःकथन या मौखिक चर्चा से पहले शिक्षार्थी से पाठ्यपुस्तक में व्याकरण संबंधी बिंदु रेखांकित करवाने तक सीमित रखना चाहिए। कथन दो: प्राथमिक शिक्षार्थी अक्षर और मात्रा पहचानने से क्रमशः पूर्ण शब्द और छोटे वाक्य पढ़ने तक बढ़ता है, जैसे-जैसे छपी हुई भाषा-व्यवस्था से उसकी परिचितता गहरी होती है।

Aदोनों कथन सही हैं।
Bकेवल कथन एक सही है।
Cकेवल कथन दो सही है।
Dकोई भी कथन सही नहीं है।

9प्राथमिक स्तर पर प्रथम-भाषा अर्जन और द्वितीय-भाषा अधिगम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। (1) प्रथम-भाषा अर्जन सामान्यतः अनौपचारिक संपर्क और न्यूनतम स्पष्ट व्याकरण-शिक्षण के साथ चलता है। (2) इस स्तर पर द्वितीय-भाषा अधिगम को ऐसे बोधगम्य निवेश से लाभ होता है जो शिक्षार्थी के वर्तमान स्तर से थोड़ा ऊपर हो। (3) छोटा शिक्षार्थी द्वितीय भाषा सीखते समय अर्थ-निर्माण के लिए प्रथम भाषा का सहारा नहीं ले सकता। कौन-से कथन सही हैं?

Aकेवल कथन (1) और (3)।
Bकेवल कथन (2)।
Cकेवल कथन (1) और (2)।
Dउपर्युक्त तीनों कथन सही हैं।

10एनसीएफ 2005 की संस्तुति है कि प्राथमिक विद्यालय के आरंभिक वर्षों में बच्चे की घर की भाषा को सीखने के केंद्र में रखा जाए। कक्षा 1 की हिन्दी कक्षा के लिए इस संस्तुति का कौन-सा कारण सबसे उचित है?

Aजब बच्चा घर में प्रयुक्त भाषा में सोचता और विचार व्यक्त करता है, तब संकल्पना-निर्माण अधिक तेज होता है।
Bघर की भाषा को शीघ्रता से बदलना चाहिए ताकि कक्षा 1 तक मानक हिन्दी का उच्चारण स्थापित हो जाए।
Cइस आयु के बच्चे किसी भी स्थिति में अपनी घर की बोली के अतिरिक्त कोई भाषा समझ ही नहीं सकते।
Dविद्यालय को घर की भाषा की पूर्णतः उपेक्षा करनी चाहिए क्योंकि वह छपी पुस्तक के पठन में बाधा डालती है।

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