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हिन्दी में आकलन, सतत व्यापक मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए हिन्दी में आकलन, सतत व्यापक मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण के 6 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1अभिकथन तथा कारण ध्यान से पढ़िए: अभिकथन (अ): कक्षा 4 की हिन्दी शिक्षिका देखती है कि कई विद्यार्थी इ और ई की मात्राओं में लगातार भ्रम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगले पठन-पाठ से पहले छोटा और केंद्रित उपचारात्मक चरण चलाना चाहिए। कारण (र): लक्षित उपचारात्मक शिक्षण तब सबसे प्रभावी होता है जब पहचानी गई विशिष्ट कठिनाई पर शीघ्र काम किया जाए। उसे सत्रांत तक टालना उचित नहीं होता। सही विकल्प चुनिए।

A A तथा R दोनों सत्य हैं, तथा R, A का सही स्पष्टीकरण है।
B A तथा R दोनों सत्य हैं, परन्तु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
C A सत्य है, परन्तु R असत्य है।
D A असत्य है, परन्तु R सत्य है।
व्याख्या

अभिकथन ठीक वही पाठ्यपुस्तकीय नैदानिक-उपचारात्मक क्रम है: जिस शिक्षिका ने इ तथा ई के बीच विशिष्ट मात्रा-भ्रम पहचान लिया है, वह लघु, केंद्रित उपचारात्मक चक्र नियोजित करती है। कारण उस मूल सिद्धांत को बताता है कि निदान के तुरंत बाद किया गया लक्षित उपचार सर्वाधिक प्रभावी होता है। कारण सीधे अभिकथन की सत्यता का स्पष्टीकरण देता है। दोनों सत्य हैं और R, A का सही स्पष्टीकरण है, अतः विकल्प A सही है।

प्र.2प्राथमिक हिन्दी में संरचनात्मक आकलन की अच्छी अभ्यास-पद्धति से सम्बद्ध निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. आकलन के प्रमाण पूरे सत्र में सुनना, बोलना, पढ़ना तथा लिखना — चारों कौशलों से लिए जाएँ, केवल लेखन से नहीं। 2. उपकरणों में सरल जाँच-सूचियाँ, उपाख्यानिक अभिलेख, विद्यार्थी पोर्टफोलियो तथा सहपाठी और स्वयं-समीक्षा की प्रविष्टियाँ सम्मिलित हों। 3. प्रत्येक शिक्षक प्रति सप्ताह कक्षा 2 के विद्यार्थियों को वाचन-गति के आधार पर सार्वजनिक क्रम दे। 4. आकलन के परिणाम सीधे अगली शिक्षण-योजना तथा आवश्यक उपचारात्मक चक्र में शामिल हों। प्राथमिक हिन्दी अभ्यास के लिए कौन-सा संयोजन पूर्णतः सही है?

A केवल 1, 2 तथा 3
B केवल 1, 2 तथा 4
C केवल 2, 3 तथा 4
D केवल 1, 3 तथा 4
व्याख्या

कथन 1, 2 और 4 प्राथमिक हिन्दी के सही अभ्यास को दिखाते हैं — चारों LSRW कौशलों में फैले साक्ष्य, कई उपकरणों से जानकारी जुटाना और अगली शिक्षण-योजना तथा उपचारात्मक चक्र से सीधा जुड़ाव। कथन 3 — कक्षा 2 में हर हफ़्ते सबके सामने वाचन-गति की रैंकिंग — RTE 2009 के तहत प्राथमिक CCE की गैर-तुलनात्मक और डर पैदा न करने वाली भावना के खिलाफ़ है, और बच्चे की आत्म-छवि के लिए नुकसानदेह है। इसलिए पूरी तरह सही संयोजन में कथन 3 को छोड़कर 1, 2 और 4 आते हैं, जो विकल्प B है।

प्र.3प्राथमिक हिन्दी में नैदानिक आकलन से सम्बद्ध दो कथनों पर विचार करें: कथन I: नैदानिक आकलन उस विशिष्ट बिंदु की पहचान करता है जहाँ विद्यार्थी को पठन या लेखन में कठिनाई आ रही है, ताकि शिक्षक उसी के अनुसार उपचारात्मक कदम तय कर सके। कथन II: नैदानिक आकलन वार्षिक उपलब्धि-परीक्षा के समान है तथा इसका मुख्य उद्देश्य ग्रेड प्रदान करना है। इनमें से कौन-सा सही है?

A कथन 1 पूर्णतः सही है; कथन 2 तथ्यात्मक रूप से गलत है।
B कथन II सही है; कथन I गलत है।
C कथन I और कथन II दोनों सही हैं।
D कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
व्याख्या

नैदानिक आकलन ठीक वही उपकरण है जो पहचानता है कि विद्यार्थी का हिन्दी पठन या लेखन कहाँ टूटता है — अक्षर स्तर पर, मात्रा स्तर पर, शब्द स्तर पर या बोध स्तर पर — ताकि शिक्षक लक्षित उपचारात्मक योजना दे सके। इसलिए यह वार्षिक उपलब्धि-परीक्षा से भिन्न है और अंतिम ग्रेड देने के लिए प्रयुक्त नहीं होता। कथन I सही है, कथन II गलत है, अतः विकल्प A मान्य है।

प्र.4RTE 2009 के ढाँचे के अंतर्गत, प्राथमिक हिन्दी कक्षा में सतत व्यापक मूल्यांकन को सबसे अच्छी तरह कौन-सा कथन स्पष्ट करता है?

A सत्र के अंत में होने वाली एक ही लिखित परीक्षा, जो विद्यार्थियों को क्रम में रखती है और कक्षा 5 में उनके उत्तीर्ण होने का निर्णय करती है।
B एक बाहरी वार्षिक बोर्ड परीक्षा, जो जिले के विद्यालयों के विद्यार्थियों की आपस में तुलना करती है।
C पूरे सत्र में सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना — इन चारों कौशलों पर लगातार, अलग-अलग तरह का और संरचित आकलन, जो पढ़ाई की योजना बनाने में मदद करे।
D मासिक मौखिक पाठ-वाचन, जिसमें केवल अभिभावक घर पर अंक देते हैं।
व्याख्या

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन से अपेक्षा है कि भाषा-आकलन पूरे सत्र में लगातार हो, एक बैठक तक सीमित न रहे। वह व्यापक हो, अर्थात केवल लेखन नहीं बल्कि सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना चारों कौशल देखे। यह गठनात्मक भी हो, ताकि शिक्षक कक्षा में ही परिणामों के आधार पर शिक्षण दिशा सुधार सके। विकल्प C इन चारों विशेषताओं को समेटता है; A और B एकबारगी योगात्मक या बाहरी परीक्षण बताते हैं, जबकि D आकलनकर्ता को शिक्षक से अलग कर देता है।

प्र.5सूची 1 में दी गई हिन्दी सीखने की कठिनाई का सूची 2 में दी गई प्राथमिक स्तर की सबसे उपयुक्त उपचारात्मक गतिविधि से मिलान कीजिए। सूची 1 (कठिनाई) क. मात्राएँ लगाने में त्रुटियाँ ख. पढ़ने की गति धीमी होना ग. शब्दावली याद रखने में कमजोरी घ. वर्ण पहचानने में त्रुटियाँ सूची 2 (उपचारात्मक गतिविधि) 1. छोटे और परिचित पाठों का जोड़ी में बार-बार पठन, समयबद्ध अभ्यास सहित 2. नए विषय-आधारित हिन्दी शब्दों के साथ दैनिक चित्र-शब्द कार्ड खेल 3. ध्वनि से संबंध जोड़ते हुए रेत की तश्तरी में अँगुली से वर्णमाला का अभ्यास 4. व्यंजन-मात्रा वाली शब्द-पट्टियों से लक्षित मात्रा अभ्यास सही मिलान चुनिए।

A P-1, Q-2, R-3, S-4
B P-2, Q-1, R-4, S-3
C P-4, Q-1, R-2, S-3
D P-3, Q-4, R-2, S-1
व्याख्या

मात्राओं की गलती दूर करने के लिए व्यंजन और मात्रा वाले शब्द-कार्डों से लक्षित अभ्यास सबसे सीधा उपाय है, इसलिए P का मिलान 4 से होता है। धीमी वाचन-गति छोटे, परिचित अंशों के बार-बार जोड़ी में पठन और समयबद्ध अभ्यास से सुधरती है, इसलिए Q का मिलान 1 से होता है। कमज़ोर शब्दावली-स्मरण विषय-आधारित दैनिक चित्र-शब्द कार्ड खेल से सबसे प्रभावी ढंग से सुधरता है, इसलिए R का मिलान 2 से होता है। वर्ण-पहचान की गलती वर्णमाला की बालू-थाली और अँगुली से अक्षर बनाने जैसी बहु-संवेदी गतिविधि से सुधरती है, इसलिए S का मिलान 3 से होता है। सम्मिलित मिलान P-4, Q-1, R-2, S-3 अर्थात विकल्प C है।

आपने 6 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6कक्षा 3 की हिन्दी शिक्षिका पूरे सत्र में विद्यार्थियों के बोलने के कौशल से जुड़े प्रमाण व्यवस्थित रूप से दर्ज करना चाहती है। प्राथमिक स्तर के निर्माणात्मक आकलन के सिद्धांतों के सबसे अनुरूप विधि कौन-सी है?

Aप्रत्येक बच्चे को केवल वर्ष के अंत में प्रवाह के मानदंड पर अंक देना और एक प्रतिशत बताना।
Bमुक्त खेल के दौरान प्रत्येक बच्चे के चुप रहने के मिनट गिनना और उन्हें मौखिक अंकों में बदलना।
Cकक्षा में मिले प्रमाणों के बजाय अभिभावकों से यह प्रमाणित करवाना कि बच्चा घर में हिन्दी कितने आत्मविश्वास से बोलता है।
Dसाझा पठन, भूमिका-निर्वाह और सुबह की गोष्ठी के दौरान बोलने से जुड़े छोटे, तिथि सहित अवलोकनों का घटना-वृत्त अभिलेख रखना और उसे अगले पाठ की योजना में उपयोग करना।

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