16 अप्रैल 2026 की पीआईबी विज्ञप्ति में बताया गया कि भारत सरकार ने देश की पहली अर्धचालक फैब्रिकेशन इकाई को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया है। टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड इसे गुजरात के धोलेरा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थापित कर रही है। यह इकाई धोलेरा में 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगी। इसमें लगभग ₹91,000 करोड़ का निवेश होगा और फ्रंट-एंड अर्धचालक विनिर्माण में लगभग 21,000 रोजगार पैदा होने का अनुमान है। इसके साथ भारत ने चिप मूल्य शृंखला के उस हिस्से में औपचारिक रूप से प्रवेश किया है, जहाँ सबसे अधिक पूँजी और उन्नत तकनीक की आवश्यकता होती है—यानी वास्तविक फैब्रिकेशन। अब भारत उन असेंबली, परीक्षण, चिह्नांकन और पैकेजिंग (ATMP) इकाइयों से आगे बढ़ रहा है, जिन तक देश की गतिविधियाँ पहले सीमित थीं। यह अधिसूचना विशेष आर्थिक क्षेत्र के नियमों में 2025 में किए गए संशोधनों से संभव हुई। इन संशोधनों में न्यूनतम भूमि आवश्यकता 50 से घटाकर 10 हेक्टेयर की गई, भार-मुक्ति से जुड़े मानदंडों को लचीला बनाया गया, लागू शुल्कों के साथ घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) में बिक्री की अनुमति दी गई और शुद्ध विदेशी मुद्रा (NFE) की गणना में निःशुल्क आपूर्ति को भी शामिल किया गया। धोलेरा फैब AI से लैस होगा और देश में बन रही व्यापक अर्धचालक व्यवस्था का हिस्सा होगा। इस व्यवस्था में गुजरात में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की ₹13,000 करोड़ की ATMP इकाई, कर्नाटक में एक्यूस ग्रुप का इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर और सीजी सेमी तथा केन्स सेमीकॉन द्वारा आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण (OSAT) क्षमता का विस्तार भी शामिल हैं। ये सभी कदम भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत देश की अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात पर निर्भरता घटाने के लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हैं।