पीआईबी की एक पृष्ठभूमि रिपोर्ट बताती है कि भारत किस तरह एक बड़े डिजिटल उपभोक्ता से आगे बढ़कर एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सुपरकंप्यूटिंग में मिशन-मोड कार्यक्रमों के बल पर एक उदीयमान वैश्विक टेक-शक्ति बना है। वर्ष 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया प्रोग्राम ने इसकी नींव रखी। ऑप्टिकल फाइबर कवरेज 2019 के 19.35 लाख रूट किलोमीटर से बढ़कर 2025 में 42.36 लाख रूट किलोमीटर हो गई और 5G सेवाएं अब 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी हैं। इंटरनेट कनेक्शन 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ हो गए, जबकि औसत मासिक डेटा खपत 2014 के 61.66 एमबी से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 24.01 जीबी हो गई और डेटा की लागत ₹269 प्रति जीबी से घटकर ₹8-10 प्रति जीबी रह गई। नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (2015, ₹4,500 करोड़ परिव्यय) के तहत भारत ने 47 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किए और स्वदेशी परम रुद्र सीरीज विकसित की। सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम (दिसंबर 2021, ₹76,000 करोड़) के बाद बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 की घोषणा हुई, जिसके लिए ₹1,000 करोड़ का प्रारंभिक प्रावधान रखा गया। आईएसएम के तहत लगभग ₹1.64 लाख करोड़ की 12 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। नेशनल क्वांटम मिशन (अप्रैल 2023, ₹6,003.65 करोड़) ने 1,000 किलोमीटर का सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क समय से छह वर्ष पूर्व प्रदर्शित किया और फरवरी 2026 में अमरावती में भारत की पहली क्वांटम वैली की नींव रखी गई। इंडियाएआई मिशन (2024, ₹10,300 करोड़ से अधिक) स्वदेशी एआई कंप्यूटिंग को सहारा देता है।
भारत का उभरता टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम: भविष्य के लिए तैयार डिजिटल शक्ति को गति देते मिशन
पीआईबी की पृष्ठभूमि रिपोर्ट एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम और सुपरकंप्यूटिंग में भारत के मिशन-मोड प्रयासों का ब्योरा देती है, जिसमें डिजिटल इंडिया, एनएसएम, सेमीकॉन इंडिया/आईएसएम 2.0, नेशनल क्वांटम मिशन और इंडियाएआई मिशन के प्रमुख पड़ाव विकसित भारत 2047 की दिशा में भविष्य-तैयार डिजिटल इकोसिस्टम को गति दे रहे हैं।
मुख्य तथ्य
- ऑप्टिकल फाइबर कवरेज 2019 के 19.35 लाख रूट किमी से बढ़कर 2025 में 42.36 लाख रूट किमी हुई; 5G अब 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुका है।
- नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (2015, ₹4,500 करोड़) के तहत 47 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर तैनात; परम रुद्र स्वदेशी सीरीज है।
- सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के साथ शुरू; बजट 2026-27 में आईएसएम 2.0 की घोषणा, ₹1,000 करोड़ का प्रारंभिक प्रावधान।
- जून 2026 तक आईएसएम के तहत लगभग ₹1.64 लाख करोड़ की 12 परियोजनाओं को स्वीकृति (एक फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, नौ पैकेजिंग यूनिट)।
- नेशनल क्वांटम मिशन (अप्रैल 2023, ₹6,003.65 करोड़) ने 1,000 किमी का सुरक्षित क्वांटम नेटवर्क समय से छह वर्ष पूर्व प्रदर्शित किया; फरवरी 2026 में अमरावती में पहली क्वांटम वैली की नींव।
- इंडियाएआई मिशन (2024, ₹10,300 करोड़ से अधिक) 38,000 से अधिक जीपीयू को सहारा देता है; एआई कोश पर 20 क्षेत्रों में 12,115 डेटासेट और 306 एआई मॉडल।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. एनएसएम वर्ष 2015 में ₹4,500 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था।\n2. स्वदेशी परम रुद्र सीरीज के सुपरकंप्यूटरों की संयुक्त क्षमता 152 पेटाफ्लॉप्स है।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
कथन 1 सही है: नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन 2015 में ₹4,500 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था। कथन 2 गलत है: एनएसएम के तहत भारत ने 47 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किए हैं, न कि 152 पेटाफ्लॉप्स की क्षमता वाले। परम रुद्र स्वदेशी सीरीज अवश्य है। अतः केवल कथन 1 सही है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नेशनल क्वांटम मिशन का परिव्यय कितना है और इसे कब मंजूरी मिली?
नेशनल क्वांटम मिशन को अप्रैल 2023 में ₹6,003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई, जो क्वांटम कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन, सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी तथा मटीरियल्स एवं डिवाइसेस पर केंद्रित है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने कितनी परियोजनाओं को मंजूरी दी है?
जून 2026 तक आईएसएम ने लगभग ₹1.64 लाख करोड़ की 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और नौ पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं।
सुपरकंप्यूटिंग में भारत ने क्या प्रगति की है?
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (2015, ₹4,500 करोड़) के तहत भारत ने 47 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किए हैं और स्वदेशी परम रुद्र सीरीज विकसित की है।
भारत की पहली क्वांटम वैली कहां स्थापित की गई?
भारत की पहली क्वांटम वैली फरवरी 2026 में अमरावती में स्थापित की गई, जो क्वांटम अनुसंधान, नवाचार और रणनीतिक क्षमताओं के लिए एक समर्पित इकोसिस्टम तैयार करेगी।
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