केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद वेंकटेश जोशी ने 10 जून 2026 को राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (निसे) द्वारा तैयार "भारत का फ्लोटिंग सौर पीवी क्षमता आकलन" रिपोर्ट जारी की। इस अध्ययन में देश के अंतर्देशीय जल निकायों पर फ्लोटिंग सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की क्षमता का व्यापक मानचित्रण किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल फ्लोटिंग सौर पीवी क्षमता 102.18 GWp है। इस नई क्षमता को जोड़ने के बाद भारत का कुल आकलित सौर ऊर्जा विभव बढ़कर 3,445 GWp हो गया है।
निसे ने आकलन के लिए बहु-मानदंड भू-स्थानिक पद्धति अपनाई। अध्ययन में न्यूनतम 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले, 3 से 30 मीटर गहराई के और सड़कों तथा विद्युत उपकेंद्रों से 10 किमी के भीतर स्थित जल निकायों को चुना गया। देशभर में कुल 10,725.99 वर्ग किमी जल क्षेत्र में से 4,546.01 वर्ग किमी को तकनीकी रूप से उपयुक्त पाया गया। 20% उपयोग सीमा लागू करने के बाद प्रभावी तैनाती क्षेत्र 1,946.24 वर्ग किमी निकला।
राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे है जिसका व्यवहार्य जल क्षेत्रफल 775.17 वर्ग किमी है और आकलित फ्लोटिंग सौर क्षमता 40.70 GW (सकल) है। 20% सीमा लागू करने के बाद सर्वाधिक क्षमता वाले शीर्ष पाँच राज्य हैं — महाराष्ट्र (16.28 GWp), मध्य प्रदेश (14.89 GWp), कर्नाटक (13.69 GWp), ओडिशा (12.81 GWp) और तेलंगाना (10.72 GWp)।
फ्लोटिंग सौर ऊर्जा दो लाभ देती है — बिना भूमि उपयोग के बिजली उत्पादन और जलाशयों में वाष्पीकरण में कमी। MNRE इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित योजना पर कार्य कर रहा है।
