भारतीय रेलवे ने 28 मई 2026 को हरियाणा में उत्तर रेलवे के 89 किलोमीटर लंबे जींद से सोनीपत खंड पर देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल चालित ट्रेन के व्यावसायिक परिचालन को मंजूरी दे दी। राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत यह देश में हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम है। दस डिब्बों वाला यह ब्रॉड गेज ट्रेनसेट अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन लखनऊ ने अभिकल्पित किया है और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई ने बनाया है। यह दुनिया का सबसे लंबा और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन रेल फॉर्मेशन है, जिसमें 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणोदन प्रणाली लगी है। यह प्रणाली संपीड़ित हाइड्रोजन और वायुमंडलीय ऑक्सीजन को विद्युत में बदलती है और केवल जलवाष्प उत्सर्जित करती है। यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटा की शीर्ष गति तक पहुंच सकती है और प्रति सेवा 2638 से अधिक यात्रियों को ले जा सकती है। इसमें आठ यात्री डिब्बे और दो पावर कार होंगी, जिनमें फ्यूल सेल, लिथियम आयन बैटरी और हाइड्रोजन सिलिंडर लगे हैं। जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की सुविधा स्थापित की गई है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा से विद्युत अपघटन के जरिए हाइड्रोजन प्राप्त किया जाएगा ताकि लगभग शून्य कार्बन फुटप्रिंट सुनिश्चित हो सके। रेल संरक्षा आयुक्त ने व्यापक सुरक्षा प्रोटोकॉल के अधीन परिचालन स्वीकृति जारी की है। इनमें हाइड्रोजन ईंधन प्रणाली की 24 घंटे निगरानी, पूरे रेक में रिसाव का पता लगाने वाले सेंसर और प्रारंभिक संचालन के दौरान प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपस्थिति शामिल है। इस मंजूरी के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे हाइड्रोजन चालित यात्री रेल सेवा संचालित करने वाले देशों की पंक्ति में शामिल हो गया है। इससे 2030 तक रेलवे परिचालन में नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता भी आगे बढ़ती है। रेल मंत्रालय अगले चरण में सोनीपत से जाखल, पठानकोट से जोगिंदरनगर, बिलासपुर से मनाली, मारवाड़ से देवगढ़ मडारिया और मऊ से सनावद जैसे विरासत और छोटी दूरी के मार्गों पर इस तकनीक का विस्तार करने की योजना बना रहा है।