मुख्य तथ्य

  • चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को 18:04 भारतीय मानक समय पर चंद्र दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास मृदु अवतरण किया।
  • आदित्य-एल1 को 2 सितंबर 2023 को भारत की पहली समर्पित सौर वेधशाला के रूप में प्रक्षेपित किया गया।
  • एक्सपोसैट 1 जनवरी 2024 को भारत के पहले समर्पित एक्स-रे ध्रुवणमिति उपग्रह के रूप में प्रक्षेपित हुआ।
  • गगनयान टीवी-डी1 ने 21 अक्टूबर 2023 को दल-निर्गमन, पैराशूट अवतरण और समुद्री पुनर्प्राप्ति क्रम को परखा।
  • मिशन दिव्यास्त्र ने 11 मार्च 2024 को अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि-5 की एमआईआरवी क्षमता का सार्वजनिक प्रदर्शन किया।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को 18:04 भारतीय मानक समय पर चंद्र दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास मृदु अवतरण किया।

  2. 2

    प्रज्ञान ने एपीएक्सएस और लिब्स उपकरणों से दक्षिणी ध्रुवीय चंद्र मिट्टी में सल्फर और अन्य तत्वों की पुष्टि की।

  3. 3

    आदित्य-एल1 को 2 सितंबर 2023 को भारत की पहली समर्पित सौर वेधशाला के रूप में प्रक्षेपित किया गया।

  4. 4

    एक्सपोसैट 1 जनवरी 2024 को भारत के पहले समर्पित एक्स-रे ध्रुवणमिति उपग्रह के रूप में प्रक्षेपित हुआ।

  5. 5

    गगनयान टीवी-डी1 ने 21 अक्टूबर 2023 को दल-निर्गमन, पैराशूट अवतरण और समुद्री पुनर्प्राप्ति क्रम को परखा।

  6. 6

    मिशन दिव्यास्त्र ने 11 मार्च 2024 को अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि-5 की एमआईआरवी क्षमता का सार्वजनिक प्रदर्शन किया।

  7. 7

    राष्ट्रीय क्वांटम मिशन 19 अप्रैल 2023 को ₹6,003.65 करोड़ के 8 वर्षीय प्रावधान के साथ स्वीकृत हुआ।

  8. 8

    29 फरवरी 2024 को स्वीकृत टाटा-पीएसएमसी धोलेरा परियोजना भारत की पहली वाणिज्यिक वेफर निर्माण लाइन है।

PYQ दोहराव

पिछले 10 साल: 19 बार पूछा गयाकुल जुड़े PYQ: 19

यह टॉपिक 2024, 2023, 2021, 2018, 2016 में पूछा गया है। पहले नोट दोहराएँ, फिर जुड़े प्रश्न खोलें।

चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को कैसे बदला?

चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सुरक्षित अवतरण से लेकर सूर्य के लगातार अवलोकन तक फैला दिया। चंद्रयान-3 ने भारत के 2023 के चंद्र अभियान को केवल प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं रहने दिया, बल्कि उसे पूर्ण प्रचालन क्षमता के प्रदर्शन में बदल दिया।

चंद्रयान-3 मिशन रूपरेखा

तत्वविवरण
प्रक्षेपण14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा से एलवीएम3-एम4 द्वारा प्रक्षेपित।
अवतरण लक्ष्य23 अगस्त 2023 के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में अवतरण लक्ष्य की ओर बढ़ा।
प्रणोदन मॉड्यूल5 अगस्त 2023 को चंद्र कक्षा में प्रवेश के बाद मिशन अंतिम अवतरण-क्रम की ओर बढ़ा, और 17 अगस्त 2023 को लैंडर मॉड्यूल प्रणोदन मॉड्यूल से अलग हुआ।
मुख्य विन्यासविक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर।
संचार रिलेसंचार रिले के लिए चंद्रयान-2 का कक्षीय यान उपयोग में रहा।
महत्वनए ऑर्बिटर की आवश्यकता नहीं पड़ी और पूरा ध्यान सुरक्षित अवतरण, दिशा-नियंत्रण तथा रोवर तैनाती पर रखा गया।

अवतरण और राष्ट्रीय महत्व

  • सॉफ्ट लैंडिंग: 23 अगस्त 2023 को 18:04 भारतीय मानक समय पर भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में 69.37 डिग्री दक्षिण, 32.35 डिग्री पूर्व के पास सॉफ्ट लैंडिंग पूरी की।
  • स्थल नाम: इस स्थान को बाद में शिव शक्ति बिंदु नाम दिया गया।
  • वैश्विक उपलब्धि: भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट ऐसा करने वाला पहला देश बना।
  • राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस: 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • तकनीकी अर्थ: इसने दिखाया कि भारत उच्च-अक्षांशीय क्षेत्र में थ्रॉटल नियंत्रण, जोखिम-नियंत्रण और अंतिम अवतरण स्थिरता को व्यावहारिक रूप से संभाल सकता है।

प्रज्ञान रोवर और सतह-विज्ञान

  • प्रज्ञान रोवर ने मिशन को सतह-विज्ञान में बदला।
  • लगभग 26 किलोग्राम द्रव्यमान वाला यह छह-पहियों का सौर-ऊर्जा चालित रोवर रैंप से नीचे उतरा।
  • रोवर लगभग 100 मीटर चला।
  • एपीएक्सएस तथा लिब्स नामक दो मुख्य उपकरणों से मापन किया गया।
  • इन अध्ययनों ने दक्षिणी ध्रुवीय रेगोलिथ में गंधक की पुष्टि की।
  • एल्युमिनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन तथा ऑक्सीजन जैसे तत्वों की पहचान भी दर्ज की।
  • इसलिए चंद्रयान-3 को केवल सफल लैंडिंग के लिए नहीं, बल्कि ऐसे क्षेत्र में प्रत्यक्ष रासायनिक प्रमाण देने के लिए भी याद किया जाता है जहाँ पहले कोई सफल सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हुई थी।

आदित्य-एल1 मिशन रूपरेखा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अनुसार आदित्य-एल1 में कुल 7 पेलोड हैं, इसलिए यह भारत की पहली समर्पित सौर वेधशाला को एक साथ कई प्रकार के सौर मापन कराने योग्य बनाता है।

तत्वविवरण
मिशन पहचानआदित्य-एल1, भारत की पहली समर्पित सौर वेधशाला।
प्रक्षेपण2 सितंबर 2023 को 11:50 भारतीय मानक समय पर श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी57 द्वारा प्रक्षेपित।
लक्ष्यनिम्न पृथ्वी कक्षा नहीं, बल्कि सूर्य-पृथ्वी के एल1 लैग्रेंज क्षेत्र तक पहुँचना।
अवलोकन मूल्यएल1 क्षेत्र से सूर्य का लगभग निरंतर अवलोकन संभव होता है।
यात्रा क्रमपृथ्वी-कक्षा चरणों, ट्रांस-एल1 यात्रा और पथ-संशोधनों के बाद 6 जनवरी 2024 को लगभग 16:00 भारतीय मानक समय पर हैलो-कक्षा प्रवेश पूरा हुआ।
स्थितियान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर सूर्य-पृथ्वी दिशा में स्थापित हुआ।
परिणामउसे बिना बार-बार पृथ्वी-अवरोध के दीर्घकालिक अवलोकन की स्थिति मिली।

पेलोड और अध्ययन

पेलोडविवरण
वीईएलसीदृश्य उत्सर्जन रेखा कोरोनाग्राफ; प्रमुख दूरसंवेदी उपकरण; बेंगलुरु स्थित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने विकसित किया।
सूट7 पेलोड में शामिल।
सोलेक्स7 पेलोड में शामिल।
हेलिओस7 पेलोड में शामिल।
एस्पेक्स7 पेलोड में शामिल।
पापा7 पेलोड में शामिल।
मैग्नेटोमीटर7 पेलोड में शामिल।
  • ये मिलकर कोरोना, वर्णमंडल, एक्स-किरण सक्रियता, सौर पवन कणों और चुम्बकीय क्षेत्र स्थितियों का अध्ययन करते हैं।
  • इसी संयोजन से आदित्य-एल1 केवल एक प्रक्षेपण उपलब्धि नहीं रहता, बल्कि भारत की सौर उपकरण-विकास क्षमता का भी प्रमाण बनता है।

राजस्थान संबंध

  • राजस्थान का योगदान पीआरएल की सौर-खगोल परंपरा से आता है।
  • उदयपुर सौर वेधशाला उदयपुर में फतेहसागर झील पर स्थित है।
  • माउंट आबू में पीआरएल की अलग अवरक्त वेधशाला है; इन दोनों को अलग पहचानना आवश्यक है।
  • उदयपुर की द्वीपीय वेधशाला का आरंभ 1975 में हुआ।
  • उसका प्रकाशित सौर एटलस 1976 से आगे के प्रेक्षणों को संजोता है।
  • पीआरएल के अभिलेखों में एम. के. वैनू बप्पू का नाम प्रारंभिक सहयोगियों में मिलता है।
  • यही दीर्घकालिक भू-आधारित अवलोकन आदित्य-एल1 के कोरोनल और वर्णमंडलीय संकेतों को संदर्भ, तुलना और व्याख्या प्रदान करते हैं।
  • इस तरह चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 मिलकर भारत की 2023-2024 अंतरिक्ष क्षमता को चंद्र सतह से सूर्य अवलोकन तक एक ही निरंतर वैज्ञानिक क्रम में स्थापित करते हैं।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

9 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें

संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQ23 अगस्त 2023 के भारत के चंद्र दक्षिणी ध्रुवीय अवतरण के नामित स्थल और निर्देशांक-पट्टी की सही पहचान कौन-सी है?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aशिव शक्ति बिंदु, लगभग 69.37°S 32.35°Eसही
  2. Bस्टैटियो तियान्हे, लगभग 45.44°S 177.60°E
  3. Cसी ऑफ ट्रैंक्विलिटी, लगभग 0.67°N 23.47°E
  4. Dविक्रम-2 बेस, लगभग 69.37°N 32.35°E

व्याख्या

विकल्प क सही है क्योंकि चंद्रयान-3 का विक्रम शिव शक्ति बिंदु के पास लगभग 69.37°S 32.35°E पर उतरा था। यह अवतरण 23 अगस्त 2023 को 18:04 भारतीय मानक समय पर हुआ, इसलिए ये निर्देशांक मिशन की आधिकारिक पहचान का हिस्सा हैं, कोई सामान्य चंद्र संदर्भ नहीं। इसी सफलता ने भारत को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला 4वाँ देश और दक्षिणी ध्रुव के निकट ऐसा करने वाला 1ला देश बनाया। विकल्प ख गलत है क्योंकि स्टैटियो तियान्हे एक अलग चीनी चंद्र संदर्भ से जुड़ा है, भारतीय लैंडिंग स्थल से नहीं। विकल्प ग गलत है क्योंकि सी ऑफ ट्रैंक्विलिटी अपोलो 11 से जुड़ा है, चंद्रयान-3 से नहीं। विकल्प घ गलत है क्योंकि इसमें काल्पनिक नाम दिया गया है और दक्षिणी अक्षांश को उत्तरी अक्षांश में बदल दिया गया है।

~50 शब्द · 1 अंक