उर्वरक विभाग (DoF) ने सतत कृषि, कार्बन तटस्थता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए उच्च-स्तरीय प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (प्री-ईओआई) बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की। नोएडा स्थित PDIL मुख्यालय में हुई इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. के.के. पाठक, संयुक्त सचिव (उर्वरक विभाग) ने की, जो PDIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी हैं। इसी सप्ताह विभाग ने ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) हेतु निमंत्रण जारी किया था। बैठक में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के हितधारक शामिल हुए, जिनमें NTPC, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI), अमोनिया-यूरिया प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ता, प्रमुख भारतीय उर्वरक कंपनियाँ तथा इलेक्ट्रोलाइज़र, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया बनाने वाली कंपनियाँ रहीं। नीति और परिचालन के स्तर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना को बढ़ाने हेतु ₹19,744 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई, जबकि उर्वरक विभाग को संस्थागत और बाज़ार-समानता ढांचा तैयार करने का काम सौंपा गया। ग्रे अमोनिया की तुलना में ग्रीन अमोनिया की अधिक लागत से निर्माताओं को बचाने के लिए ऑफटेकर-पक्ष विभेदक मूल्य व्यवस्था बनाई गई; SECI ने ग्रीन अमोनिया खरीदने हेतु निविदाएँ जारी कर दी हैं और इसे घरेलू उर्वरक कंपनियों को Platts व Argus सूचकांकों के दो-सप्ताह औसत, सीमा शुल्क तथा स्थानीय परिवहन के आधार पर बाज़ार-संबद्ध ग्रे अमोनिया कीमतों पर आपूर्ति किया जाएगा। NGHM (ग्रीन अमोनिया मोड 2A) के तहत SECI द्वारा संचालित ई-रिवर्स नीलामी से सालाना 7.24 लाख एमटी ग्रीन अमोनिया की खरीद का लक्ष्य रखा गया है, और GAPA/GASA समझौते से 10 वर्ष तक लाभ सुरक्षित रहेंगे। आंध्र प्रदेश के पुदिमाडाका में NETRA (NTPC का अनुसंधान प्रकोष्ठ) द्वारा विकसित 150 TPD ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट तकनीकी बेंचमार्क है, जो CCUS को वॉटर इलेक्ट्रोलेसिस से जोड़ता है। वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य के साथ उर्वरक क्षेत्र कैप्चर की गई CO2 का देश का सबसे बड़ा और भरोसेमंद उपभोक्ता बन सकता है।
सरकार भारत में ग्रीन यूरिया उत्पादन की रूपरेखा तैयार कर रही है
उर्वरक विभाग ने भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए नोएडा के PDIL में डॉ. के.के. पाठक की अध्यक्षता में प्री-ईओआई बैठक की, जिसे MNRE फंडिंग, SECI-नेतृत्व वाली ग्रीन अमोनिया खरीद और पुदिमाडाका पायलट प्लांट का सहारा मिला।
मुख्य तथ्य
- उर्वरक विभाग ने भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए नोएडा स्थित PDIL मुख्यालय में प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (प्री-ईओआई) बैठक आयोजित की।
- बैठक की अध्यक्षता डॉ. के.के. पाठक, संयुक्त सचिव (उर्वरक विभाग) ने की, जो PDIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी हैं।
- हितधारकों में NTPC, SECI, अमोनिया-यूरिया प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ता, उर्वरक कंपनियाँ तथा इलेक्ट्रोलाइज़र, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया बनाने वाली कंपनियाँ शामिल थीं।
- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना के लिए ₹19,744 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई; SECI ने ऑफटेकर-पक्ष विभेदक मूल्य व्यवस्था के तहत ग्रीन अमोनिया हेतु निविदाएँ जारी कीं।
- NGHM (ग्रीन अमोनिया मोड 2A) के तहत SECI ई-रिवर्स नीलामी से सालाना 7.24 लाख एमटी ग्रीन अमोनिया की खरीद होगी, और GAPA/GASA से 10 वर्ष तक लाभ सुरक्षित रहेंगे।
- आंध्र प्रदेश के पुदिमाडाका में NETRA (NTPC अनुसंधान प्रकोष्ठ) द्वारा विकसित 150 TPD ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट CCUS को वॉटर इलेक्ट्रोलेसिस से जोड़ते हुए तकनीकी बेंचमार्क है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए आयोजित प्री-ईओआई बैठक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. यह बैठक नोएडा स्थित PDIL मुख्यालय में आयोजित हुई और इसकी अध्यक्षता डॉ. के.के. पाठक, संयुक्त सचिव (उर्वरक विभाग) ने की।\n2. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना के लिए ₹7,244 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
कथन 1 सही है: प्री-ईओआई बैठक नोएडा स्थित PDIL मुख्यालय में हुई और इसकी अध्यक्षता डॉ. के.के. पाठक, संयुक्त सचिव (उर्वरक विभाग) ने की, जो PDIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी हैं। कथन 2 गलत है: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ₹19,744 करोड़ (न कि ₹7,244 करोड़) की प्रतिबद्धता जताई। अतः केवल कथन 1 सही है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उर्वरक विभाग द्वारा आयोजित प्री-ईओआई बैठक का उद्देश्य क्या था?
यह बैठक भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आयोजित की गई, जिसमें EoI निमंत्रण के बाद सार्वजनिक और निजी हितधारक एकत्र हुए। यह नोएडा के PDIL मुख्यालय में हुई और इसकी अध्यक्षता डॉ. के.के. पाठक ने की।
निर्माताओं को ग्रीन अमोनिया की अधिक लागत से कैसे बचाया जाएगा?
ऑफटेकर-पक्ष विभेदक मूल्य व्यवस्था के ज़रिए। SECI ने ग्रीन अमोनिया खरीदने हेतु निविदाएँ जारी की हैं और इसे घरेलू उर्वरक कंपनियों को Platts व Argus सूचकांकों के दो-सप्ताह औसत, सीमा शुल्क और स्थानीय परिवहन के आधार पर बाज़ार-संबद्ध ग्रे अमोनिया कीमतों पर आपूर्ति किया जाएगा।
पुदिमाडाका पायलट प्लांट का क्या महत्व है?
आंध्र प्रदेश के पुदिमाडाका में NETRA (NTPC अनुसंधान प्रकोष्ठ) द्वारा विकसित 150 TPD ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट तकनीकी बेंचमार्क है। यह उन्नत कार्बन कैप्चर एवं उपयोग (CCUS) को वॉटर इलेक्ट्रोलेसिस से जोड़ता है।
उर्वरक क्षेत्र कैप्चर की गई CO2 का बड़ा उपभोक्ता क्यों बन सकता है?
ग्रीन यूरिया बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड की ज़रूरत होती है, इसलिए CO2 का बाहरी स्रोत आवश्यक है। सालाना 12.7 लाख एमटी क्षमता वाले बड़े यूरिया प्लांट को हर साल लगभग 10 लाख एमटी CO2 चाहिए, और भारत सालाना लगभग 1 करोड़ एमटी यूरिया आयात करता है, इसलिए यह क्षेत्र देश का सबसे बड़ा और भरोसेमंद उपभोक्ता बन सकता है।
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