1 जुलाई 2015 को भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने के उद्देश्य से शुरू किया गया डिजिटल इंडिया अब ग्यारह वर्ष पूरे कर एक निर्णायक मोड़ पर है। पहले दशक में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और नागरिक सेवा वितरण का ढांचा तैयार करने के बाद, यह कार्यक्रम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर विनिर्माण पर केंद्रित है, जिन्हें 'विकसित भारत 2047' के विज़न के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इंटरनेट कनेक्शन लगभग चार गुना बढ़े हैं और मोबाइल डेटा की कीमत 269 रुपए प्रति जीबी से घटकर 8-10 रुपए हो गई है, जो दुनिया में सबसे किफायती में से एक है। 10,372 करोड़ रुपए से अधिक के परिव्यय वाले इंडियाएआई मिशन के तहत 45,000 से अधिक जीपीयू वाली साझा कंप्यूट सुविधा विकसित की गई है, और एआई कोश प्लेटफॉर्म पर 12,519 से अधिक डेटासेट, 307 एआई मॉडल और 20 टूलकिट उपलब्ध हैं। फरवरी 2026 में आयोजित भारत एआई इम्पैक्ट समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए; इसके घोषणापत्र को 92 देशों और संगठनों ने अपनाया तथा 200 अरब अमरिकी डॉलर से अधिक की निवेश प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुईं। भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपए की 12 विनिर्माण परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स 13 लाख करोड़ रुपए का उद्योग और भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन गया है, और भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। यूपीआई ने अप्रैल 2026 में दस वर्ष पूरे किए, वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ लेनदेन दर्ज किए और भारत के 81% डिजिटल भुगतान को संचालित किया। वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक 2015 के 81 से सुधरकर 2025 में 38 हो गई है।
डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष, एआई और सेमीकंडक्टर विनिर्माण की ओर निर्णायक मोड़
डिजिटल इंडिया ने 11 वर्ष पूरे किए और अब इसका ध्यान एआई व सेमीकंडक्टर विनिर्माण पर है, जिसमें इंडियाएआई मिशन, चिप परियोजनाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात और यूपीआई-आधारित डिजिटल भुगतान में बड़ी उपलब्धियां शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- डिजिटल इंडिया 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ और 11 वर्ष पूरे कर रहा है, अब इसका ध्यान एआई और सेमीकंडक्टर विनिर्माण पर है।
- मोबाइल डेटा की कीमत 269 रुपए प्रति जीबी से घटकर 8-10 रुपए हुई, जो विश्व में सबसे किफायती में से एक है।
- इंडियाएआई मिशन (परिव्यय 10,372 करोड़ रुपए से अधिक) ने 45,000+ जीपीयू वाली साझा कंप्यूट सुविधा बनाई; एआई कोश पर 12,519+ डेटासेट, 307 मॉडल और 20 टूलकिट हैं।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपए की 12 परियोजनाएं स्वीकृत; इलेक्ट्रॉनिक्स अब 13 लाख करोड़ रुपए का उद्योग और तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है।
- यूपीआई ने अप्रैल 2026 में 10 वर्ष पूरे किए, वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ लेनदेन और 81% डिजिटल भुगतान संचालित किए।
- वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक 2015 के 81 से सुधरकर 2025 में 38 हुई।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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डिजिटल इंडिया की 11वीं वर्षगांठ पर उल्लिखित इंडियाएआई मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. इंडियाएआई मिशन को 10,372 करोड़ रुपए से अधिक के परिव्यय से अनुमोदित किया गया था।\n2. इसके तहत 45,000 से अधिक जीपीयू वाली एक साझा कंप्यूट सुविधा विकसित की गई है।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
दोनों कथन सही हैं। इंडियाएआई मिशन को 10,372 करोड़ रुपए से अधिक के परिव्यय से अनुमोदित किया गया था, और इसके आधार के रूप में राष्ट्रीय एआई अनुसंधान एवं क्रियान्वयन हेतु 45,000 से अधिक जीपीयू वाली एक साझा कंप्यूट सुविधा विकसित की गई है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डिजिटल इंडिया कब शुरू हुआ और कितने वर्ष पूरे हुए?
डिजिटल इंडिया 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ और ग्यारह वर्ष पूरे कर रहा है, अब इसका ध्यान एआई और सेमीकंडक्टर विनिर्माण पर है।
इंडियाएआई मिशन ने क्या प्रगति की है?
10,372 करोड़ रुपए से अधिक के परिव्यय वाले इस मिशन ने 45,000+ जीपीयू वाली साझा कंप्यूट सुविधा बनाई, और एआई कोश पर 12,519+ डेटासेट, 307 एआई मॉडल और 20 टूलकिट उपलब्ध हैं।
कितनी सेमीकंडक्टर परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं?
भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपए की 12 विनिर्माण परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं।
दस वर्ष बाद यूपीआई की स्थिति क्या है?
यूपीआई ने अप्रैल 2026 में दस वर्ष पूरे किए, वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ लेनदेन दर्ज किए और भारत के 81% डिजिटल भुगतान को संचालित किया।
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