भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) ने भारतीय डेटा सुरक्षा परिषद (डीएससीआई) के सहयोग से 29 जून, 2026 को टीआरएल कम्पास प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। इस आयोजन की अध्यक्षता प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने की। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल) के आकलन को मानकीकृत करता है। यह विश्व स्तर पर स्वीकृत नौ-स्तरीय टीआरएल स्केल को भारत के अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप ढालता है और सार्वजनिक वित्त पोषण वाली परियोजनाओं के मूल्यांकन हेतु एक सामान्य राष्ट्रीय मानक उपलब्ध कराता है।

टीआरएल कम्पास अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) तथा अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहयोग देगा। इसमें स्वास्थ्य सेवा एवं फार्मास्यूटिकल्स तथा सॉफ्टवेयर के लिए क्षेत्र-विशिष्ट परिशिष्ट शामिल हैं, जो डोमेन-विशिष्ट मूल्यांकन को सक्षम बनाते हैं। यह प्लेटफॉर्म परियोजना मूल्यांकन को व्यक्तिपरक निर्णय के स्थान पर प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, गुणवत्ता एवं कार्यक्रम संबंधी तत्परता के वस्तुनिष्ठ, दस्तावेजी मूल्यांकन में बदल देता है।

प्रोफेसर सूद ने प्रौद्योगिकी तत्परता के आकलन, सार्वजनिक निवेश को दिशा देने तथा व्यावसायीकरण को समर्थन देने हेतु एक साझा ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया और संस्थानों को टीआरएल कम्पास को मानक ढाँचे के रूप में अपनाने की सलाह दी। ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी परिपक्वता के आकलन की सर्वमान्य पद्धति के अभाव में भारतीय नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुँचने में कठिनाई होती है। डीएससीआई के सीईओ श्री विनायक गोडसे तथा ओपीएसए की सलाहकार/वैज्ञानिक 'जी' डॉ. प्रीति बंजल ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जो प्रौद्योगिकी आकलन, क्षमता मानचित्रण एवं प्रौद्योगिकी रडार पद्धति के विकास में सहयोग को सुगम बनाएगा। यह प्लेटफॉर्म www.trlcompass.in पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।