शिक्षा मंत्रालय ने 5 मई 2026 को बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में IIT मद्रास के पहले प्रौद्योगिकी सम्मेलन का उद्घाटन किया। 'आईआईटीएम से, भारत के लिए, साथ मिलकर निर्माण' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और उपयोग में उद्योग, अकादमिक जगत और सरकार के बीच सहयोगी ढांचा बनाना था। प्रधान ने IIT मद्रास को अनुसंधान-आधारित और समाज से जुड़ा नवाचार संस्थान बताया, जो सार्वजनिक उद्देश्य वाले सहयोग और भारत की गहन प्रौद्योगिकी तथा अग्रणी अनुसंधान क्षमता को मजबूत कर रहा है। उन्होंने अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए सरकार के 1 लाख करोड़ रुपये के आवंटन को अनुसंधान क्षमता बढ़ाने और ज्ञान को मापने योग्य परिणामों में बदलने की मंशा का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 70% अनुसंधान निवेश सरकार से आता है, लेकिन दीर्घकालीन लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र और उद्योग के बीच अधिक संतुलित 50:50 साझेदारी होना चाहिए। मंत्री ने कहा कि नवाचार को केवल उद्धरणों, पेटेंट और प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गमों से नहीं, बल्कि ऐसे उत्पादों, विस्तार योग्य प्रौद्योगिकियों और सामाजिक समाधानों से आंका जाना चाहिए जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके। उन्होंने इसे भारत इनोवेट्स से जोड़ा, जो उच्च शिक्षा संस्थानों और केंद्रीय वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों को गहन प्रौद्योगिकी नवाचार के वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म पर लाता है। IIT मद्रास ने स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों और टिकाऊ भविष्य के लिए समर्पित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए NTPC लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और एचएसबीसी के साथ रणनीतिक साझेदारियों की घोषणा भी की। सम्मेलन प्रदर्शनी में उत्कृष्ट संस्थान ढांचे के तहत 15 उत्कृष्टता केंद्रों के स्वास्थ्य, स्थिरता, अर्धचालक, ऊर्जा और उन्नत सामग्री संबंधी कार्य प्रदर्शित किए गए।