21 अप्रैल 2026 को जारी पीआईबी सारांशों में बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के एक नए अध्ययन का उल्लेख किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के इस स्वायत्त संस्थान का अध्ययन भारत को जामुन (सिज़िजियम वंश) के विकास के उद्गम स्थल के रूप में स्थापित करता है। बीएसआईपी के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक एवं अभिनव अनुसंधान अकादमी (AcSIR) और नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के सहयोग से यह अध्ययन किया। इसके अनुसार इस वंश की उत्पत्ति लगभग 8 करोड़ वर्ष पहले पूर्वी गोंडवाना में हुई। दल ने हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के प्रारंभिक मियोसीन काल के लगभग 2 करोड़ वर्ष पुराने निक्षेपों से मिली 11 अच्छी तरह संरक्षित जीवाश्म पत्तियों का विश्लेषण किया। उसने 22 आकृतिक लक्षणों के आधार पर नई जीवाश्म प्रजाति सिज़िजियम पैलियोसैलिसिफोलियम का नामकरण किया। पुराने भारतीय जीवाश्म अभिलेखों की दोबारा जाँच से यह भी संकेत मिलता है कि सिज़िजियम लगभग 5.5 करोड़ वर्ष पहले प्रारंभिक इओसीन काल से भारतीय क्षेत्र में लगातार मौजूद रहा है। ये निष्कर्ष लंबे समय से चली आ रही उस धारणा का खंडन करते हैं कि जामुन की उत्पत्ति ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया में हुई थी। अध्ययन के अनुसार यह वंश पहले पूर्वी गोंडवाना के भारतीय क्षेत्र में विकसित हुआ। भारतीय प्लेट के गोंडवाना से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ने के साथ यह वंश भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए ऑस्ट्रेलिया तक फैला। यह अनुसंधान जैव-भूगोल, पादप विकास, स्वदेशी फल जर्मप्लाज्म के संरक्षण और नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की पादप आनुवंशिक संसाधन विरासत के दावे के लिए महत्त्वपूर्ण है।
21 अप्रैल 2026 को जारी बीरबल साहनी पुरातत्व विज्ञान संस्थान के अध्ययन में भारत को जामुन (सिज़िजियम) का विकास-संबंधी उद्गम स्थल बताया गया; कसौली संरचना से नई जीवाश्म प्रजाति सिज़िजियम पैलियोसैलिसिफोलियम की पहचान
21 अप्रैल 2026 के PIB सारांश में BSIP के जिस अध्ययन का उल्लेख किया गया, वह भारत को जामुन (सिज़िजियम) के विकास का उद्गम स्थल सिद्ध करता है। हिमाचल प्रदेश के कसौली संरचना (~2 करोड़ वर्ष पूर्व) से मिली ग्यारह जीवाश्म पत्तियों का विश्लेषण किया गया और नई प्रजाति सिज़िजियम पैलियोसैलिसिफोलियम की पहचान की गई। इससे वंश की उत्पत्ति ~8 करोड़ वर्ष पूर्व पूर्वी गोंडवाना तक जाती है और यह भी पता चलता है कि वह ~5.5 करोड़ वर्ष पूर्व प्रारंभिक इओसीन से भारत में लगातार मौजूद है।
मुख्य तथ्य
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के एक अध्ययन का उल्लेख 21 अप्रैल 2026 के पीआईबी सारांशों में किया गया। यह अध्ययन भारत को जामुन (सिज़िजियम वंश) के विकास के उद्गम स्थल के रूप में स्थापित करता है।
- बीएसआईपी के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक एवं अभिनव अनुसंधान अकादमी (AcSIR) और नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम किया।
- दल ने हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के प्रारंभिक मियोसीन काल के लगभग 2 करोड़ वर्ष पुराने निक्षेपों से मिली 11 अच्छी तरह संरक्षित जीवाश्म पत्तियों का विश्लेषण किया।
- 22 आकृतिक लक्षणों के आधार पर नई जीवाश्म प्रजाति सिज़िजियम पैलियोसैलिसिफोलियम का नामकरण किया गया।
- अध्ययन के अनुसार इस वंश की उत्पत्ति लगभग 8 करोड़ वर्ष पहले पूर्वी गोंडवाना में हुई और सिज़िजियम लगभग 5.5 करोड़ वर्ष पहले प्रारंभिक इओसीन काल से भारतीय क्षेत्र में लगातार मौजूद रहा है।
- ये निष्कर्ष लंबे समय से चली आ रही उस धारणा का खंडन करते हैं कि जामुन की उत्पत्ति ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया में हुई थी। अध्ययन के अनुसार यह वंश भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए ऑस्ट्रेलिया तक फैला।
- यह अनुसंधान जैव-भूगोल, स्वदेशी फल जर्मप्लाज्म के संरक्षण और नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की पादप आनुवंशिक संसाधन विरासत के दावे के लिए महत्त्वपूर्ण है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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21 अप्रैल 2026 को जामुन के विकास पर आए बीएसआईपी अध्ययन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नई जीवाश्म प्रजाति सिज़िजियम पैलियोसैलिसिफोलियम की पहचान हिमाचल प्रदेश के कसौली संरचना से हुई। 2. बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। 3. अध्ययन के अनुसार सिज़िजियम वंश की उत्पत्ति लगभग 8 करोड़ वर्ष पूर्व पूर्वी गोंडवाना में हुई थी। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
तीनों कथन सही हैं। नई जीवाश्म प्रजाति सिज़िजियम पैलियोसैलिसिफोलियम की पहचान हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के प्रारंभिक मियोसीन निक्षेपों से हुई। बीएसआईपी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। अध्ययन में स्पष्ट रूप से सिज़िजियम का उद्गम लगभग 8 करोड़ वर्ष पूर्व पूर्वी गोंडवाना से बताया गया है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
21 अप्रैल 2026 को जिस जामुन-विकास अध्ययन का उल्लेख किया गया, वह किस संस्थान ने किया?
यह अध्ययन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) ने वैज्ञानिक एवं अभिनव अनुसंधान अकादमी (AcSIR) और नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के सहयोग से किया। इसका उल्लेख 21 अप्रैल 2026 के पीआईबी सारांशों में किया गया।
बीएसआईपी के जामुन अध्ययन में किस नई जीवाश्म प्रजाति का नामकरण हुआ और वह किस संरचना से मिली?
दल ने 22 आकृतिक लक्षणों के आधार पर नई जीवाश्म प्रजाति सिज़िजियम पैलियोसैलिसिफोलियम का नामकरण किया। इसकी पहचान हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के प्रारंभिक मियोसीन काल के लगभग 2 करोड़ वर्ष पुराने निक्षेपों से मिली 11 अच्छी तरह संरक्षित जीवाश्म पत्तियों से हुई।
बीएसआईपी अध्ययन जामुन के भौगोलिक उद्गम के बारे में क्या कहता है?
अध्ययन के अनुसार सिज़िजियम वंश की उत्पत्ति लगभग 8 करोड़ वर्ष पहले पूर्वी गोंडवाना में हुई और यह वंश लगभग 5.5 करोड़ वर्ष पहले प्रारंभिक इओसीन काल से भारतीय क्षेत्र में लगातार मौजूद रहा है। अध्ययन लंबे समय से चली आ रही उस धारणा का खंडन करता है कि जामुन की उत्पत्ति ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया में हुई थी। इसके अनुसार यह वंश भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए ऑस्ट्रेलिया तक फैला।
यह निष्कर्ष केवल पुरापादपविज्ञान तक सीमित क्यों नहीं है?
यह अध्ययन जैव-भूगोल, पादप विकास, स्वदेशी फल जर्मप्लाज्म के संरक्षण और नागोया प्रोटोकॉल के तहत पहुँच एवं लाभ-साझाकरण के लिए महत्त्वपूर्ण है। इससे भारत का यह दावा भी मज़बूत होता है कि जामुन उसकी पादप आनुवंशिक संसाधन विरासत का हिस्सा है।
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