20 अप्रैल 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने लखनऊ स्थित अपने स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुरावैज्ञानिक संस्थान (बीएसआईपी) के नेतृत्व में हुए एक प्रमुख पुरावनस्पतिशास्त्र अध्ययन के निष्कर्ष जारी किए। इन निष्कर्षों के अनुसार भारत जामुन (सिज़ीजियम वंश) के विकासक्रम का एक प्रमुख उद्गम क्षेत्र रहा है। बीएसआईपी के शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी (एCSIR) तथा त्रिभुवन विश्वविद्यालय के सहयोग से हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के लगभग 2 करोड़ वर्ष पुराने प्रारंभिक माइओसीन निक्षेपों से सिज़ीजियम के 11 सुरक्षित जीवाश्म पत्ते प्राप्त किए और नई प्रजाति का नाम सिज़ीजियम पैलियोसैलिसिफोलियम रखा। नए जीवाश्म रिकॉर्ड को पूर्व के भारतीय जीवाश्म रिकॉर्डों की पुनर्जाँच से जोड़कर दल ने निष्कर्ष निकाला कि सिज़ीजियम का पूर्वी गोंडवानन उद्गम लगभग 8 करोड़ वर्ष पूर्व का है और यह वंश 5.5 करोड़ वर्ष पूर्व प्रारंभिक इओसीन तक भारतीय प्लेट पर पहले ही मौजूद था। यह उस पुरानी धारणा से बहुत पहले की स्थिति दिखाता है कि जामुन का उद्गम ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया में हुआ। डॉ. गौरव श्रीवास्तव के नेतृत्व में यह अध्ययन जर्नल ऑफ पैलियोग्राफी में डीओआई 10.1016 जे.जॉप.2026.100343 के तहत प्रकाशित हुआ। यह भारत के सबसे सांस्कृतिक एवं आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फल वृक्षों में से एक की विकास समय-रेखा को नए सिरे से समझाता है और एशियाई वनस्पति के विविधीकरण में भारत की भूमिका को रेखांकित करता है। इन निष्कर्षों का जैव विविधता संरक्षण, कृषि वानिकी के लिए जलवायु-लचीलापन रणनीतियों और हिमालयी पारितंत्र को बनाए रखने के राष्ट्रीय अभियान के तहत स्वदेशी फल वृक्ष गलियारों से जुड़े नीति निर्धारण पर प्रत्यक्ष प्रभाव है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 20 अप्रैल 2026 को बीरबल साहनी संस्थान का अध्ययन जारी किया; कसौली संरचना से मिले नये माइओसीन जीवाश्म भारत को लगभग 8 करोड़ वर्ष पूर्व जामुन (सिज़ीजियम) के विकास का उद्गम-स्थल बताते हैं
20 अप्रैल 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के 2 करोड़ वर्ष पुराने प्रारंभिक माइओसीन जीवाश्म पत्तों पर आधारित बीरबल साहनी पुरावैज्ञानिक संस्थान का अध्ययन जारी किया, एक नई प्रजाति सिज़ीजियम पैलियोसैलिसिफोलियम का नामकरण किया और निष्कर्ष निकाला कि जामुन का उद्गम लगभग 8 करोड़ वर्ष पूर्व भारत में हुआ, जो ऑस्ट्रेलियाई या दक्षिण-पूर्व एशियाई उद्गम के लंबे समय से चले आ रहे सिद्धांत का खंडन करता है।
मुख्य तथ्य
- 20 अप्रैल 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने डॉ. गौरव श्रीवास्तव के नेतृत्व में बीरबल साहनी पुरावैज्ञानिक संस्थान (बीएसआईपी) के अध्ययन के निष्कर्ष जारी किए।
- शोधकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के लगभग 2 करोड़ वर्ष पुराने प्रारंभिक माइओसीन निक्षेपों से सिज़ीजियम के 11 सुरक्षित जीवाश्म पत्तों को बरामद किया।
- नई प्रजाति का नाम सिज़ीजियम पैलियोसैलिसिफोलियम रखा गया।
- अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि सिज़ीजियम का पूर्वी गोंडवानन उद्गम लगभग 8 करोड़ वर्ष पूर्व का है तथा यह वंश 5.5 करोड़ वर्ष पूर्व प्रारंभिक इओसीन तक पहले ही भारतीय प्लेट पर उपस्थित था।
- निष्कर्ष इस लंबे समय से चली आ रही धारणा को पलटते हैं कि जामुन का उद्गम ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया में हुआ।
- यह शोधपत्र जर्नल ऑफ पैलियोग्राफी (डीओआई: 10.1016 जे.जॉप.2026.100343) में प्रकाशित हुआ और बीएसआईपी का एCSIR एवं त्रिभुवन विश्वविद्यालय के साथ सहयोग था।
- बीएसआईपी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संस्थान है तथा लखनऊ में स्थित है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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20 अप्रैल 2026 को जारी जामुन यानी सिज़ीजियम पर बीरबल साहनी पुरावैज्ञानिक संस्थान के अध्ययन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बीरबल साहनी पुरावैज्ञानिक संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और लखनऊ में स्थित है। 2. इस अध्ययन में हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना से मिली 11 संरक्षित जीवाश्म पत्तियों के आधार पर सिज़ीजियम पैलियोसैलिसिफोलियम नाम की नई प्रजाति पहचानी गई। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
दोनों कथन सही हैं। बीएसआईपी लखनऊ में स्थित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है, तथा अध्ययन ने हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना से बरामद 11 जीवाश्म पत्तों का वर्णन किया और नई प्रजाति का नाम सिज़ीजियम पैलियोसैलिसिफोलियम रखा।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
20 अप्रैल 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने जामुन (सिज़ीजियम) की उत्पत्ति पर जो अध्ययन जारी किया, उसका नेतृत्व किस भारतीय संस्थान ने किया?
लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है।
नये सिज़ीजियम जीवाश्म कहाँ से बरामद किए गए?
हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना के लगभग 2 करोड़ वर्ष पुराने प्रारंभिक माइओसीन निक्षेपों से।
नये पहचाने गए जीवाश्म प्रजाति को क्या नाम दिया गया है?
सिज़ीजियम पैलियोसैलिसिफोलियम, जिसका नामकरण उसी अध्ययन में किया गया और 11 सुरक्षित जीवाश्म पत्तों से वर्णित किया गया।
नया अध्ययन किस पूर्ववर्ती सिद्धांत का खंडन करता है?
लंबे समय से यह धारणा चली आ रही थी कि जामुन का उद्गम ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया में हुआ। नया अध्ययन भारत को लगभग 8 करोड़ वर्ष पूर्व पूर्वी गोंडवानन उद्गम वाला मुख्य उद्गम-स्थल मानता है।
नया सिज़ीजियम उद्गम शोधपत्र किस वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ?
यह अध्ययन डॉ. गौरव श्रीवास्तव के नेतृत्व में जर्नल ऑफ पैलियोग्राफी में डीओआई 10.1016 जे.जॉप.2026.100343 के तहत प्रकाशित हुआ।
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