पर्यटन मंत्रालय ने नीति आयोग के सहयोग से नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में 'पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास के द्वार खोलना' शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट भारत के पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में नियमों को सरल बनाने, व्यापार करने में सुगमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और सतत विकास को गति देने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करती है। इसका विमोचन केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, नीति आयोग के सदस्य राजीव गाबा, पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार तथा अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला ने किया। गणमान्य व्यक्तियों ने पर्यटन को आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास के प्रमुख चालक के रूप में रेखांकित किया तथा केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और उद्योग जगत के हितधारकों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। यह रिपोर्ट आवास प्रदाताओं, आतिथ्य प्रतिष्ठानों, होमस्टे, खाद्य एवं पेय सेवाओं, टूर ऑपरेटरों और पर्यटन अवसंरचना परियोजनाओं को नियंत्रित करने वाले विनियमों के विस्तृत मूल्यांकन के आधार पर निवेश, परियोजना कार्यान्वयन, आवास क्षमता और संस्थागत समन्वय को प्रभावित करने वाली प्रमुख नियामक बाधाओं की पहचान करती है। यह नियामक एवं अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनुपालन के बोझ को कम करने, अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने, आवास क्षमता का विस्तार करने और पर्यटन उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के उपायों की सिफारिश करती है। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, यह रिपोर्ट टिकाऊ, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देते हुए आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास में पर्यटन के योगदान को मजबूत करने का प्रयास करती है। कार्यशाला में राज्य सरकारों, उद्योग संघों, आतिथ्य क्षेत्र के हितधारकों, ऑनलाइन यात्रा प्लेटफार्मों, शैक्षणिक संस्थानों, ज्ञान भागीदारों और केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।