पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 16 जनवरी 2026 को राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) घोषित करने की औपचारिक अधिसूचना जारी की। यह ESZ अभयारण्य की सीमा से शून्य से एक किलोमीटर तक फैला है और उदयपुर, पाली और राजसमंद जिलों के 94 गाँवों को शामिल करते हुए लगभग 243 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है। कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय, चिंकारा और कई पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ESZ अधिसूचना के तहत वाणिज्यिक खनन, प्रदूषणकारी उद्योग, ईंट भट्टे और पर्यटन से जुड़े बड़े नए बुनियादी ढाँचे पर प्रतिबंध है। जैविक खेती, कृषि-वानिकी और कौशल विकास कार्यक्रमों जैसी पर्यावरण के अनुकूल पहलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। कुंभलगढ़ किला — एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल — इसी क्षेत्र में स्थित है। अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल को उपजाऊ मैदानों की ओर फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और ESZ की घोषणा इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजस्थान की अरावली श्रृंखला में कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया: MoEFCC ने 94 गाँवों वाले 243 वर्ग किमी बफर को अधिसूचित किया
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 16 जनवरी 2026 को राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास एक इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) घोषित करते हुए एक औपचारिक अधिसूचना जारी की। ESZ अभयारण्य की सीमा से शून्य से एक किलोमीटर तक फैला है और उदयपुर, पाली और राजसमंद जिलों के 94 गाँवों सहित लगभग 243 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आता है। कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय, चिंकारा और कई पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ESZ अधिसूचना के तहत वाणिज्यिक खनन, प्रदूषणकारी उद्योग, ईंट भट्टे और पर्यटन से जुड़े बड़े नए बुनियादी ढाँचे पर प्रतिबंध है। जैविक खेती, कृषि-वानिकी और कौशल विकास कार्यक्रमों जैसी पर्यावरण-अनुकूल पहलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। कुंभलगढ़ किला — एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल — इसी क्षेत्र में स्थित है। अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल के उपजाऊ मैदानों में विस्तार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और ESZ घोषणा इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य तथ्य
- MoEFCC ने 16 जनवरी 2026 को कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया।
- ESZ उदयपुर, पाली और राजसमंद के 94 गाँवों में लगभग 243 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है।
- ESZ में वाणिज्यिक खनन, प्रदूषणकारी उद्योग और ईंट भट्टों पर प्रतिबंध है।
- अभयारण्य में तेंदुआ, भारतीय पैंगोलिन, चिंकारा और विविध पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- कुंभलगढ़ किला राजस्थान के पहाड़ी किलों के समूह में UNESCO विश्व धरोहर स्थल है।
- अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल को उपजाऊ मैदानों की ओर फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य ESZ राजस्थान के किन तीन जिलों में फैला है?
ESZ राजस्थान के उदयपुर, पाली और राजसमंद जिलों में लगभग 243 वर्ग किमी और 94 गाँवों में फैला है और अरावली की जैव विविधता की रक्षा करता है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन को कब और किस प्राधिकरण ने अधिसूचित किया?
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन को 16 जनवरी 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने अधिसूचित किया। यह अधिसूचना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जारी की जाती है, जो MoEFCC को संरक्षित क्षेत्रों के निकट गतिविधियों को विनियमित करने का अधिकार देता है।
कुंभलगढ़ ESZ का भौगोलिक विस्तार क्या है और इसमें कितने गाँव आते हैं?
कुंभलगढ़ ESZ अभयारण्य की सीमा से शून्य से एक किलोमीटर तक फैला है और लगभग 243 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आता है। इसमें राजस्थान के तीन जिलों — उदयपुर, पाली और राजसमंद — के 94 गाँव शामिल हैं।
इको-सेंसिटिव जोन में कौन-सी गतिविधियाँ प्रतिबंधित हैं और कौन-सी विनियमित हैं?
ESZ में वाणिज्यिक खनन, प्रदूषणकारी उद्योग, ईंट भट्टे, बड़ी जलविद्युत परियोजनाएँ और लकड़ी का व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित हैं। होटल, रिसॉर्ट और जिन उद्योगों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी जरूरी है, वे विनियमित हैं, जबकि स्थानीय समुदायों की कृषि और पारंपरिक भूमि उपयोग आमतौर पर अनुमत हैं।
अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान के लिए पारिस्थितिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
अरावली भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है और यह थार मरुस्थल को पूर्वी राजस्थान के उपजाऊ मैदानों में फैलने से रोकने वाली प्राकृतिक बाधा है। यह कई नदियों का जलग्रह क्षेत्र है, भूजल पुनर्भरण को बनाए रखती है और तेंदुओं, पैंगोलिन और विविध पक्षी प्रजातियों सहित महत्वपूर्ण जैव विविधता को आश्रय देती है।
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य और UNESCO विश्व धरोहर स्थल के दर्जे के बीच क्या संबंध है?
कुंभलगढ़ किला इसी अभयारण्य क्षेत्र में स्थित है और 2013 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल 'राजस्थान के पहाड़ी किलों' के समूह का हिस्सा है। यह किला अपनी 36 किलोमीटर लंबी दीवार के लिए प्रसिद्ध है, जिसे चीन की महान दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी लगातार बनी हुई दीवार माना जाता है।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें