ग्रेट निकोबार द्वीप (जीएनआई) विकास क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान 2047 का मसौदा 11 अप्रैल 2026 को व्यापक रूप से प्रकाशित हुआ और समाचारों में चर्चा में आया। यह मसौदा द्वीप को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स, रक्षा और पर्यटन केंद्र में बदलने का 25-वर्षीय रोडमैप तय करता है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम (ANIIDCO) के तत्वावधान में तैयार इस योजना में 2055 तक 3.36 लाख निवासी आबादी का अनुमान लगाया गया है और सालाना दस लाख से अधिक पर्यटकों का लक्ष्य रखा गया है। इसमें पर्यटन को "मुख्य आर्थिक आधार" के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रमुख घटकों में गैलेथिया खाड़ी पर अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (आईसीटीटी), एक ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक टाउनशिप और 450 एमवीए क्षमता का गैस व सौर ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र शामिल हैं। मसौदा योजना में सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर बंदरगाह से जुड़े वित्तीय केंद्र, योग और आयुर्वेद के वेलनेस केंद्र तथा मनोरंजन और गेमिंग क्षेत्र की कल्पना की गई है। विकास को चार चरणों में बांटा गया है: आधार परियोजनाएं और ऊर्जा अवसंरचना (2025-2029), पर्यटन विस्तार (2030-2035), सुदृढ़ीकरण (2036-2041) और भविष्य का विस्तार (2042-2047)। स्थानीय निकोबारी और शोंपेन जनजातीय समुदायों तथा पर्यावरण समूहों ने परियोजना की आलोचना की है। उन्होंने वन अधिकारों के अनसुलझे मुद्दों, संवेदनशील उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में जैव विविधता की हानि, गैलेथिया खाड़ी में लेदरबैक कछुए के घोंसले के स्थलों पर खतरे और द्वीप की भूकंप व सुनामी के प्रति भेद्यता का उल्लेख किया है (यह 2004 के भूकंप क्षेत्र के किनारे स्थित है)। निकोबारी समुदाय के पुनर्वास के लिए 42.52 करोड़ रुपये प्रस्तावित करने वाली व्यापक जनजातीय कल्याण योजना का मसौदा परामर्श के लिए अलग से जारी किया गया है। मलक्का जलडमरूमध्य और इंडो-पैसिफिक शिपिंग मार्गों से निकटता के कारण ग्रेट निकोबार परियोजना का रणनीतिक महत्व अत्यधिक है।