प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दे
मुख्य तथ्य
- जलवायु परिवर्तन: वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.1°C ऊपर (2024)। CO₂: 425 ppm (2024) बनाम 280 ppm (पूर्व-औद्योगिक)। 2023
- ओज़ोन परत क्षरण — पीवाईक्यू 2023 (10 अंक): ओज़ोन परत समतापमंडल में 15–35 किमी ऊँचाई पर स्थित है और सूर्य के हानिकारक पराबैंगनी-बी तथा पराबैंगनी-सी विक...
- जैव विविधता क्षति: पृथ्वी 6वाँ महाविलोपन
- मरुस्थलीकरण: शुष्क भूमि का मानव-जनित/जलवायु परिवर्तन से क्षरण
- प्लास्टिक प्रदूषण: हर साल 40 करोड़ टन उत्पादन; केवल 9% पुनर्चक्रित। माइक्रोप्लास्टिक मारियाना ट्रेंच, आर्कटिक और मानव रक्त तक में पाए गए। वैश्विक प्लास्टिक संधि (2024)
मुख्य बिंदु
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जलवायु परिवर्तन: वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.1°C ऊपर (2024)। CO₂: 425 ppm (2024) बनाम 280 ppm (पूर्व-औद्योगिक)। 2023 — रिकॉर्ड सबसे गर्म वर्ष। पेरिस समझौता (2015): 1.5°C/2°C सीमा।
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ओज़ोन परत क्षरण — पीवाईक्यू 2023 (10 अंक): ओज़ोन परत समतापमंडल में 15–35 किमी ऊँचाई पर स्थित है और सूर्य के हानिकारक पराबैंगनी-बी तथा पराबैंगनी-सी विकिरण का 97–99% अवशोषित करती है। ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों में क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन, हेलोन और कार्बन टेट्राक्लोराइड आते हैं; इनके मुख्य स्रोत रेफ्रिजरेंट, एरोसोल और अग्निशामक रहे हैं। अंटार्कटिक ओज़ोन छिद्र 1985 में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे ने खोजा। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) को सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौता कहा जाता है, क्योंकि इसने ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों में 99% कमी कराई।
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जैव विविधता क्षति: पृथ्वी 6वाँ महाविलोपन — वर्तमान विलोपन दर 100–1,000× प्राकृतिक दर। IUCN रेड लिस्ट (2024): 44,016 प्रजातियाँ संकटग्रस्त (28%)। प्रमुख कारण: आवास नाश, अत्यधिक दोहन, आक्रामक प्रजातियाँ।
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मरुस्थलीकरण: शुष्क भूमि का मानव-जनित/जलवायु परिवर्तन से क्षरण — पृथ्वी की 40% भूमि प्रभावित; 3.2 अरब लोग। UNCCD (1994)। राजस्थान: पश्चिमी क्षेत्र में रेत के टीले 0.5–1.5 किमी/वर्ष आगे।
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प्लास्टिक प्रदूषण: हर साल 40 करोड़ टन उत्पादन; केवल 9% पुनर्चक्रित। माइक्रोप्लास्टिक मारियाना ट्रेंच, आर्कटिक और मानव रक्त तक में पाए गए। वैश्विक प्लास्टिक संधि (2024) — संयुक्त राष्ट्र वार्ता।
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वनोन्मूलन: हर साल 47 लाख हेक्टेयर वन की शुद्ध हानि। अमेज़न का 18–20% नष्ट — टिपिंग प्वाइंट (~25%) का खतरा। REDD+ — संयुक्त राष्ट्र वन संरक्षण तंत्र।
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महासागर अम्लीकरण: महासागर 30% CO₂ अवशोषित करते हैं → H₂CO₃ → pH 8.2 से 8.1 (26% अधिक अम्लीय)। मूँगा भित्तियाँ (CaCO₃) घुलती हैं — विरंजन एवं मृत्यु।
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समुद्र स्तर वृद्धि: 1900 से ~20 सेमी वृद्धि; 3.7 मिमी/वर्ष। कारण: तापीय विस्तार (60–70%), हिमखंड पिघलाव। तुवालू, किरिबाती, मालदीव अस्तित्व संकट में।
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हिमनद पीछे हटना: वैश्विक ~31 अरब टन/वर्ष हिम हानि। गंगोत्री हिमनद ~22 मी/वर्ष पीछे। संयुक्त राष्ट्र 2025 — हिमनद संरक्षण अंतरराष्ट्रीय वर्ष।
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वायु प्रदूषण: PM2.5 — सबसे घातक; ~70 लाख मृत्यु/वर्ष। भारत का NCAP: 2026 तक PM2.5 में 40% कटौती। दिल्ली AQI शीतकाल में 400+ (खतरनाक: 300+)।
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प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौते: स्टॉकहोम 1972, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987, क्योटो प्रोटोकॉल 1997, पेरिस समझौता 2015, CBD 1992, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल 2022।
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भारत की पर्यावरण प्रतिबद्धताएँ: पेरिस NDC — 2070 तक नेट जीरो; 2030 तक 50% बिजली गैर-जीवाश्म स्रोतों से; NAPCC 2008 — 8 मिशन।
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RAS भूगोल में प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दे इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?
RAS भूगोल में प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दे इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह विषय बार-बार 10 और 20 अंकों के विश्लेषणात्मक प्रश्नों में आता है और विश्व, भारत तथा राजस्थान तीनों संदर्भों को जोड़ता है। RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम में विश्व भूगोल के तहत पर्यावरणीय और पारिस्थितिक मुद्दे अलग से दिए गए हैं, और उसी पाठ्यक्रम में प्रारंभिक परीक्षा का सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान पेपर 200 अंकों का बताया गया है।
विषय 77 पेपर द्वितीय भूगोल में सर्वाधिक अंक देने वाला विषय है, जिसकी 6 वर्षों की कुल संख्या 35 अंक और औसत 7.0 अंक/वर्ष है। यह 5 परीक्षा वर्षों में से 4 (2013, 2016, 2021, 2023) में आया और 2021 तथा 2023 दोनों में इस विषय से 10 अंकों के प्रश्न थे। 2026 के लिए यह कम से कम एक 10-अंकीय प्रश्न की लगभग निश्चित संभावना है।
पूर्ववर्ष प्रश्न पैटर्न विश्लेषण:
- 2023: प्रश्न 37 (10 अंक) — "ओजोन परत क्षरण के कारण और प्रभाव" — बहुत विशिष्ट
- 2021: प्रश्न 11 (10 अंक) — "दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की भू-राजनीति" — व्यापक पर्यावरणीय भू-राजनीति
- 2016: 10 अंक — पर्यावरणीय मुद्दे (पारिस्थितिक अखंडता)
- 2013: प्रश्न 40 (20 अंक) — भारत/विश्व पारिस्थितिक संकट
2026 पूर्वानुमान: प्रवृत्ति को देखते हुए, (क) जलवायु परिवर्तन/पेरिस समझौता (10 अंक) या (ख) जैव विविधता/पारिस्थितिक तंत्र सेवाएँ (10 अंक), साथ ही संभवतः ओजोन क्षरण या प्लास्टिक प्रदूषण (5 अंक) की उम्मीद है। RPSC आमतौर पर चक्रण करता है — चूँकि ओजोन 2023 में पूछा गया था, 2026 में जलवायु परिवर्तन या जैव विविधता की उम्मीद है।
दायरा: विश्व स्तर पर लेकिन भारत-विशिष्ट संदर्भ भी प्रासंगिक (भारत के राष्ट्रीय निर्धारित योगदान, राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना, हिमालयी ग्लेशियर)। राजस्थान संदर्भ भी प्रासंगिक है (मरुस्थलीकरण, जल संकट)।
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15Mओज़ोन परत क्या है? इसके क्षरण के कारण बताइए।
मॉडल उत्तर
ओज़ोन परत (समतापमंडल, 15–35 किमी) UV-B/C का 97–99% अवशोषण करती है। क्षरण के कारण: (1) CFCs (रेफ्रिजरेंट, एरोसोल — 1 Cl परमाणु 1,00,000 O₃ अणुओं का उत्प्रेरक नाश); (2) हेलोन (अग्निशामक); (3) CCl₄; (4) N₂O (उर्वरक — अनियंत्रित सबसे महत्त्वपूर्ण ODS)। अंटार्कटिक ध्रुवीय भँवर बसंत में क्षरण बढ़ाता है।
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