आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने समुद्री इको-लेबलिंग के लिए भारत के राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का प्रारूप तैयार किया है, जिसमें समुद्री खाद्य संधारणीयता प्रमाणन कार्यक्रमों को विनियमित करने तथा देश के समुद्री उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु एक व्यापक ढांचा प्रस्तावित किया गया है। चर्चा पत्र के रूप में जारी यह प्रारूप ऐसे समय आया है जब भारतीय समुद्री खाद्य के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संधारणीयता प्रमाणन की मांग बढ़ रही है और वैश्विक प्रमाणन एजेंसियों की देश में रुचि बढ़ रही है। प्रस्तावित दिशानिर्देशों की एक प्रमुख विशेषता पर्यावरणीय संधारणीयता को बढ़ावा देते हुए और भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए प्रीमियम बाजार पहुंच सुगम करते हुए मछुआरा समुदाय के हितों की रक्षा करना है। प्रारूप यह स्वीकार करता है कि यद्यपि इको-लेबलिंग मात्स्यिकी को उच्च मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच दिला सकती है, परंतु बाजार-संचालित प्रमाणन प्रणालियां लघु एवं पारंपरिक मछुआरा समुदायों के लिए बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं। इसके समाधान हेतु ढांचा पारंपरिक एवं दस्तकार मछुआरों की प्रमाणन प्रक्रियाओं में समान भागीदारी का आह्वान करता है। वर्तमान में भारत के पास ऐसी प्रमाणन प्रक्रियाओं को संचालित करने हेतु कोई राष्ट्रीय तंत्र नहीं है। प्रारूप अपने अनन्य आर्थिक क्षेत्र के भीतर समुद्री मात्स्यिकी संसाधनों पर देश के संप्रभु अधिकारों की पुनः पुष्टि करता है और समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला में पता लगाने की क्षमता पर बल देता है तथा एक स्वदेशी भारतीय समुद्री इको-लेबल विकसित करने की संभावना तलाशता है।