यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन में बताया गया कि MAM01 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ने नैदानिक परीक्षणों में उच्चतम खुराक पर मलेरिया से 100% सुरक्षा दी। एक ही खुराक के रूप में दी जाने वाली यह एंटीबॉडी मलेरिया परजीवी (प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम) को रक्तप्रवाह में पहुँचने से पहले निष्क्रिय कर देती है और कई महीनों तक सुरक्षा देती है।

पारंपरिक मलेरिया-रोधी दवाओं और RTS,S/AS01 (मॉस्किरिक्स) जैसे टीकों के मुकाबले यह बड़ी प्रगति है, क्योंकि इन टीकों की प्रभावकारिता केवल 30-40% है। वैश्विक मलेरिया मामलों और मलेरिया से होने वाली मौतों, दोनों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 2% है। राजस्थान में थार रेगिस्तान के सीमावर्ती जिलों—बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर—को मलेरिया से लगातार प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है। लंबे समय तक बचाव देने वाला यह तरीका इन जिलों में बड़ा बदलाव ला सकता है।